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निघासन विधानसभा चुनाव 2027 (NIGHASAN Assembly Election 2027)

निघासन उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का एक तहसील स्तर का कस्बा और निघासन तहसील का मुख्यालय है. नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब तराई क्षेत्र में स्थित निघासन मुख्य रूप से कृषि प्रधान इलाका है, जहां गन्ने की खेती, बाढ़ का खतरा और जंगलों से जुड़े मुद्दे स्थानीय जीवन और अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं.

1956 के परिसीमन आदेश

के तहत स्थापित निघासन एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा सीट है और खीरी लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में शामिल है. साल 2008 के परिसीमन के दौरान इसकी सीमाओं का पुनर्गठन किया गया. अब इसमें निघासन तहसील के साथ रमियाबेहर कानूनगो सर्किल के कई गांव और धौरहरा तहसील की धौरहरा नगर पंचायत शामिल हैं, जिससे इस सीट का चरित्र मुख्य रूप से ग्रामीण है.

निघासन ने 1952 का विधानसभा चुनाव निघासन कम लखीमपुर नार्थ विधानसभा क्षेत्र के हिस्से के रूप में लड़ा था, जो दो सदस्यीय सीट थी. इस सीट से कांग्रेस के दो उम्मीदवार चुने गए थे. 1957 से अलग निघासन विधानसभा क्षेत्र के रूप में चुनाव होने के बाद यहां 19 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2014 और 2019 के दो उपचुनाव भी शामिल हैं. लंबे समय तक इस सीट पर किसी एक पार्टी का लगातार दबदबा नहीं रहा, हालांकि हाल के वर्षों में यह तस्वीर बदली है और भाजपा ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की है.

भाजपा ने इस सीट पर सात बार जीत हासिल की है, जिसमें शुरुआती दशकों में उसकी पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ की दो जीत भी शामिल हैं. कांग्रेस ने चार बार जीत दर्ज की है, जबकि समाजवादी पार्टी तीन बार इस सीट पर विजयी रही है और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो बार जीत हासिल की है. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने 1957 का पहला चुनाव जीता था. जनता पार्टी ने 1977 में और बहुजन समाज पार्टी ने 2002 में इस सीट पर जीत दर्ज की थी.

साल 2012 में भाजपा के अजय कुमार मिश्र टेनी ने समाजवादी पार्टी से यह सीट छीन ली थी. उन्होंने आरए उस्मानी को 31,039 वोटों से हराया था. साल 2014 में खीरी लोकसभा सीट से अजय कुमार मिश्र टेनी के सांसद चुने जाने के बाद यहां उपचुनाव हुआ. समाजवादी पार्टी के कृष्ण गोपाल पटेल ने भाजपा उम्मीदवार पटेल रामकुमार वर्मा को 45,976 वोटों से हराकर जीत दर्ज की.

भारी हार के बावजूद भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में रामकुमार वर्मा को फिर उम्मीदवार बनाया. पार्टी का यह फैसला सफल रहा और उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी व मौजूदा समाजवादी पार्टी विधायक कृष्ण गोपाल पटेल को 46,123 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया. साल 2018 में उनके निधन के बाद 2019 में फिर उपचुनाव हुआ. इसमें उनके बेटे शशांक वर्मा ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद कय्यूम को 51,282 वोटों से हराकर सीट भाजपा के पास बरकरार रखी.

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने नया उम्मीदवार उतारा, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. शशांक वर्मा ने 126,488 वोट हासिल कर सीट बचाए रखी, जबकि समाजवादी पार्टी के आर. एस. कुशवाहा को 85,479 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 41,009 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.

लोकसभा चुनावों में भी निघासन विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का दबदबा रहा है. साल 2009 से अब तक हुए चारों लोकसभा चुनावों में भाजपा ने इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाई. 2009 में भाजपा ने बसपा पर 15,349 वोटों की बढ़त हासिल की. 2014 में यह बढ़त बढ़कर 42,517 वोट हो गई. बाद में समाजवादी पार्टी भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी, लेकिन उसे भाजपा को पीछे छोड़ने में सफलता नहीं मिली.

2019 में भाजपा की बढ़त बढ़कर 59,521 वोट हो गई. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह अंतर काफी कम हो गया. अजय कुमार मिश्र टेनी को निघासन विधानसभा क्षेत्र से 116,230 वोट मिले, जबकि उनके समाजवादी पार्टी प्रतिद्वंद्वी उत्कर्ष वर्मा को 98,924 वोट मिले. इस तरह भाजपा की बढ़त 17,306 वोट रह गई.

