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पूरनपुर विधानसभा चुनाव 2027 (Puranpur Assembly Election 2027)

पूरनपुर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले का एक तहसील स्तर का शहर है. इसे लोकप्रिय रूप से मिनी पंजाब के नाम से जाना जाता है, क्योंकि 1947 में भारत विभाजन के बाद बड़ी संख्या में सिख आबादी इस क्षेत्र में आकर बस गई थी. जो परिवार उन इलाकों से विस्थापित हुए थे, जो अब पाकिस्तान में हैं, उन्हें तराई क्षेत्र में बसाया गया था. आज यह शहर आसपास के ग्रामीण

क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और बाजार केंद्र बना हुआ है.

1961 के परिसीमन आदेश के माध्यम से स्थापित पूरनपुर एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है और पीलीभीत लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. वर्ष 2007 तक यह एक सामान्य और अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र था. वर्ष 2008 के परिसीमन अभ्यास में इसकी सीमाओं का पुनर्गठन किया गया और वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों से इस सीट को अनुसूचित जाति समुदाय के लिए आरक्षित कर दिया गया. इस विधानसभा क्षेत्र में अब पूरनपुर नगर पालिका बोर्ड और कलीनगर नगर पंचायत की पूरी सीमा के साथ उत्तर, दक्षिण और पूर्व कानूनगो सर्किल, जोगराजपुर और पश्चिम कानूनगो सर्किल के कुछ हिस्सों के अंतर्गत आने वाले बड़ी संख्या में आसपास के गांव शामिल हैं, जिससे इसका चरित्र मुख्य रूप से ग्रामीण है.

पूरनपुर ने वर्ष 1962 में पहली बार मतदान के बाद से अब तक 16 विधानसभा चुनाव देखे हैं. दशकों के दौरान यहां मतदाताओं ने मिला-जुला जनादेश दिया है और कोई भी पार्टी लंबे समय तक अपनी पकड़ बनाए नहीं रख सकी है. भारतीय जनता पार्टी ने यह सीट पांच बार जीती है, जिसमें वर्ष 1974 में उसकी पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ की एकमात्र जीत भी शामिल है. कांग्रेस ने यह सीट चार बार जीती है और समाजवादी पार्टी तीन बार विजयी रही है. जनता दल ने दो बार सीट हासिल की, जबकि भारतीय क्रांति दल और जनता पार्टी ने एक-एक बार जीत दर्ज की.

समाजवादी पार्टी, जिसने वर्ष 2007 में यह सीट जीती थी, उसने वर्ष 2012 में सीट के अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद भी इसे बरकरार रखा. पार्टी के उम्मीदवार पीतम राम ने भारतीय जनता पार्टी के बाबू राम पासवान को 30,838 मतों से हराया था. वर्ष 2017 में नतीजा पलट गया, जब बाबू राम पासवान ने मौजूदा विधायक प्रीतम राम को 39,242 मतों से हरा दिया. भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2022 में भी सीट बरकरार रखी, हालांकि जीत का अंतर घटकर 26,576 मत रह गया. पासवान को 134,404 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की आरती को 107,828 वोट प्राप्त हुए. विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले फरवरी 2022 में पीतम राम के निधन के बाद समाजवादी पार्टी को नया उम्मीदवार उतारना पड़ा था.

विधानसभा चुनावों में मिले-जुले प्रदर्शन की तुलना में लोकसभा चुनावों के दौरान पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी लगातार मजबूत रही है. वर्ष 2009 के बाद से हुए सभी चार संसदीय चुनावों में पार्टी ने इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाई है. वर्ष 2009 में पार्टी ने कांग्रेस पर 29,507 मतों की बढ़त हासिल की थी. इसके बाद समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस की जगह मुख्य चुनौतीकर्ता के रूप में ली, लेकिन वह भारतीय जनता पार्टी को गंभीर चुनौती नहीं दे सकी. वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने 51,767 मतों और वर्ष 2019 में 49,696 मतों की बढ़त हासिल की. वर्ष 2024 में पार्टी की बढ़त और कम हुई, जब उसके उम्मीदवार जितिन प्रसाद को 132,162 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार भगवत सरन गंगवार को 90,498 वोट प्राप्त हुए. इस तरह भारतीय जनता पार्टी को इस विधानसभा क्षेत्र में 41,664 मतों की बढ़त मिली.

