हावड़ा उत्तर, एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र और लोकसभा क्षेत्र है. यह पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में स्थित है. पहले यह क्षेत्र हावड़ा नॉर्थ के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2011 में सीमांकन आयोग की सिफारिशों के बाद इसका नाम बदलकर हावड़ा उत्तर कर दिया गया और इसकी संरचना में भी बदलाव हुआ. अब यह क्षेत्र हावड़ा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की 14
वार्डों से मिलकर बना है जिसमें वार्ड नंबर 1 से 7 और 10 से 16 शामिल है.
1951 में स्थापित यह सीट लंबे समय तक कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला रही है, जहां प्रत्येक पार्टी ने सात बार जीत दर्ज की. लेकिन इसके नाम बदलने के बाद से त्रिणमूल कांग्रेस (TMC) ने लगातार तीन चुनाव जीते हैं. खास बात यह रही कि त्रिणमूल कांग्रेस ने हर बार अलग उम्मीदवार को मैदान में उतारा और हर बार उपविजेता अलग-अलग पार्टी का रहा.
2011 विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के अशोक घोष ने CPI(M) के नेमाई सामंता को 19,608 वोटों से हराकर पार्टी की जीत का सिलसिला शुरू किया. 2016 में, पूर्व भारतीय क्रिकेटर लक्ष्मी रतन शुक्ला ने त्रिणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस के संतोष कुमार पाठक को 26,959 वोटों के बड़े अंतर से हराया. 2021 में, गौतम चौधुरी को उम्मीदवार बनाकर त्रिणमूल कांग्रेस ने सीट पर कब्जा बरकरार रखा, लेकिन इस बार अंतर केवल 5,522 वोटों का रहा. इस बार भाजपा के उमेश राय ने दूसरा स्थान प्राप्त किया. भाजपा ने अपने वोट शेयर में जबरदस्त उछाल दिखाते हुए 44.12% (66,053 वोट) हासिल किए, जबकि त्रिणमूल कांग्रेस ने 47.81% (71,575 वोट) हासिल किए. वहीं, एक समय में प्रमुख दल रहे CPI(M) को मात्र 5.43% (8,133 वोट) ही मिले, भले ही उसने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था.
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा हावड़ा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में 2,961 वोटों से आगे थी. लेकिन 2024 में तृणमूल कांग्रेस ने पुनः बढ़त बनाई, हालांकि मात्र 10,031 वोटों से. वहीं, CPI(M)-कांग्रेस गठबंधन को केवल 8,936 वोट ही प्राप्त हुए थे.
2021 में कुल पंजीकृत मतदाता 218,547 थे जिसमें मुस्लिम मतदाता 11.80%, अनुसूचित जाति मतदाता 2.28% थे. यह एक पूर्ण रूप से शहरी क्षेत्र है, इसलिए मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहता है. 2016 में 67.98%, 2019 लोकसभा चुनाव में 70.14%, और 2021 में 60.41% रहा था.
हावड़ा उत्तर विधानसभा क्षेत्र होगली नदी के पार कोलकाता से जुड़ा हुआ है और यह महानगर कोलकाता का एक अभिन्न हिस्सा माना जाता है. यहां के प्रमुख इलाकों में सलकिया, घुसुरी, पिलखाना, और बेलूर शामिल है. हावड़ा जंक्शन रेलवे स्टेशन, जो भारत का सबसे व्यस्त और प्राचीन रेलवे स्टेशन है, भी इसी क्षेत्र में आता है. सड़क और रेल नेटवर्क के साथ-साथ हुगली नदी पार करने के लिए नौका सेवाएं भी उपलब्ध है. हावड़ा ब्रिज इस क्षेत्र को सीधे कोलकाता से जोड़ता है.
पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के रुझान यह संकेत देते हैं कि 2026 का चुनाव हावड़ा उत्तर में कड़ा मुकाबला हो सकता है. भाजपा ने लगातार अपने वोट शेयर में वृद्धि की है और वे बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं को साधने की कोशिश करेंगे, जो वर्तमान तृणमूल सरकार से नाराज हैं. वहीं, तृणमूल कांग्रेस को अपने समीकरणों को मजबूत करने की जरूरत होगी ताकि वह इस बदलते राजनीतिक परिदृश्य में अपनी पकड़ बनाए रख सके.
(अजय झा)