हाबरा, उत्तर 24 परगना जिले के बारासात सदर सब-डिवीजन में स्थित एक नगर पालिका है. यह विधानसभा क्षेत्र हाबरा नगर पालिका और हाबरा-1 ब्लॉक के अंतर्गत कुमरा, प्रीतिभा, राउतारा और मछलंदपुर-II ग्राम पंचायतों को मिलाकर बना है. यह बारासात लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से एक है.
लोग भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से दोनों अलग हैं.
1951 में स्थापित हाबरा विधानसभा सीट ने अब तक हुए सभी 17 विधानसभा चुनावों में भाग लिया है. यहां कांग्रेस और सीपीआई (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया) का दबदबा रहा है. दोनों ने छह-छह बार जीत दर्ज की है. कांग्रेस से निकली दो पार्टियों ने भी यहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. 1967 में बंगला कांग्रेस जीती थी, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अब तक चार बार जीत हासिल की है. टीएमसी ने यहां 2001 में पहली बार जीत दर्ज की और इसके बाद 2011, 2016 और 2021 में लगातार तीन बार जीत पाई.
2021 का चुनाव टीएमसी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा. राज्य सरकार में मंत्री और दो बार के विधायक ज्योति प्रिया मल्लिक ने बीजेपी के बिस्वजीत सिन्हा को केवल 3,841 वोटों से हराया. इससे पहले वे आराम से जीतते आए थे.
बीजेपी ने हाबरा में धीरे-धीरे मजबूत पकड़ बनाई है. 2019 और 2024 लोकसभा चुनावों में पार्टी ने हाबरा विधानसभा क्षेत्र में बढ़त ली थी- क्रमशः 19,452 और 19,933 वोटों से. हालांकि बीजेपी अभी तक हाबरा या बारासात सीट नहीं जीत सकी है.
2021 में हाबरा विधानसभा में कुल 2,56,179 मतदाता दर्ज थे. इनमें लगभग 29.61% अनुसूचित जाति (एससी) और करीब 17.10% मुस्लिम मतदाता शामिल हैं. जनसंख्या का 55.35% हिस्सा शहरी और 44.65% हिस्सा ग्रामीण है. यहां मतदान प्रतिशत हमेशा ज्यादा रहा है। 2021 के चुनाव में 89% वोटिंग हुई थी.
हाबरा गंगा के निचले डेल्टा क्षेत्र में स्थित है. यह सपाट और उपजाऊ जमीन वाला इलाका है, जहां छोटे-छोटे नदी-नाले बहते हैं. ग्रामीण इलाकों में खेती मुख्य रूप से धान, सब्जियां और मौसमी फल की होती है. शहरी हिस्से में छोटे उद्योग, खुदरा कारोबार और शिक्षा संस्थान अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं.
हाबरा की कनेक्टिविटी अच्छी है. यह कोलकाता से लगभग 45 किलोमीटर दूर है और रेल व सड़क दोनों से जुड़ा है. हाबरा रेलवे स्टेशन, सियालदह-बनगांव रेल लाइन का हिस्सा है और रोजाना बड़ी संख्या में यात्री यहां से सफर करते हैं. राज्य राजमार्ग-1 इसे बारासात और जिले के अन्य हिस्सों से जोड़ता है. पास के कस्बों में अशोकनगर (12 किमी), बारासात (20 किमी) और बंगांव (35 किमी) शामिल हैं.
बीजेपी की लगातार मजबूत होती स्थिति को देखते हुए टीएमसी के लिए हाबरा को सुरक्षित मान लेना ठीक नहीं होगा. बीजेपी यहां जीत के करीब पहुंच चुकी है. यदि वाम मोर्चा–कांग्रेस गठबंधन अच्छा प्रदर्शन करता है, तो 2026 का चुनाव बेहद कड़ा हो सकता है और बाजी बीजेपी के पक्ष में भी पलट सकती है.
(अजय झा)