श्री नगर (Sri Nagar) उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की लखीमपुर तहसील में स्थित एक गांव और इससे जुड़ा ऐतिहासिक राजस्व परगना है. श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, का नाम इसी व्यापक राजस्व क्षेत्र के नाम पर पड़ा है. यह खीरी लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा खंडों में से एक है और पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र
है.
1956 के परिसीमन आदेश के जरिए गठित श्री नगर विधानसभा क्षेत्र की चुनावी मानचित्र पर मौजूदगी बीच-बीच में खत्म होती रही है. शुरुआत में यह सामान्य, यानी अनारक्षित सीट थी. 2008 के परिसीमन के तहत विधानसभा क्षेत्र को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित घोषित किया गया और इसकी सीमाओं में भी बदलाव किया गया. नई स्थिति और सीमाएं 2012 के विधानसभा चुनाव से लागू हुईं. वर्तमान में इसमें लखीमपुर तहसील के श्री नगर, शारदा नगर और पलिया कानूनगो सर्किल के बड़ी संख्या में गांव शामिल हैं.
श्री नगर में पहली बार 1957 के चुनाव में मतदान हुआ, जब यह दो सदस्यीय विधानसभा क्षेत्र था और 1962 में यह एक विधायक वाली सीट बन गया. इन दोनों चुनावों में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने उपलब्ध सभी तीन सीटों पर जीत दर्ज की. इसके बाद यह विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में नहीं रहा और 1974 के चुनाव से पहले इसे फिर से बहाल किया गया. 1974 के बाद श्रीनगर में 13 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इनमें कांग्रेस ने चार बार जीत दर्ज की. समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों ने इस सीट पर तीन-तीन बार जीत हासिल की है. भाजपा की संख्या में 1974 में उसके पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ की एक जीत भी शामिल है. बहुजन समाज पार्टी ने दो बार यह सीट जीती, जिसमें 1996 और 2002 में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती उम्मीदवार थीं, जबकि जनता पार्टी ने 1977 में एकमात्र जीत दर्ज की.
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद श्रीनगर में एक असामान्य स्थिति भी देखने को मिली है. भाजपा की मंजू त्यागी ने 2017 और 2022 में दो बार इस सीट पर जीत हासिल की, जबकि मीरा बानो ने 2017 में समाजवादी पार्टी और 2022 में बसपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा. हालांकि, 2022 के चुनाव के निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में मंजू त्यागी और मीरा बानो दोनों को अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के रूप में दर्ज किया गया, जिससे वे आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के योग्य थीं, जबकि मीरा बानो के चुनावी हलफनामे में उनके पति का नाम नियामत अली दर्ज है.
पुनर्गठित सीट पर 2012 में समाजवादी पार्टी के रामसरन ने आरक्षित विधानसभा क्षेत्र के रूप में जीत दर्ज की और बसपा के श्रीपाल भार्गव को 31,878 वोटों से हराया. इस क्षेत्र की कई सीटों की तरह श्रीनगर में भी 2012 में भाजपा के कमजोर प्रदर्शन और उसके बाद तेजी से आगे बढ़कर सीट जीतने की कहानी दोहराई गई. भाजपा की मंजू त्यागी, जो 2012 में काफी पीछे रहकर चौथे स्थान पर रही थीं, ने 2017 में समाजवादी पार्टी की मीरा बानो को 54,939 वोटों से हराकर सीट जीती. मंजू त्यागी ने 2022 में भी भाजपा के लिए सीट बरकरार रखी और समाजवादी पार्टी के 2012 के विधायक रामसरन को 17,608 वोटों के कम अंतर से हराया, जबकि मीरा बानो ने बसपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रहीं. मंजू त्यागी को 108,249 वोट मिले, जबकि रामसरन को 90,641 वोट मिले.
श्री नगर विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनावों के दौरान मतदाताओं की पसंद लगातार बदलती रही है. 2009 में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी पर 2,216 वोटों की बढ़त बनाई थी, जबकि बसपा मामूली अंतर से तीसरे स्थान पर रही थी. भाजपा ने उस चुनाव में चौथे स्थान से तेजी से आगे बढ़ते हुए 2014 में बसपा पर 18,493 वोटों की बढ़त बना ली. 2019 में भाजपा की बढ़त समाजवादी पार्टी के मुकाबले और बढ़कर 26,881 वोट हो गई. 2024 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई, जब समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार उत्कर्ष वर्मा को 112,984 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार अजय कुमार मिश्रा टेनी को 88,972 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने इस विधानसभा क्षेत्र में 24,012 वोटों की बढ़त हासिल की.
श्री नगर में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 287,375 से बढ़कर 2017 में 307,964, 2019 में 314,020, 2022 में 319,519 और 2024 में 327,437 हो गई. मतदाता भागीदारी लगातार ऊंची रही है, हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. 2012 में मतदान प्रतिशत 64.95 रहा और 2017 में बढ़कर 72.37 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 66.57 प्रतिशत रहा और 2022 के विधानसभा चुनाव में फिर बढ़कर 71.82 प्रतिशत हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत घटकर 69.84 रहा, हालांकि यह फिर भी अपेक्षाकृत अधिक था.
श्री नगर हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी भी अच्छी संख्या में है. अनुमान के अनुसार अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी 30.25 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 19.50 प्रतिशत है. लखीमपुर खीरी और इससे लगे पीलीभीत जिले के अन्य हिस्सों की तरह यहां सिख आबादी भी अच्छी संख्या में है. बाकी मतदाताओं में विभिन्न ओबीसी और अन्य समुदाय शामिल हैं. यह पूरी तरह ग्रामीण सीट है और यहां की 100 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है.