भाजपा की बढ़त में कमी का एक बड़ा कारण अक्टूबर 2021 में लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद अजय कुमार मिश्र टेनी के खिलाफ क्षेत्र में पैदा हुआ गुस्सा भी माना गया. इस हिंसा में आठ लोगों की मौत हुई थी, जिनमें चार प्रदर्शनकारी किसान भी शामिल थे. आरोप था कि उन्हें टेनी के बेटे आशीष मिश्र द्वारा कथित रूप से चलाई जा रही गाड़ी ने कुचल दिया था.

निघासन विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यहां 320,502 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2017 में बढ़कर 327,486 हो गए. 2019 में मतदाताओं की संख्या 335,987, 2022 में 340,485 और 2024 में 352,671 हो गई. यहां मतदान प्रतिशत भी लगातार अच्छा रहा है और कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों के विपरीत यहां विधानसभा चुनावों में मतदान लोकसभा चुनावों की तुलना में हमेशा ज्यादा नहीं रहा है.

2012 में मतदान प्रतिशत 64.31 प्रतिशत था, जो 2017 में बढ़कर 67.84 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह मामूली रूप से घटकर 66.89 प्रतिशत रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान बढ़कर 69.59 प्रतिशत हो गया, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह मामूली कमी के साथ 68.49 प्रतिशत रहा.

निघासन हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है. अनुमान के अनुसार मुस्लिम मतदाता कुल मतदाताओं का करीब 21 प्रतिशत हैं. अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 20.50 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के मतदाता करीब 1.60 प्रतिशत हैं. यहां सिख मतदाताओं की संख्या भी उल्लेखनीय है, जिनकी हिस्सेदारी करीब 5 से 6 प्रतिशत मानी जाती है. बाकी मतदाताओं में विभिन्न ओबीसी समूह और अन्य समुदाय शामिल हैं.

यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां की लगभग 89.46 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, जबकि करीब 10.54 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती है.

निघासन का विकास लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्र में एक स्थानीय प्रशासनिक केंद्र के रूप में हुआ. आसपास का इलाका ऐतिहासिक रूप से अवध के बड़े क्षेत्र का हिस्सा रहा और बाद में ब्रिटिश प्रशासन के अधीन आया. लंबे समय तक यह क्षेत्र कम आबादी वाला ग्रामीण इलाका रहा, जिसकी पहचान जंगलों, नदियों और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी से होती थी. आजादी के बाद तहसील मुख्यालय और विकास खंड की स्थापना से आसपास के गांवों के लिए निघासन का महत्व एक स्थानीय बाजार और सेवा केंद्र के रूप में बढ़ा.

निघासन क्षेत्र हिमालय की तलहटी के तराई मैदानी इलाकों में स्थित है. यह क्षेत्र उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, ऊंचे भूजल स्तर और बड़े वन क्षेत्रों के लिए जाना जाता है. शारदा नदी इस क्षेत्र को सबसे अधिक प्रभावित करने वाली प्रमुख नदी है. इसकी सहायक नदियां, मौसमी धाराएं और पुराने नदी मार्ग स्थानीय भूगोल को प्रभावित करते हैं.

मानसून के दौरान निघासन क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बाढ़, कटाव और नदी के मार्ग बदलने का खतरा रहता है. नदी तंत्र के आसपास दलदली जमीन और निचले इलाके भी पाए जाते हैं.

कृषि स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. गन्ना और धान यहां की प्रमुख फसलों में शामिल हैं, जबकि गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन और अन्य फसलों की भी खेती होती है. उपजाऊ मिट्टी और भूजल की अनुकूल स्थिति के कारण विधानसभा क्षेत्र के बड़े हिस्से में गहन कृषि की जाती है.

गन्ने की खेती लखीमपुर खीरी की व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. यह फसल चीनी मिलों, परिवहन, कृषि व्यापार और अन्य संबंधित गतिविधियों को सहारा देती है.

निघासन विधानसभा क्षेत्र में तराई के वन क्षेत्रों से प्रभावित इलाके भी शामिल हैं. दुधवा टाइगर रिजर्व और उत्तरी लखीमपुर खीरी के व्यापक वन क्षेत्र का आसपास की बस्तियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है. वानिकी, कृषि, पर्यटन और छोटे कारोबार रोजगार और व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराते हैं, हालांकि निघासन का बड़ा हिस्सा अब भी खेती और स्थानीय व्यापार पर निर्भर है.

