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सरेनी विधानसभा चुनाव 2027 (Sareni Assembly Election 2027)

सरेनी उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले की लालगंज तहसील में स्थित एक गांव और सरेनी सामुदायिक विकास खंड का मुख्यालय है. ऐतिहासिक रूप से यह एक परगना का मुख्यालय रहा है और वर्तमान में आसपास के बड़ी संख्या में गांवों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थानीय केंद्र के रूप में कार्य करता है.

1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव से पहले स्थापित सरेनी एक सामान्य,

अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और रायबरेली लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद इसमें लालगंज तहसील के कानूनगो सर्किल 2-लालगंज और 3-सरेनी तथा लालगंज नगर पंचायत शामिल हैं. इसके अलावा इसमें डलमऊ तहसील का कानूनगो सर्किल 1-डलमऊ पश्चिम और डलमऊ नगर पंचायत भी शामिल है. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है, जबकि लालगंज और डलमऊ इसके प्रमुख शहरी केंद्र हैं.

सरेनी में अपने गठन के बाद से 18 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं. कांग्रेस इस सीट पर सबसे अधिक सफल पार्टी रही है और उसने 10 बार जीत दर्ज की है. इसमें 1952 से 1980 के बीच लगातार आठ जीत शामिल हैं. समाजवादी पार्टी ने चार बार, भाजपा ने तीन बार और एक बार 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की. भाजपा ने 1991, 1993 और 2017 में जीत हासिल की, जबकि समाजवादी पार्टी ने 1996, 2002, 2012 और 2022 में सीट जीती. कांग्रेस ने अपने लंबे जीत के सिलसिले के समाप्त होने के बाद 1989 और 2007 में फिर से जीत दर्ज की.

2012 में समाजवादी पार्टी के देवेंद्र प्रताप सिंह ने सीट जीती थी. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के सुशील कुमार को 12,919 मतों से हराया था. मौजूदा कांग्रेस विधायक अशोक कुमार सिंह करीबी तीसरे स्थान पर रहे, जबकि भाजपा काफी पीछे रहते हुए पांचवें स्थान पर रही. 2017 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई, जब भाजपा के उम्मीदवार के रूप में धीरेंद्र बहादुर सिंह आगे निकल गए. उन्होंने बसपा के ठाकुर प्रसाद यादव को 13,007 मतों से हराया. खास बात यह रही कि भाजपा ने 2012 में केवल 3.98 प्रतिशत वोट पाने और जमानत जब्त होने के बावजूद धीरेंद्र बहादुर सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया. वर्ष 2017 में उनका वोट शेयर बढ़कर 32.16 प्रतिशत हो गया, जो पांच वर्षों में 28.18 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी थी.

हालांकि भाजपा इस बढ़त को बरकरार नहीं रख सकी. समाजवादी पार्टी 2017 में चौथे स्थान से आगे बढ़कर 2022 में सीट जीतने में सफल रही, हालांकि जीत का अंतर कम रहा. देवेंद्र प्रताप सिंह को 66,166 वोट मिले, जबकि भाजपा के धीरेंद्र बहादुर सिंह को 62,359 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 3,807 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.

विधानसभा चुनावों के विपरीत, जहां कांग्रेस हाल के वर्षों में कमजोर रही है और 2007 के बाद से सीट नहीं जीत सकी है, 2009 के बाद से सरेनी विधानसभा क्षेत्र में हुए सभी चार लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने स्पष्ट बढ़त बनाई है. वर्ष 2009 में उसने बसपा के मुकाबले 80,950 वोटों की बढ़त बनाई थी और 2014 में भाजपा के मुकाबले 79,203 वोटों की बढ़त रही. 2019 में भाजपा के मुकाबले उसकी बढ़त घटकर 28,981 वोट रह गई, जबकि 2024 में यह बढ़कर 74,918 वोट हो गई. 2024 में कांग्रेस उम्मीदवार राहुल गांधी को 137,346 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को 62,428 वोट मिले.

कांग्रेस का मजबूत प्रदर्शन रायबरेली के गांधी परिवार से लगातार जुड़े रहने से भी संबंधित है. सोनिया गांधी ने 2004 से 2019 तक इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. इसके बाद 2024 में राहुल गांधी ने रायबरेली से चुनाव लड़ा. उन्होंने 2019 में अमेठी से हार के बाद रायबरेली से चुनाव लड़ा. हालांकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिलने वाला समर्थन सरेनी में विधानसभा स्तर पर उसी तरह की बढ़त में नहीं बदल पाया है.

