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पुवायां विधानसभा चुनाव 2027 (Powayan Assembly Election 2027)

पुवायां उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में स्थित एक तहसील मुख्यालय और उपखंड स्तर का शहर है. कई सदियों पुराने इतिहास वाला यह कस्बा गौर राजपूत जागीर के आसपास विकसित हुआ और आज आसपास के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और बाजार केंद्र बना हुआ है. पुवायां तहसील के व्यापक क्षेत्र में सिख आबादी भी काफी संख्या में है, खासकर ग्रामीण इलाकों

में, जिससे इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों में पंजाबी प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है.

1956 के परिसीमन आदेश के तहत स्थापित पुवायां अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है और शाहजहांपुर लोकसभा सीट के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. शुरुआत में यह सामान्य यानी अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र था और 1957 में यहां दो विधानसभा सीटें थीं, जिनमें से एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. 1962 से यह एक सदस्यीय विधानसभा क्षेत्र बन गया. 2008 के परिसीमन में इस सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया और इसकी सीमाओं में भी बदलाव किया गया. वर्तमान में इसमें पुवायां और खुटार नगर पंचायतों के साथ पुवायां तहसील के पुवायां, खुटार, बांडा और नाहिल कानूनगो सर्किल शामिल हैं, जिससे इसका स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.

पुवायां में 1957 में पहली बार मतदान होने के बाद अब तक 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2009 का उपचुनाव भी शामिल है. पहले चुनाव में दो निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार सुरेंद्र सिंह और कमले विजयी हुए थे. पूर्व राजपरिवार के एक अन्य सदस्य राजा विक्रम शाह ने 1962 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सीट जीती. 2002 में भी एक निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुआ, जिससे तीन चुनावों में निर्दलीयों को चार जीत मिलीं. कांग्रेस यहां सबसे सफल पार्टी रही है और उसने आठ बार जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा ने तीन बार सीट जीती है. समाजवादी पार्टी ने दो बार जीत हासिल की है, जबकि जनता पार्टी और बसपा को एक-एक जीत मिली है. व्यक्तिगत उम्मीदवारों में चेतराम पासी सबसे सफल रहे हैं, जिन्होंने छह बार सीट जीती, जिनमें चार बार कांग्रेस और दो बार भाजपा के उम्मीदवार के रूप में जीत शामिल है.

पुवायां के सामान्य सीट रहने के दौरान हुए आखिरी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी. 2007 में मिथिलेश कुमार यहां से विधायक चुने गए थे. 2009 में उनके लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उपचुनाव कराना पड़ा, जिसमें बसपा के धीरेंद्र प्रसाद ने जीत हासिल की. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार चेतराम पासी को 27,512 वोटों से हराया. यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद हुआ पहला चुनाव था. 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने फिर सीट पर कब्जा किया. इस चुनाव में मिथिलेश कुमार की पत्नी शकुंतला देवी ने बसपा उम्मीदवार अरुण कुमार सागर को 8,898 वोटों से हराया, जबकि चेतराम पासी तीसरे स्थान पर रहे.

इसके बाद भाजपा ने पुवायां के राजनीतिक समीकरण को नाटकीय रूप से बदल दिया. अरुण कुमार सागर और चेतराम पासी दोनों बाद में भाजपा में शामिल हो गए, जिससे पिछला चुनाव लड़ने वाले प्रमुख उम्मीदवारों के बीच भाजपा का स्थानीय आधार मजबूत हुआ. 2012 में चौथे स्थान पर रहने वाली भाजपा ने 2017 में चेतराम पासी को उम्मीदवार बनाकर बड़ी बढ़त बनाई. उन्होंने मौजूदा सपा विधायक शकुंतला देवी को 72,417 वोटों के भारी अंतर से हराया. पासी ने 2022 में भी सीट बरकरार रखी, हालांकि जीत का अंतर कम हो गया. उन्हें 129,785 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उपेंद्र पाल सिंह को 78,207 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 51,578 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.