पूरनपुर के मतदाताओं की संख्या वर्षों के दौरान लगातार बढ़ी है. पंजीकृत मतदाताओं की संख्या वर्ष 2012 में 339,409 से बढ़कर वर्ष 2017 में 369,531 हो गई. वर्ष 2019 में यह संख्या 376,232, वर्ष 2022 में 385,590 और वर्ष 2024 में 385,992 रही. मतदाता भागीदारी भी काफी अच्छी रही है. वर्ष 2012 में मतदान प्रतिशत 65.98 प्रतिशत था, जो वर्ष 2017 में बढ़कर 66.80 प्रतिशत हो गया. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में यह मामूली रूप से घटकर 66.09 प्रतिशत रहा. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में यह फिर बढ़कर 69.67 प्रतिशत हो गया, जबकि वर्ष 2024 के संसदीय चुनाव में घटकर 63.98 प्रतिशत रह गया.

पूरनपुर हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम और सिख समुदाय की भी अच्छी-खासी उपस्थिति है. अनुमानित रूप से मुस्लिम मतदाता कुल मतदाताओं का 25.20 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी 17.68 प्रतिशत है. सिख समुदाय की विधानसभा क्षेत्र में विशेष उपस्थिति है और यह तराई के कई गांवों में केंद्रित है. स्थानीय और मीडिया अनुमानों के अनुसार व्यापक पूरनपुर क्षेत्र में सिख आबादी करीब एक-पांचवां हिस्सा है, हालांकि सटीक हिस्सा भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. सिख समुदाय की कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भागीदारी है, जबकि कुर्मी और विभिन्न अन्य ओबीसी समुदायों की भी अच्छी-खासी मौजूदगी है.

यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां 90.62 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में और 9.38 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है. स्थानीय अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका है. विभाजन के बाद यहां आए सिख बसने वालों ने तराई में नई कृषि पद्धतियों को अपनाने और फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके बाद यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्रों में शामिल हो गया. स्थानीय अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका है. गन्ना, धान और गेहूं प्रमुख फसलों में शामिल हैं, जबकि चावल मिल, चीनी से जुड़ी गतिविधियां, परिवहन और स्थानीय व्यापार रोजगार के अन्य स्रोत हैं.

पूरनपुर का विकास रोहिलखंड के वनाच्छादित तराई क्षेत्र में एक बस्ती के रूप में हुआ. आसपास का क्षेत्र 18वीं शताब्दी में रोहिल्लों के नियंत्रण में था. रोहिल्लों की हार और रोहिलखंड के ईस्ट इंडिया कंपनी को हस्तांतरण के बाद यह क्षेत्र ब्रिटिश प्रशासन के अधीन आ गया. समय के साथ यह शहर एक स्थानीय बाजार और प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ और बाद में पूरनपुर तहसील का मुख्यालय बन गया. हालांकि, सबसे बड़ा बदलाव आजादी के बाद आया, जब विभाजन के कारण विस्थापित बड़ी संख्या में सिख किसान परिवारों को तराई क्षेत्र में बसाया गया. उन्होंने जंगल और घास के मैदानों के बड़े हिस्से को साफ कर खेती योग्य बनाया और कम आबादी वाले वन और घास के मैदानों को उत्पादक कृषि भूमि में बदलने में भूमिका निभाई. क्षेत्र में सिख समुदाय की विशेष उपस्थिति और पंजाबी प्रभाव वाली कृषि संस्कृति के कारण ही पूरनपुर को मिनी पंजाब का नाम मिला.

पूरनपुर तराई के वन क्षेत्र से भी निकटता से जुड़ा हुआ है. विधानसभा क्षेत्र पीलीभीत टाइगर रिजर्व के नजदीक है, जबकि दुधवा और नेपाल सीमा की ओर के जंगल भी सड़क मार्ग से पहुंच में हैं. इस निकटता के कारण इस क्षेत्र में गहन कृषि और व्यापक वन क्षेत्रों का एक अलग मेल देखने को मिलता है. हालांकि, मानसून के दौरान मौसमी बाढ़ इलाके के कई हिस्सों में एक बार-बार आने वाली समस्या बनी रहती है और भारी बारिश के समय कई गांवों तक पहुंच मुश्किल हो जाती है.