निघासन सड़क मार्ग से लखीमपुर, पलिया, धौरहरा और लखीमपुर खीरी के अन्य कस्बों से जुड़ा हुआ है. व्यापक सड़क नेटवर्क इसे नेपाल सीमा और उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है. निघासन कस्बा आसपास के क्षेत्रों के लिए स्थानीय बाजार और प्रशासनिक केंद्र के रूप में काम करता है.

जिले में राज्य राजमार्गों और अन्य पक्की सड़कों का नेटवर्क है. हालांकि ग्रामीण और बाढ़ प्रभावित इलाकों में मानसून के दौरान आवागमन प्रभावित हो सकता है.

निघासन में रेलवे स्टेशन नहीं है. क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी मुख्य रूप से आसपास के कस्बों के स्टेशनों और लखीमपुर खीरी के व्यापक रेलवे नेटवर्क पर निर्भर करती है. लखीमपुर खीरी, मैलानी और पलिया जिले के प्रमुख रेल केंद्रों में शामिल हैं, जबकि निघासन क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में सड़क परिवहन ही यात्रा का प्रमुख साधन है.

निघासन लखीमपुर से करीब 50 किमी दूर है, जबकि पलिया कलां लगभग 45 किमी की दूरी पर स्थित है. धौरहरा की दूरी करीब 55 किमी और गोला गोकर्णनाथ लगभग 75 किमी है. दुधवा नेशनल पार्क निघासन से लगभग 60 से 70 किमी दूर है, जबकि भारत-नेपाल सीमा पर स्थित गौरीफंटा करीब 70 किमी की दूरी पर है. गौरीफंटा सीमा पार करने के बाद नेपाल के शहर धनगढी तक पहुंचा जा सकता है. उत्तराखंड का खटीमा करीब 120 किमी दूर है, जबकि पीलीभीत लगभग 110 किमी और शाहजहांपुर करीब 150 किमी की दूरी पर है. लखनऊ निघासन से लगभग 180 किमी और नई दिल्ली करीब 400 किमी दूर है.

साल 2009 के बाद निघासन में हुए पिछले नौ चुनावों में से आठ में भाजपा ने जीत हासिल की है या बढ़त बनाई है. पार्टी की ज्यादातर जीत और बढ़त बड़े अंतर से रही है. यहां तक कि जिन चुनावों में भाजपा की बढ़त कम रही, उनमें भी पार्टी की स्थिति इतनी कमजोर नहीं हुई कि उसे गंभीर चुनौती का सामना करना पड़े. भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त के साथ उतरने की स्थिति में है. समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्ष को निघासन के मतदाताओं को यह समझाने के लिए मजबूत और प्रभावी कारण देना होगा कि वे भाजपा के इस मजबूत गढ़ से उसका साथ क्यों छोड़ें.

(अजय झा)

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निघासन विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Shashank Verma

BJP
वोट1,26,488
विजेता पार्टी का वोट %53.4 %
जीत अंतर %17.3 %

निघासन विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • R S Kushwaha

    SP

    85,479
  • R A Usmani

    BSP

    15,392
  • Atal Kumar Shukla

    INC

    2,762
  • Qamrul Huda

    JANADIP

    2,707
  • Nota

    NOTA

    2,191
  • Harish Verma

    AAAP

    1,050
  • Chandra Pratap Lodhi

    IND

    746
WINNER

Patel Ramkumar Verma

BJP
वोट1,07,487
विजेता पार्टी का वोट %48.4 %
जीत अंतर %20.8 %

निघासन विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Krishna Gopal Patel

    SP

    61,364
  • Girjashankar Singh Alias G.s. Singh

    BSP

    40,674
  • Nota

    NOTA

    2,663
  • Radheyshyam

    NINSHAD

    2,470
  • Mahipal Singh

    BSRD

    1,885
  • Shiv Kumar Maurya

    RPI(A)

    1,453
  • S.p.mishra Alias Satyaprakash

    KISP

    1,300
  • Sarika Gupta

    IND

    1,122
  • Ram Khelawan

    PMHP

    886
  • Ratnakar Maurya

    JAM

    843
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निघासन विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

निघासन विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में निघासन में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के निघासन विधानसभा चुनाव सीट पर Shashank Verma को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

निघासन विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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