श्री नगर कभी एक बड़ा इलाका था और यहां मुसलमान बीसनों का मुख्यालय था, जिन्होंने यहां ईंटों का एक किला बनवाया था. 19वीं सदी की शुरुआत में चौका नदी की एक बड़ी बाढ़ ने पुराने गांव को नष्ट कर दिया. इसके बाद यह बस्ती धीरे-धीरे कमजोर हो गई, हालांकि श्रीनगर का नाम आसपास के राजस्व परगने और बाद में विधानसभा क्षेत्र के लिए बना रहा. व्यापक क्षेत्र वर्तमान लखीमपुर खीरी के ऐतिहासिक तराई इलाके का हिस्सा था, जो लंबे समय तक जंगलों, नदियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कम आबादी वाला रहा.
श्री नगर विधानसभा क्षेत्र लखीमपुर खीरी जिले के उत्तरी हिस्से में स्थित है और उपजाऊ लेकिन घने जंगलों तथा नदियों वाले तराई क्षेत्र का हिस्सा है. विधानसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा समतल जलोढ़ मैदान, कृषि गांवों और आसपास के जंगलों तथा नदियों से प्रभावित इलाकों में फैला हुआ है. इसका उत्तरी हिस्सा नेपाल सीमा की ओर जाता है.
कृषि यहां लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है. विधानसभा क्षेत्र में गन्ना, गेहूं, धान और अन्य फसलों की खेती होती है, जबकि सिंचाई और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी कई हिस्सों में गहन खेती को बढ़ावा देती है. कृषि उपज का कारोबार, परिवहन और छोटे व्यवसाय रोजगार के अन्य साधन हैं.
श्री नगर को उत्तरी लखीमपुर खीरी के जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों की निकटता का भी लाभ मिलता है. व्यापक क्षेत्र का कुछ हिस्सा दुधवा टाइगर रिजर्व के करीब आता है, जो उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षित वन क्षेत्रों में से एक है. संरक्षित जंगल और आसपास की कृषि भूमि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, हालांकि जंगलों की निकटता के कारण कई बार मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की समस्या भी सामने आती है.
श्री नगर का अपना कोई बड़ा शहरी केंद्र नहीं है और उच्च स्तर की प्रशासनिक, व्यावसायिक तथा परिवहन सुविधाओं के लिए यह मुख्य रूप से लखीमपुर शहर, पलिया कलां और आसपास के अन्य कस्बों पर निर्भर है.
श्री नगर भौगोलिक रूप से फैला हुआ ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है और यह किसी एक कस्बे पर केंद्रित नहीं है, इसलिए विधानसभा क्षेत्र के एक छोर से दूसरे छोर तक दूरी काफी अलग हो सकती है. विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों से लखीमपुर शहर की दूरी करीब 25 से 40 किलोमीटर है, जबकि पलिया कलां करीब 50 से 80 किलोमीटर दूर है. गोला गोकर्णनाथ लगभग 45 से 65 किलोमीटर और मैलानी करीब 30 से 50 किलोमीटर दूर है, हालांकि विधानसभा क्षेत्र के स्थान के आधार पर दूरी बदल सकती है. दुधवा नेशनल पार्क विधानसभा क्षेत्र के उत्तरी हिस्सों से पलिया और मैलानी की तरफ से आसानी से पहुंचा जा सकता है. लखनऊ सड़क मार्ग से करीब 160 से 200 किलोमीटर दूर है.
अन्य दलों की तुलना में हाल के दौर में भाजपा का श्रीनगर में कुल मिलाकर बेहतर रिकॉर्ड रहा है, हालांकि यहां हुए कुछ प्रमुख चुनावों में उसका प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा है. भाजपा ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव जीते और 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनावों में भी बढ़त हासिल की. इसके विपरीत, समाजवादी पार्टी ने 2012 का विधानसभा चुनाव जीता और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा पर बड़ी बढ़त बनाई, जबकि 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इस विधानसभा क्षेत्र में आगे रही थी.
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की तेज गिरावट को अजय कुमार मिश्रा टेनी के खिलाफ लखीमपुर खीरी के कुछ हिस्सों में बने व्यापक गुस्से से जोड़ा जा सकता है. यह गुस्सा अक्टूबर 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद बढ़ा था. इस घटना में चार प्रदर्शनकारी किसानों सहित आठ लोगों की मौत हुई थी, जब कथित तौर पर टेनी के बेटे आशीष मिश्रा द्वारा चलाया जा रहा वाहन प्रदर्शन कर रहे किसानों की भीड़ में जा घुसा था. इस घटना को लेकर विवाद क्षेत्र की राजनीति पर लगातार असर डालता रहा और बाद के चुनावों में यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया.
हालांकि, इस घटना के कुछ ही महीनों बाद भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में श्री नगर सीट बरकरार रखी. इससे संकेत मिला कि लखीमपुर खीरी की घटना को लेकर नाराजगी का असर विधानसभा चुनाव में अपने आप भाजपा की हार में नहीं बदला.
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में स्थिति काफी बदल गई, जब समाजवादी पार्टी ने श्री नगर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी बढ़त हासिल की. यह नतीजा मतदाताओं की पसंद में लंबे समय तक रहने वाले बदलाव का संकेत है या मुख्य रूप से टेनी और 2021 की घटनाओं को लेकर नाराजगी का असर था, इसका परीक्षण 2027 में होगा.
सामान्य परिस्थितियों में भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी जीत की उम्मीद कर सकती थी. 2024 के नतीजे ने इस समीकरण को बदल दिया है. समाजवादी पार्टी अब इस समर्थन को विधानसभा चुनाव तक ले जाने की कोशिश करेगी, जिससे 2027 में श्री नगर में करीबी और दिलचस्प मुकाबले की जमीन तैयार हो गई है.
(अजय झा)