पूरनपुर का क्षेत्र के बाकी हिस्सों से सड़क और रेल संपर्क अच्छा है. यह शहर सड़क मार्ग से पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर, लखनऊ और दिल्ली से जुड़ा हुआ है, जबकि पूरनपुर रेलवे स्टेशन उत्तर पूर्व रेलवे के ऐशबाग-बरेली-कासगंज खंड पर स्थित है. पीलीभीत यहां से लगभग 55 किमी, बीसलपुर करीब 65 किमी और शाहजहांपुर लगभग 90 किमी दूर है. बरेली की दूरी लगभग 100 किमी है, जबकि उत्तराखंड का खटीमा करीब 75 किमी और टनकपुर लगभग 95 किमी दूर है. हल्द्वानी करीब 125 किमी और नैनीताल लगभग 155 किमी की दूरी पर है. नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा व्यापक पूरनपुर क्षेत्र के उत्तरी किनारे के नजदीक है, जबकि दुधवा टाइगर रिजर्व लगभग 100 किमी की दूरी के भीतर है. नई दिल्ली लगभग 330 किमी और लखनऊ करीब 250 किमी दूर है.

हाल के वर्षों में भारतीय जनता पार्टी ने पूरनपुर पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है. वर्ष 2009 के बाद से हुए सभी चार लोकसभा चुनावों में पार्टी ने बढ़त हासिल की है और पिछले दो विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की है. पार्टी की जीत और बढ़त आमतौर पर अच्छे अंतर से रही है. हालांकि, वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव में 39,242 मतों के अंतर से घटकर वर्ष 2022 में 26,576 मतों तक पहुंचना और वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव में कम हुई बढ़त यह संकेत देती है कि मुकाबले को पूरी तरह एकतरफा नहीं माना जा सकता.

वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ते हुए भारतीय जनता पार्टी के पास आत्मविश्वास से भरे रहने के पर्याप्त कारण हैं, खासकर अपनी संगठनात्मक ताकत और हिंदू, सिख और अनुसूचित जाति के मतदाताओं के बीच व्यापक सामाजिक समीकरण बनाने की क्षमता को देखते हुए. लेकिन समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्ष को चुनौती देने के लिए केवल सामान्य चुनाव प्रचार से अधिक की जरूरत होगी. उसे ऐसा उम्मीदवार तलाशना होगा, जो पार्टी के पारंपरिक समर्थन आधार से बाहर भी मतदाताओं को आकर्षित कर सके और बड़े सिख तथा अनुसूचित जाति मतदाता वर्गों में अपनी पहुंच बनाने के लिए रणनीति तैयार कर सके. विशेष रूप से सिख मतदाताओं की अपनी स्थानीय राजनीतिक प्राथमिकताएं हैं और उन्हें केवल व्यापक हिंदू वोट के विस्तार के रूप में नहीं देखा जा सकता.

भारतीय जनता पार्टी वर्ष 2027 के मुकाबले में स्पष्ट पसंदीदा के रूप में उतरती है. विपक्ष के पास अवसर तभी होगा, जब वह पर्याप्त व्यापक सामाजिक गठबंधन तैयार कर सके और विभिन्न समुदायों के बीच अपनी चुनौती को वोटों में बदल सके. यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है, तो पूरनपुर एक बार फिर समाजवादी पार्टी की उम्मीद के मुताबिक कड़ा मुकाबला बनने के बजाय भारतीय जनता पार्टी के लिए अपेक्षाकृत आसान चुनावी सफर साबित हो सकता है.

(अजय झा)

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पूरनपुर विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Baburam

BJP
वोट1,34,404
विजेता पार्टी का वोट %50.1 %
जीत अंतर %9.9 %

पूरनपुर विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Arti

    SP

    1,07,828
  • Ashok Kumar Raja

    BSP

    16,060
  • Deepti Verma

    IND

    2,518
  • Ishwar Dayal Paswan

    INC

    2,054
  • Nota

    NOTA

    1,543
  • Kamlesh Kumar

    LGP

    1,271
  • Vinod Kumar Bharti

    IND

    717
  • Rampal

    IND

    682
  • Amit Kumar

    IND

    380
  • Rameshwar Dayal

    BSRD

    370
  • Rakesh David

    RTVP

    350
WINNER

Babu Ram Paswan

BJP
वोट1,28,493
विजेता पार्टी का वोट %52.1 %
जीत अंतर %15.9 %

पूरनपुर विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Peetam Ram

    SP

    89,251
  • Er.k.k. Arvind

    BSP

    20,139
  • Nota

    NOTA

    2,246
  • Ayasha Begum

    RLD

    1,658
  • Nattho Devi

    SSKP

    1,502
  • Shyam Bihari

    CPI(ML)(L)

    1,322
  • Mahendra Kumar Raj

    BSRD

    1,144
  • Rameshwar Dayal

    IND

    1,064
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पूरनपुर विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में पूरनपुर में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के पूरनपुर विधानसभा चुनाव सीट पर Baburam को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

पूरनपुर विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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