नजीबाबाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में स्थित एक शहर है, जिसे 18वीं सदी में रोहिल्लाओं ने बसाया था. यह रोहिलखंड के पूर्वी किनारे पर एक अहम औद्योगिक और परिवहन केंद्र के तौर पर विकसित हुआ. यहां की वास्तुकला और राजनीति का इतिहास नवाब नजीब-उद-दौला और ऐतिहासिक पत्थरगढ़ किले से जुड़ा है.
(अनारक्षित) की सीट है और यह नगीना (SC) लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. यह सीट 1956 में बनी थी और यहां पहला चुनाव 1957 में हुआ था.
नजीबाबाद में अब तक 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 1958 का उपचुनाव भी शामिल है. इस सीट की खासियत यह रही है कि यह किसी एक पार्टी का गढ़ नहीं बन पाई है. मतदाताओं का मूड और पसंद बदलती रही है, जिससे यहां की राजनीति में कड़ा मुकाबला और अनिश्चितता बनी रहती है.
कांग्रेस पार्टी ने यह सीट पांच बार जीती है, लेकिन उसकी आखिरी जीत चार दशक से भी पहले 1985 में हुई थी. CPI(M) ने 1993 से 2002 के बीच लगातार तीन बार यह सीट जीती, जो किसी भी पार्टी का यहां सबसे लंबा कार्यकाल रहा है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने भी तीन बार जीत हासिल की है. समाजवादी पार्टी और BJP ने दो-दो बार यह सीट जीती है. BJP की जीतों में 1962 की जीत भी शामिल है, जब वह भारतीय जनसंघ के रूप में चुनाव लड़ रही थी. भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी एक-एक बार जीत हासिल की है.
2012 में, BSP ने लगातार दूसरी जीत हासिल की, जब उसके उम्मीदवार तस्लीम अहमद ने BJP के राजीव कुमार अग्रवाल को 11,583 वोटों से हराया. बाद में तस्लीम अहमद समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और 2017 में अपनी नई पार्टी के लिए नजीबाबाद में जीत का खाता खुलवाया. उन्होंने उसी BJP प्रतिद्वंद्वी को 2,002 वोटों के कम अंतर से हराया. 2022 में, BJP ने बिजनौर के पूर्व सांसद राजा भरतेंद्र सिंह को मैदान में उतारा, लेकिन यह दांव काम नहीं आया. तस्लीम अहमद ने अपनी व्यक्तिगत हैट्रिक पूरी की और 23,770 वोटों के बड़े अंतर से SP के लिए यह सीट बरकरार रखी. तस्लीम अहमद को 102,675 वोट मिले, जबकि भरतेंद्र सिंह को 78,905 वोट मिले.
लोकसभा चुनावों के दौरान नजीबाबाद क्षेत्र में वोटिंग के रुझान लगातार बदलते समीकरणों और बदलती वफादारी की तस्वीर दिखाते हैं. 2009 में, समाजवादी पार्टी ने BSP पर 7,781 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में यह अंतर बहुत कम होकर सिर्फ 962 वोट रह गया, जब समाजवादी पार्टी ने BJP पर बढ़त बनाई. 2019 में BSP ने जबरदस्त वापसी की और BJP पर 53,936 वोटों की बड़ी बढ़त हासिल की. 2024 में, नई बनी आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) ने बड़ी पार्टियों को चौंकाते हुए BJP पर 33,598 वोटों की बढ़त बना ली. इसमें चंद्रशेखर आजाद को 102,541 वोट मिले, जबकि BJP के ओम कुमार को 68,943 वोट मिले.
नजीबाबाद में वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में 302,715 रजिस्टर्ड वोटर थे और वोटिंग 61.77 प्रतिशत हुई थी. 2017 में यह संख्या बढ़कर 329,566 वोटर (वोटिंग 65.52 प्रतिशत), 2022 में 346,687 (वोटिंग 67.10 प्रतिशत) और 2024 में 354,196 वोटर (वोटिंग 61.42 प्रतिशत) हो गई.
2011 की जनगणना के अनुमानों के अनुसार, नजीबाबाद विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति के वोटर लगभग 22.20 प्रतिशत हैं. यह मुख्य रूप से एक ग्रामीण सीट है, जहां 71.40 प्रतिशत वोटर गांवों में रहते हैं, जबकि 28.60 प्रतिशत शहरी इलाकों में रहते हैं. इस क्षेत्र में मुस्लिम आबादी भी काफी ज्यादा है, जिससे हर चुनाव में जाति और समुदाय के समीकरण अहम हो जाते हैं.
नजीबाबाद की स्थापना 18वीं सदी के मध्य में नवाब नजीब-उद-दौला ने की थी, जो एक प्रमुख रोहिल्ला अफगान सरदार थे और मुगल दरबार में बड़े वजीर के पद तक पहुंचे थे. यह शहर बिजनौर जिले में एक अहम औद्योगिक केंद्र बन गया है. यहां की अर्थव्यवस्था छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों, व्यापार और खेती पर टिकी है, जिसे यहां के अहम जंक्शन-टाउन होने और अच्छी कनेक्टिविटी का भी सहारा मिलता है.
भौगोलिक नजरिए से, नजीबाबाद उत्तराखंड की ओर जाने वाली पहाड़ियों के पास थोड़े ऊंचे मैदानी इलाके में बसा है. यहां गन्ने की खेती मुख्य है, जिसे नहरों से पानी मिलता है, जबकि स्थानीय उद्योग और बाजार यहां की अर्थव्यवस्था में जान डालते हैं.
यहां सड़क और रेल नेटवर्क बहुत मजबूत है. नजीबाबाद जंक्शन एक बड़ा रेलवे स्टेशन है जहां से कई दिशाओं के लिए ट्रेनें मिलती हैं, और नेशनल व स्टेट हाईवे इस इलाके को मैदानी और हिमालय की तलहटी वाले इलाकों से जोड़ते हैं.
नजीबाबाद, जिला मुख्यालय बिजनौर से लगभग 32 किमी दूर है. हरिद्वार यहां से लगभग 50 किमी, देहरादून लगभग 105 किमी, मुजफ्फरनगर 85 किमी, मेरठ 105 किमी, सहारनपुर 80 किमी और दिल्ली लगभग 175 किमी दूर है. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क सड़क मार्ग से लगभग 85 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 440 किमी दूर है.
राजनीतिक तौर पर, उम्मीद है कि 2027 के विधानसभा चुनावों में नजीबाबाद में कई पार्टियों के बीच कड़ा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगाय. हालांकि अभी यह सीट समाजवादी पार्टी के पास है, लेकिन चंद्रशेखर आजाद और उनकी नई पार्टी 'आजाद समाज पार्टी (कांशी राम)' के आने से राजनीतिक माहौल काफी बदल गया है. बीजेपी और बीएसपी भी अपनी जीत की उम्मीद कर सकती हैं, जिससे मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ है. यह गठबंधन की रणनीतियों, उम्मीदवार के चयन, स्थानीय मुद्दों और आखिरी समय में वोटरों को जुटाने की कोशिशों पर निर्भर करेगा.
(अजय झा)