नादिया जिले का हरिनघाटा विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति आरक्षित साट है. यह बोंगांव (SC) लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 1957 में स्थापित इस सीट पर अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो CPI(M) ने यहां सबसे अधिक सात बार जीत दर्ज की है, जबकि CPI, कांग्रेस, निर्दलीय उम्मीदवार और
तृणमूल कांग्रेस ने दो-दो बार जीत हासिल की है. भाजपा ने इस क्षेत्र में पहली बार 2021 में अपनी जीत का खाता खोला.
हरिनघाटा विधानसभा क्षेत्र में हरिनघाटा नगरपालिका, हरिनघाटा सामुदायिक विकास खंड और चकदह ब्लॉक के देवली व हिंगरा ग्राम पंचायत शामिल हैं. पहले यह क्षेत्र नवद्वीप लोकसभा सीट के अंतर्गत आता था, लेकिन परिसीमन के बाद इसे बोंगांव लोकसभा क्षेत्र में शामिल किया गया.
हरिनघाटा में 2024 में कुल 2,47,269 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2021 के 2,40,606 और 2019 के 2,31,178 मतदाताओं से अधिक है. यहां अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी 39.11%, अनुसूचित जनजाति 4.71%, और मुस्लिम आबादी 21.71% है. क्षेत्र का 88.98% हिस्सा ग्रामीण है, जबकि केवल 11.02% शहरी आबादी रहती है. मतदान प्रतिशत लगातार ऊंचा रहा है. 2024 में 83.62%, 2021 में 87.73%, 2019 में 86.61% और 2016 में 87.29% मतदान दर्ज किया गया.
नादिया के दक्षिणी हिस्से की तरह यहां की सतह भी समतल और निम्नभूमि वाली है. क्षेत्र में हुगली नदी की कई सहायक धाराएं फैली हुई हैं, जबकि जमुना और चूर्णी नदियां समीप से बहती हैं. उपजाऊ मिट्टी के कारण यहां कृषि समृद्ध है, लेकिन भारी मानसून में बाढ़ की आशंका बनी रहती है.
हरिनघाटा की अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका है. यहां की प्रमुख फसलें धान, जूट और सब्जियां हैं, जो स्थानीय आय का मुख्य स्रोत हैं.
इसके अलावा, क्षेत्र में डेयरी फार्म, पोल्ट्री यूनिट, और पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय भी स्थित है, जो रोजगार और शैक्षणिक महत्व दोनों बढ़ाते हैं. छोटे उद्योग जैसे चावल मिल, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग अतिरिक्त रोजगार प्रदान करते हैं, जबकि निकट स्थित कल्याणी औद्योगिक क्षेत्र भी रोजगार के अवसरों को बढ़ाता है.
क्षेत्र में बुनियादी ढांचा धीरे-धीरे सुदृढ़ हो रहा है. हरिनघाटा को चकदह, कल्याणी और बोंगांव से जोड़ने वाली सड़कें मोटरयोग्य हैं, हालांकि ग्रामीण हिस्सों में मानसून में खराबी दिखती है. बिजली आपूर्ति लगभग सभी क्षेत्रों में उपलब्ध है और मोबाइल नेटवर्क भी स्थिर है. पेयजल के लिए झारखंडी पंप और ट्यूबवेल पर निर्भरता अधिक है, जबकि हरिणघाटा नगर के कुछ इलाकों में पाइपलाइन जलापूर्ति उपलब्ध है.
स्वास्थ्य सुविधाओं में एक ग्रामीण अस्पताल और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं, लेकिन गंभीर मामलों को कल्याणी या कृष्णनगर भेजा जाता है.
हरिनघाटा ब्लॉक मुख्यालय और उपविभागीय नगर भी है. निकटतम रेलवे स्टेशन कल्याणी (9 किमी) तथा चकदह (12 किमी) हैं. जिला मुख्यालय कृष्णनगर 50 किमी और राज्य की राजधानी कोलकाता 47 किमी दूर है. पास के प्रमुख कस्बे कल्याणी (9 किमी), मदनपुर (11 किमी), चकदह (12 किमी) और रानाघाट (26 किमी) हैं. नजदीकी जिलों से देखें तो बोंगांव (29 किमी) और बारासात (26 किमी) की दूरी है. बांग्लादेश सीमा से जिंगेरगाछा लगभग 57 किमी और जेसोर करीब 70 किमी दूर है.
1971 से 1991 तक यह क्षेत्र वाम मोर्चे का मजबूत गढ़ रहा, जहां CPI के नानी गोपाल मलाकर और बाद में CPI(M) का दबदबा रहा. इसके बाद 2011 और 2016 में तृणमूल कांग्रेस की नीलिमा नाग (मलिक) ने जीत दर्ज की. 2021 में भाजपा के असीम कुमार सरकार ने 97,666 वोट पाकर नीलिमा नाग को 15,200 वोटों से हराया. वाम मोर्चा–कांग्रेस गठबंधन 2021 में 11.77% और 2024 में केवल 3.52% वोट ही ले पाया. 2011 में 5.21%, 2016 में 8.26%, 2019 में 47.30%, 2021 में 46.32% और 2024 में 47.65% रहा था.
भाजपा ने 2019 में हरिनघाटा सीट पर 9,467 वोटों की बढ़त ली थी, जबकि 2024 में यह बढ़त 10,769 वोटों तक पहुंच गई.
लगातार दो लोकसभा चुनावों में बढ़त और 2021 में विधानसभा जीत के बाद भाजपा 2026 के चुनाव में बढ़त की स्थिति में प्रवेश कर रही है.
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस अभी भी मुकाबले में है और वोट अंतर को कम करके रखे हुए है. सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या वाम मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन पूरी तरह निष्क्रिय रहेगा या नई ऊर्जा के साथ वापसी करेगा.
अगर तीसरा मोर्चा फिर सक्रिय होता है, तो यह तृणमूल के लिए सीट वापस पाने की राह को और जटिल बना सकता है.
(अजय झा)