सरेनी में एक दशक से अधिक समय तक मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई. पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 318,439 से बढ़कर 2017 में 351,730 और 2019 के लोकसभा चुनाव में 360,399 हो गई. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या 371,469 और 2024 में 380,339 रही. 10 अप्रैल 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 326,938 मतदाता थे. यह 2024 में दर्ज 380,339 मतदाताओं से 53,401 कम था, यानी 14.04 प्रतिशत की कमी हुई.

मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव रहा है, लेकिन यह सामान्य तौर पर मध्यम स्तर पर रहा है. 2012 में मतदान प्रतिशत 58.63 प्रतिशत और 2017 में 58.25 प्रतिशत था. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 54.84 प्रतिशत रह गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में इसमें फिर बढ़ोतरी हुई और मतदान प्रतिशत 58.44 प्रतिशत रहा. 2024 के लोकसभा चुनाव में यह फिर घटकर 55.33 प्रतिशत हो गया.

सरेनी एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां अनुसूचित जाति की आबादी भी काफी है. अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 29.09 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत कम है और इसका अनुमान लगभग 8 प्रतिशत लगाया जाता है. प्रमुख सामाजिक समूहों में ब्राह्मण, ठाकुर और अन्य सवर्ण समुदाय, पासी और अन्य अनुसूचित जाति समूह, यादव, कुर्मी, मौर्य, लोधी, निषाद और अन्य ओबीसी समुदाय शामिल हैं. सरेनी मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है और इसकी लगभग 93.27 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि 6.73 प्रतिशत आबादी शहरी हिस्सों में रहती है.

सरेनी का इतिहास अपेक्षाकृत सामान्य है, लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से इसका महत्व लंबे समय से रहा है. स्थानीय विवरणों के अनुसार इसकी स्थापना बैस वंश के सारंग साह ने की थी और कहा जाता है कि उन्हीं के नाम पर इस बस्ती का नाम सरेनी पड़ा. नवाब सआदत अली खान के शासनकाल में यह एक परगना का मुख्यालय बना, जिसके अंतर्गत कई महालों को एक साथ रखा गया था. 20वीं सदी की शुरुआत तक सरेनी में एक थाना, डाकघर, कांजी हाउस और एक बड़ा प्राथमिक विद्यालय था. यह खजुरगांव के राणा के तालुकेदारी अधिकार में मुरारमऊ एस्टेट के हिस्से के रूप में था. सरेनी ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी भूमिका निभाई थी और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान यहां पुलिस फायरिंग की घटना दर्ज की गई थी.

भौगोलिक रूप से सरेनी रायबरेली के दक्षिणी हिस्से के हल्के ऊंचे-नीचे जलोढ़ मैदानों में स्थित है. क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि आधारित है. धान, गेहूं, चना, मटर और उड़द यहां की प्रमुख फसलों में शामिल हैं. पशुपालन और स्थानीय व्यापार भी आय के अतिरिक्त स्रोत हैं. सरेनी, लालगंज और डलमऊ आसपास के गांवों के लिए बाजार और बुनियादी व्यापारिक तथा सेवा सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं.

विधानसभा क्षेत्र में संगठित उद्योग सीमित हैं और इसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, छोटे व्यापार, परिवहन, निर्माण तथा सरकारी और अन्य स्थानीय सेवाओं पर निर्भर है. क्षेत्र में आने वाला लालगंज एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है और यह रायबरेली जिले के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों में शामिल मॉडर्न कोच फैक्ट्री के भी करीब है. जिले के व्यापक क्षेत्र में ऊंचाहार का एनटीपीसी बिजली संयंत्र जैसे अन्य बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान भी हैं, हालांकि ये सरेनी विधानसभा क्षेत्र से बाहर स्थित हैं.

क्षेत्र में आवागमन मुख्य रूप से सड़क मार्ग से होता है. सरेनी लालगंज से लगभग 18 किलोमीटर और रायबरेली शहर से लगभग 45 किलोमीटर दूर है, जबकि डलमऊ लगभग 30 किलोमीटर दूर है. आसपास के रेलवे स्टेशनों के माध्यम से रेल सुविधा उपलब्ध है, जबकि लालगंज और रायबरेली से अधिक व्यापक परिवहन संपर्क मिलता है. लखनऊ सड़क मार्ग से लगभग 120 से 130 किलोमीटर, प्रयागराज लगभग 100 किलोमीटर, उन्नाव लगभग 70 किलोमीटर और कानपुर लगभग 110 किलोमीटर दूर है. अयोध्या लगभग 160 किलोमीटर और वाराणसी लगभग 230 किलोमीटर दूर है.