लोकसभा चुनावों में भी पुवायां विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का बढ़ता प्रभाव दिखाई देता है. 2009 में समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर 8,859 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में भाजपा ने स्थिति पलटते हुए 64,015 वोटों की बढ़त हासिल की और 2019 में बसपा के मुकाबले अपनी बढ़त को बढ़ाकर 80,292 वोट कर दिया. 2024 में उस समय भाजपा के शाहजहांपुर लोकसभा उम्मीदवार अरुण कुमार सागर को 128,751 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार ज्योत्सना गौंड को 72,581 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने इस विधानसभा क्षेत्र में 56,170 वोटों की बढ़त हासिल की.

पुवायां में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 318,610 से बढ़कर 2017 में 361,653, 2019 में 372,946, 2022 में 387,115 और 2024 में 409,220 हो गई. हालांकि मतदान प्रतिशत में इसके विपरीत रुझान देखने को मिला है. 2012 में मतदान प्रतिशत 65.31 प्रतिशत था, जो 2017 में घटकर 63.38 प्रतिशत और 2019 के लोकसभा चुनाव में 58.27 प्रतिशत रह गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह मामूली रूप से बढ़कर 60.32 प्रतिशत हुआ, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर घटकर 55.92 प्रतिशत रह गया.

पुवायां हिंदू बहुल और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है, जहां सिख आबादी भी काफी संख्या में है. अनुमान के अनुसार अनुसूचित जाति के मतदाता करीब 25.53 प्रतिशत, मुस्लिम करीब 9.40 प्रतिशत और सिख करीब 5.47 प्रतिशत हैं. सिख आबादी खास तौर पर तहसील के ग्रामीण इलाकों में केंद्रित है और इसी वजह से इस क्षेत्र को आम बोलचाल में मिनी पंजाब भी कहा जाता है. बाकी मतदाताओं में विभिन्न ओबीसी और सामान्य वर्ग की जातियां शामिल हैं. यह विधानसभा क्षेत्र काफी हद तक ग्रामीण है, जहां 91.30 प्रतिशत आबादी गांवों में और 8.70 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है.

पुवायां का इतिहास गौर राजपूतों से जुड़ा हुआ है. 13वीं शताब्दी के बाद गौर वंश की एक शाखा ने इस क्षेत्र में अपना प्रभाव स्थापित किया था. राजा उदय सिंह को करीब 1705 में पुवायां जागीर और किले की स्थापना का श्रेय दिया जाता है. इसके बाद यह जागीर रुहेलखंड की प्रमुख राजपूत जमींदारियों में शामिल हो गई. ऐतिहासिक रिकॉर्ड में इस परिवार का संबंध रोहिला सेनाओं के खिलाफ क्षेत्र की रक्षा से भी बताया गया है.

ब्रिटिश काल में भी पुवायां जागीर का महत्व बना रहा. यह कस्बा प्रशासनिक और बाजार केंद्र के रूप में विकसित रहा, जबकि आसपास के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित रही. आजादी के बाद व्यापक तहसील के कुछ हिस्सों में सिख किसान परिवारों के आने और बसने से यहां के सामाजिक और आर्थिक जीवन में एक नया प्रभाव जुड़ा. वर्तमान में कृषि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बनी हुई है. उपजाऊ मैदानी इलाकों में धान, गेहूं, गन्ना और अन्य फसलों की खेती होती है. पुवायां और आसपास के कस्बों तथा गांवों में व्यापार, परिवहन, कृषि प्रसंस्करण और छोटे कारोबार भी रोजगार के साधन हैं.

