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सिकंदरा विधानसभा चुनाव 2027 (Sikandra Assembly Election 2027)

सिकंदरा उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में स्थित एक नगर पंचायत कस्बा और सिकंदरा तहसील का मुख्यालय है. परंपरा के अनुसार सिकंदरा की स्थापना सिकंदर लोदी ने की थी. कानपुर से करीब 80 किलोमीटर पश्चिम में मुख्य कानपुर-झांसी मार्ग पर स्थित यह कस्बा आसपास के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण स्थानीय प्रशासनिक और बाजार केंद्र के रूप में काम करता

है.

सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र एक सामान्य, यानी अनारक्षित सीट है और इटावा लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा खंडों में से एक है. पहले यह क्षेत्र मुख्य रूप से राजपुर और पुराने कानपुर तथा इटावा क्षेत्र की डेरापुर विधानसभा सीट के कुछ हिस्सों का हिस्सा था, जिनकी सीमाओं और नामों में कई बार बदलाव हुआ. 2008 के परिसीमन के बाद सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ. इसमें सिकंदरा तहसील का पूरा क्षेत्र, जिसमें सिकंदरा कस्बा भी शामिल है, तथा डेरापुर तहसील के डेरापुर और सिथमरा के कानूनगो सर्किल शामिल हैं. इस वजह से इसका स्वरूप काफी हद तक ग्रामीण है.

नई विधानसभा सीट होने के कारण सिकंदरा का चुनावी इतिहास सीमित है और यहां अब तक चार विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें 2017 का उपचुनाव भी शामिल है. 2012 में बहुजन समाज पार्टी के इंद्र पाल सिंह ने यह सीट जीती थी. उन्होंने भाजपा के देवेंद्र सिंह भोले को 2,189 वोटों के मामूली अंतर से हराया था.

2017 में तस्वीर बदल गई और भाजपा ने यह सीट जीत ली. पार्टी के प्रत्याशी मथुरा प्रसाद पाल थे, जो कानपुर देहात जिले की सरवांखेड़ा विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रह चुके थे. उन्होंने बसपा के महेंद्र कटियार को 38,103 वोटों के अंतर से हराया. हालांकि कुछ ही महीनों बाद मथुरा प्रसाद पाल का निधन हो गया, जिसके बाद उपचुनाव हुआ. इस उपचुनाव में उनके बेटे अजीत सिंह पाल ने भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की. उन्होंने समाजवादी पार्टी की सीमा सचान को 11,870 वोटों के अंतर से हराया.

2022 में भाजपा ने सिकंदरा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. अजीत सिंह पाल को 89,461 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी प्रभाकर पांडेय को 57,894 वोट मिले. अजीत सिंह पाल ने 31,567 वोटों के अंतर से चुनाव जीता.

लोकसभा चुनावों के दौरान भी सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है. हालांकि 2009 में नई बनी इस विधानसभा सीट पर हुए पहले लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन कमजोर रहा था और वह तीसरे स्थान पर रही थी. उस समय समाजवादी पार्टी ने बसपा को 17,742 वोटों से पीछे छोड़ा था.

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जोरदार वापसी की और सबसे आगे रही. इस चुनाव में भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर 47,187 वोटों की बढ़त हासिल की. 2019 में यह बढ़त घटकर 32,090 वोट रह गई. इस दौरान समाजवादी पार्टी ने सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र में अपना प्रदर्शन सुधारा. 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की बढ़त और कम हो गई. इटावा लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार राम शंकर कठेरिया को सिकंदरा क्षेत्र में 83,665 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार जितेंद्र कुमार दोहरे को 82,516 वोट मिले. इस तरह भाजपा को सिर्फ 1,149 वोटों की बढ़त मिली.

2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से पहले सिकंदरा में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ती रही. 2012 में यहां 2,96,788 मतदाता थे, जो 2017 में बढ़कर 3,21,241 हो गए. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं की संख्या 3,25,829 थी. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर 3,32,946 और 2024 में 3,38,575 हो गया. SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची में 2,98,781 मतदाता रह गए. SIR के कारण कुल 39,794 मतदाताओं की कमी हुई, जो पुनरीक्षण से पहले की सूची की तुलना में 11.75 प्रतिशत है.