ऐसे विधानसभा क्षेत्र में जहां 10 में से नौ से अधिक लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, सिंचाई और बुनियादी सेवाएं महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दे हैं. रायबरेली जिले के किसानों ने हाल के वर्षों में धान की रोपाई के मौसम में नहर के पानी की कमी की शिकायत की है. इससे निजी ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी है और खेती की लागत भी बढ़ी है. बिजली आपूर्ति को लेकर भी स्थानीय स्तर पर शिकायतें सामने आई हैं. नल के पानी की योजनाओं के विस्तार के बावजूद विधानसभा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में पेयजल भी एक मुद्दा बना हुआ है.

सरेनी का राजनीतिक रिकॉर्ड लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाता है. कांग्रेस ने रायबरेली लोकसभा सीट पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है और 2009 के बाद से हुए सभी चार लोकसभा चुनावों में सरेनी क्षेत्र में बढ़त हासिल की है. विधानसभा स्तर पर हालांकि मुकाबला अधिक प्रतिस्पर्धी रहा है. 2007 में कांग्रेस की आखिरी जीत के बाद कोई भी मौजूदा विधायक लगातार दूसरी बार चुनाव जीत नहीं सका है. अशोक कुमार सिंह 2012 में सीट हार गए, देवेंद्र प्रताप सिंह 2017 में हार गए और धीरेंद्र बहादुर सिंह 2022 में अपनी सीट बचा नहीं सके.

यह स्थिति 2027 के चुनाव से पहले भाजपा के लिए राजनीतिक आधार का एक पहलू प्रस्तुत करती है. पार्टी ने 2017 में सरेनी सीट जीती थी और 2022 में उसे बरकरार रखने से 3,807 वोट पीछे रही. समाजवादी पार्टी के सामने 2022 में मिली मामूली बढ़त को बनाए रखने की चुनौती होगी, जबकि कांग्रेस के सामने यह सवाल रहेगा कि उसका मजबूत लोकसभा समर्थन 2007 के बाद विधानसभा जीत में क्यों नहीं बदल पाया है.

इस कारण 2027 में सरेनी में एक और करीबी मुकाबला देखने को मिल सकता है. जातीय समीकरण और स्थानीय राजनीतिक गठजोड़ महत्वपूर्ण रहेंगे. विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची में हुई बड़ी कमी से मतदाताओं की संख्या में बदलाव आया है, हालांकि इसके राजनीतिक या समुदाय आधारित प्रभाव का अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सकता है.

(अजय झा)

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सरेनी विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Devendra Pratap Singh

SP
वोट66,166
विजेता पार्टी का वोट %30.5 %
जीत अंतर %1.7 %

सरेनी विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Dhirendra Bahadur Singh

    BJP

    62,359
  • Sudha Dwivedi

    INC

    42,702
  • Thakur Prasad Yadav

    BSP

    38,155
  • Nota

    NOTA

    1,395
  • Devendra Pal

    AAAP

    1,086
  • Hori Lal

    PGSP

    763
  • Shivpratap Singh

    IND

    752
  • Abhay Kumar

    IND

    712
  • Anil Kumar

    IND

    585
  • Manorama

    AKBHAD

    538
  • Ram Manohar

    VPI

    396
  • Manoj Kumar Sharma

    VKSHELJNTP

    373
  • Sohan Lal

    IPBP

    373
  • Dharmendra Kumar

    RAPI

    345
WINNER

Dhirendra Bahadur Singh

BJP
वोट65,873
विजेता पार्टी का वोट %32.2 %
जीत अंतर %6.4 %

सरेनी विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Thakur Prasad Yadav

    BSP

    52,866
  • Ashok Kumar Singh

    INC

    42,232
  • Devendra Pratap Singh

    SP

    32,792
  • Nota

    NOTA

    2,545
  • Hori Lal

    IND

    2,036
  • Ashok Kumar

    IND

    1,154
  • Ratna Pandey

    RLD

    1,139
  • Ram Bahadur

    JANADIP

    1,048
  • Kamlesh Kumar

    BMUP

    948
  • Shashi Lata

    MWSP

    835
  • Ram Narayan

    SDU

    733
  • Pushpant Kumar

    RAJADP

    651
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सरेनी विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

सरेनी विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में सरेनी में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के सरेनी विधानसभा चुनाव सीट पर Devendra Pratap Singh को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

सरेनी विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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