पुवायां सड़क मार्ग से शाहजहांपुर और आसपास के जिलों से जुड़ा हुआ है. शाहजहांपुर-पुवायां-खुटार मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा है, जिससे रुहेलखंड और तराई क्षेत्रों के साथ इसकी सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होती है. शाहजहांपुर यहां से करीब 30 किलोमीटर दूर है, जबकि पीलीभीत लगभग 90 किलोमीटर और बरेली करीब 90 से 100 किलोमीटर दूर है. उत्तराखंड का खटीमा लगभग 105 किलोमीटर दूर है, जिससे उत्तराखंड का सीमावर्ती क्षेत्र भी यहां से अपेक्षाकृत आसानी से पहुंचा जा सकता है. लखनऊ करीब 190 किलोमीटर दूर है, जबकि नई दिल्ली की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 300 किलोमीटर है.

भाजपा ने पुवायां में मजबूत स्थिति बनाई है. उसने पिछले दो विधानसभा चुनाव जीते हैं और पिछले लगातार तीन लोकसभा चुनावों में इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त हासिल की है. उसकी जीत और लोकसभा चुनावों में बढ़त आम तौर पर काफी बड़ी रही है, हालांकि पहले के मुकाबले अंतर कम हुआ है. समाजवादी पार्टी, जिसने 2009 के लोकसभा चुनाव में बढ़त बनाई थी और 2012 में विधानसभा सीट जीती थी, इसके बाद भाजपा की बराबरी करने में संघर्ष करती रही है. बसपा के प्रभाव में आई गिरावट ने भी सपा के लिए प्रभावी चुनौती खड़ी करना मुश्किल किया है, खासकर ऐसे क्षेत्र में जहां अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है.

2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पुवायां में स्पष्ट रूप से मजबूत स्थिति में होगी. उसका संगठनात्मक आधार, अनुसूचित जाति के एक बड़े हिस्से में समर्थन और व्यापक सामाजिक गठबंधन बनाए रखने की क्षमता उसे मजबूत बढ़त देती है. हालांकि समाजवादी पार्टी इस सीट को नजरअंदाज नहीं कर सकती. उसे व्यापक जनाधार वाले उम्मीदवार और ऐसी रणनीति की जरूरत होगी, जो दलित मतदाताओं के बीच अपना समर्थन दोबारा मजबूत कर सके और भाजपा के व्यापक सामाजिक गठबंधन में सेंध लगा सके. बसपा की वापसी भाजपा के समीकरण को और जटिल कर सकती है, लेकिन जब तक विपक्ष इन संभावनाओं को प्रभावी चुनावी गठबंधन में नहीं बदलता, तब तक पुवायां में भाजपा को हराना मुश्किल हो सकता है. फिलहाल यह सीट भाजपा के मजबूत गढ़ के रूप में दिखाई देती है.

(अजय झा)

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पुवायां विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Chetram

BJP
वोट1,29,785
विजेता पार्टी का वोट %55.6 %
जीत अंतर %22.1 %

पुवायां विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Upendra Pal Singh

    SP

    78,207
  • Udayveer Singh

    BSP

    16,799
  • Anuj Kumri

    INC

    2,493
  • Nota

    NOTA

    1,367
  • Amit Kumar

    LJPRV

    1,359
  • Sudha Devi

    IND

    667
  • Mahendra Singh

    IND

    629
  • Rampal

    IND

    626
  • Mahesh Chandra Sagar

    ASPKR

    474
  • Divaker Lal

    IND

    464
  • Champati

    BSRD

    455
WINNER

Chetram

BJP
वोट1,26,635
विजेता पार्टी का वोट %55.2 %
जीत अंतर %31.5 %

पुवायां विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Shakuntla Devi

    SP

    54,218
  • Gurbachan Lal

    BSP

    38,797
  • Nota

    NOTA

    2,065
  • Mahendra

    SARSAMP

    1,448
  • Dhirendra Prasad

    IND

    1,369
  • Arun Kumar

    BSRD

    1,176
  • Bandhu Prasad

    IND

    991
  • Chandrakala

    IND

    823
  • Kandhai

    IND

    692
  • Rakesh Kumar

    LD

    582
  • Rajnish

    RAJAP

    409
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पुवायां विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

पुवायां विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में पुवायां में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के पुवायां विधानसभा चुनाव सीट पर Chetram को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

पुवायां विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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