सिकंदरा में मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. विधानसभा चुनावों की तुलना में यहां लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत कम रहा है. 2012 में मतदान 61.48 प्रतिशत और 2017 में 60.33 प्रतिशत रहा. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 56.87 प्रतिशत हो गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान बढ़कर 60.79 प्रतिशत हुआ, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह फिर घटकर 55.80 प्रतिशत रह गया.

सिकंदरा एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां सामाजिक संरचना मिश्रित है. 2011 के आंकड़ों के अनुसार अनुसूचित जाति की आबादी 24.57 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम आबादी करीब 8.40 प्रतिशत मानी जाती है. अन्य समुदायों से जुड़े विधानसभा क्षेत्र स्तर के विश्वसनीय आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन यहां का राजनीतिक पैटर्न कुछ संकेत देता है. पाल समुदाय, जिसका पारंपरिक संबंध नाव चलाने और मछली पकड़ने से रहा है और जिसे अब अन्य पिछड़ा वर्ग में गिना जाता है, यहां चुनावी रूप से प्रभावशाली दिखाई देता है. कानपुर देहात जिले में राजपूत समुदाय की भी उल्लेखनीय मौजूदगी है. इसी समुदाय को फूलन देवी के गिरोह द्वारा 1981 में किए गए बेहमई नरसंहार में निशाना बनाया गया था, जो इस क्षेत्र से ज्यादा दूर नहीं हुआ था. इस हिस्से में अन्य पिछड़ा वर्ग के कुरमी और यादव समुदाय की भी महत्वपूर्ण मौजूदगी है.

2011 में विधानसभा क्षेत्र की करीब 95.23 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती थी, जबकि 4.77 प्रतिशत आबादी सिकंदरा कस्बे में रहती थी. इससे इस विधानसभा क्षेत्र के मुख्य रूप से ग्रामीण स्वरूप का पता चलता है.

सिकंदरा कानपुर देहात क्षेत्र के पुराने कस्बों में से एक है. जिला प्रशासन के अनुसार सिकंदरा, अकबरपुर और शिवली गंगा-यमुना दोआब के पुराने कस्बे हैं, जो ऐतिहासिक रूप से कृषि उपज की आवाजाही और बाहर भेजे जाने के केंद्र के रूप में काम करते रहे हैं. इस क्षेत्र से पुरानी मुगल रोड भी गुजरती थी, जो क्षेत्र के महत्वपूर्ण कस्बों को जोड़ती थी और सिकंदरा से होकर जाती थी.

मुगल काल के दौरान दोआब को यमुना और मध्य भारत से जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित होने के कारण इस क्षेत्र का महत्व बढ़ा. कानपुर देहात जिले के आधिकारिक सांस्कृतिक इतिहास में भी मुगल काल के दौरान जिले के दक्षिणी हिस्से के महत्व का उल्लेख मिलता है और पुरानी मुगल रोड के संदर्भ में सिकंदरा का जिक्र किया गया है. इसमें पास के बिलासपुर के पतन के बाद सिकंदरा के उभरने का भी उल्लेख है. इससे पहले बिलासपुर परगना मुख्यालय के रूप में काम करता था.

बाद के मुगल, मराठा, अवध और ब्रिटिश प्रशासन के दौरान भी यह कस्बा कृषि और व्यापारिक केंद्र बना रहा. 1801 में अवध से क्षेत्रों के हस्तांतरण के बाद व्यापक कानपुर देहात क्षेत्र ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया. वर्तमान कानपुर देहात जिले का गठन 1981 में कानपुर जिले से अलग करके किया गया था, हालांकि इसके बाद इसकी तहसीलों की प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव होते रहे.

सिकंदरा गंगा-यमुना दोआब में स्थित है. यहां की जमीन कानपुर देहात जिले के इस हिस्से के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों जैसी है. यमुना नदी जिले की दक्षिणी सीमा बनाती है और यहां का भूभाग मुख्य रूप से समतल है, जो सिंचित खेती के लिए उपयुक्त है. गेहूं, धान, दलहन और तिलहन यहां की प्रमुख फसलें हैं. स्थानीय अर्थव्यवस्था अब भी मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. सिकंदरा कस्बा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रमुख बाजार केंद्र के रूप में काम करता है.

यह विधानसभा क्षेत्र सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. सिकंदरा कस्बा पुराने ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित है, जो अब कानपुर से झांसी जाने वाला राजमार्ग है. राष्ट्रीय राजमार्ग 27 का कॉरिडोर भी जिले के पास से गुजरता है. सिकंदरा कस्बे में खुद कोई रेलवे स्टेशन नहीं है. रेल यात्रा के लिए क्षेत्र के लोग पुखरायां और झींझक जैसे नजदीकी स्टेशनों पर निर्भर हैं. ये स्टेशन उत्तर मध्य रेलवे के कानपुर से झांसी और कानपुर से इटावा रेल मार्गों पर स्थित हैं.

सड़क मार्ग से सिकंदरा जिला मुख्यालय अकबरपुर से करीब 35 किलोमीटर और कानपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर है. कानपुर से आगे यह लखनऊ से लगभग 160 किलोमीटर, आगरा से 200 किलोमीटर और प्रयागराज से करीब 270 किलोमीटर की दूरी पर है. मध्य प्रदेश की सीमा भी बहुत दूर नहीं है. ग्वालियर करीब 160 किलोमीटर दूर है और चंबल नदी, जो इटावा जिले में भरेह के पास कुछ आगे जाकर यमुना में मिलती है, सिकंदरा से करीब 90 से 100 किलोमीटर दूर है.

सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो यह भाजपा का मजबूत क्षेत्र दिखाई देता है. पार्टी ने अब तक हुए चार विधानसभा चुनावों में से तीन में जीत दर्ज की है और चार लोकसभा चुनावों में से तीन में यहां बढ़त बनाई है. हालांकि तस्वीर कुछ अलग भी है, क्योंकि लोकसभा चुनावों में भाजपा की बढ़त धीरे-धीरे कम हुई है और समाजवादी पार्टी से मुकाबला कड़ा हुआ है. 2024 में भाजपा को मिली मामूली बढ़त ने इस मुकाबले को और करीब दिखाया.

SIR ने मतदाता सूची में एक और बदलाव किया है. हालांकि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है जिससे पता चले कि किसी विशेष जाति या समुदाय पर इसका असमान प्रभाव पड़ा है. इसके बावजूद इन बदलावों का चुनावी नतीजों पर कुछ असर हो सकता है, क्योंकि SIR के बाद मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 2012 के स्तर के करीब आ गई है. मृत, स्थानांतरित, फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाने से मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी हो सकती है. इस पूरी प्रक्रिया के बीच 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सिकंदरा में कुछ अनिश्चितता बनी हुई है. भाजपा के लिए सीट को बनाए रखना एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होगा, जबकि समाजवादी पार्टी 2024 के अपने प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में आगे बढ़ाने और इस सीट पर पहली बार जीत दर्ज करने की कोशिश करेगी.

(अजय झा)

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सिकंदरा विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Ajit Singh Pal

BJP
वोट89,461
विजेता पार्टी का वोट %44.9 %
जीत अंतर %15.9 %

सिकंदरा विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Prabhakar Pandey

    SP

    57,894
  • Lal Ji

    BSP

    36,033
  • Shubham Pal

    IND

    6,180
  • Naresh Chandra

    INC

    5,162
  • Nota

    NOTA

    1,395
  • Satyendra Prakash

    JANADIP

    911
  • Shishupal

    IND

    621
  • Neeraj

    AAAP

    426
  • Mahboob

    ASPKR

    425
  • Satish Singh Nayak

    IND

    389
  • Man Singh

    VPI

    235
  • Ram Govind

    SUCI

    175
WINNER

Mathura Prasad Pal

BJP
वोट87,879
विजेता पार्टी का वोट %45.4 %
जीत अंतर %19.7 %

सिकंदरा विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Mahendra Katiyar (bablu)

    BSP

    49,776
  • Seema Sachan

    SP

    42,010
  • Prabhakar Pandey

    NINSHAD

    6,381
  • Mithlesh Katiyar

    JANADIP

    1,961
  • Nota

    NOTA

    1,442
  • Rambali Singh

    IND

    1,234
  • Krishna Babu

    IND

    694
  • Santosh Kumar Kushawaha

    LD

    675
  • Dr.omkar Nath Katiyar

    ALHP

    500
  • Seema Yadav

    NSPI

    451
  • Dinesh Singh

    BSRD

    389
  • Mamta

    BMUP

    361
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सिकंदरा विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में सिकंदरा में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के सिकंदरा विधानसभा चुनाव सीट पर Ajit Singh Pal को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

सिकंदरा विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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