मिश्रिख उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में गोमती नदी के पास स्थित एक प्राचीन जड़ों वाला उपखंड स्तर का शहर है. पुराने समय में यह क्षेत्र प्राचीन कोसल क्षेत्र का हिस्सा था और बाद में अलग-अलग शासकों के अधीन रहा. वर्तमान में यह मिश्रिख तहसील का मुख्यालय और आसपास के गांवों के लिए प्रमुख व्यापारिक केंद्र है.
मिश्रिख विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है और मिश्रिख लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन तक यह एक सामान्य और अनारक्षित सीट थी. परिसीमन के बाद इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र बनाया गया और इसकी सीमाओं में बदलाव किया गया. वर्तमान में इसमें पूरा मिश्रिख-कम-नीमसार नगर पालिका बोर्ड तथा मिश्रिख तहसील के मिश्रिख, मछरेहटा और औरंगाबाद कानूनगो सर्किलों के अंतर्गत आने वाले बड़ी संख्या में गांव शामिल हैं. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण स्वरूप वाला है.
1952 और 1957 में हुए शुरुआती चुनावों में मिश्रिख दो सदस्यीय विधानसभा सीट थी. 1952 में कांग्रेस पार्टी ने दोनों सीटों पर जीत हासिल की, जबकि 1957 में दो निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए. 1962 से यह क्षेत्र एक सदस्यीय विधानसभा सीट के रूप में चुनाव में जाता रहा है और अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. कांग्रेस पार्टी ने इस सीट पर छह बार जीत दर्ज की है. समाजवादी पार्टी ने पांच बार जीत हासिल की है. भारतीय जनता पार्टी ने दो बार जीत दर्ज की है, जबकि सोशलिस्ट पार्टी, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
मिश्रिख की राजनीति की एक प्रमुख विशेषता यह रही है कि यहां मतदाता किसी पार्टी को लगातार कई चुनावों तक समर्थन देने के बाद अपना रुख बदलते रहे हैं. कांग्रेस पार्टी ने 1974 से 1985 के बीच लगातार चार विधानसभा चुनाव जीते. समाजवादी पार्टी ने 1993 से 2012 के बीच लगातार पांच चुनावों में जीत हासिल की. भारतीय जनता पार्टी ने भी 2017 और 2022 के पिछले दो विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की. व्यक्तिगत उम्मीदवारों की बात करें तो राम रतन सिंह ने कांग्रेस पार्टी के लिए पांच बार सीट जीती. ओम प्रकाश गुप्ता ने चार बार जीत हासिल की, जिसमें तीन जीत समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में और एक जीत निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में थी.
मिश्रिख के अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट बनने के बाद भी समाजवादी पार्टी का प्रभाव बना रहा. हालांकि बदली हुई आरक्षण व्यवस्था के कारण पार्टी को अपना उम्मीदवार बदलना पड़ा. 2012 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार राम पाल राजवंशी ने सीट पर जीत बरकरार रखी. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मनीष कुमार रावत को 1,522 वोटों के मामूली अंतर से हराया.
2017 में भारतीय जनता पार्टी ने 2012 में चौथे स्थान पर रहने के बाद मिश्रिख में बड़ी राजनीतिक बढ़त बनाई. भाजपा उम्मीदवार राम कृष्ण भार्गव ने समाजवादी पार्टी के लंबे राजनीतिक दौर को समाप्त किया. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मनीष कुमार रावत को 20,672 वोटों से हराया. उस चुनाव में समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक राम पाल राजवंशी तीसरे स्थान पर रहे.
2022 में भारतीय जनता पार्टी ने मिश्रिख सीट पर अपनी जीत बरकरार रखी, हालांकि जीत का अंतर कम हो गया. इस चुनाव में राम पाल राजवंशी ने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के तहत सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा. राम कृष्ण भार्गव को 91,092 वोट मिले, जबकि राम पाल राजवंशी को 79,627 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 11,465 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. यह अंतर 5.18 प्रतिशत अंक के बराबर था.
मिश्रिख विधानसभा क्षेत्र के मतदान रुझानों में विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बीच एक अलग तस्वीर दिखाई देती है. अनुसूचित जाति की बड़ी आबादी होने के बावजूद बहुजन समाज पार्टी यहां कभी विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकी है. हालांकि लगातार लोकसभा चुनावों में उसका प्रदर्शन मजबूत रहा है. दूसरी ओर भाजपा ने पिछले दो विधानसभा चुनाव जीते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से अब तक बढ़त हासिल नहीं कर सकी है.
2009 में बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी पर केवल 255 वोटों की मामूली बढ़त हासिल की थी. 2014 में भाजपा के मुकाबले उसकी बढ़त बढ़कर 13,754 वोट हो गई. 2019 में यह बढ़त घटकर 10,620 वोट रह गई. 2024 में समाजवादी पार्टी सबसे आगे रही. उसके मिश्रिख लोकसभा उम्मीदवार संगीता राजवंशी को 99,782 वोट मिले. भाजपा उम्मीदवार अशोक कुमार रावत को 78,617 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने इस विधानसभा क्षेत्र में 21,165 वोटों की बढ़त हासिल की, जो 10.10 प्रतिशत अंक के बराबर थी.
मिश्रिख में समय के साथ मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 3,18,150 थी. 2017 में यह बढ़कर 3,44,981 हो गई. 2019 में मतदाताओं की संख्या 3,52,375 रही. 2022 में यह संख्या 3,59,664 और 2024 में 3,64,649 हो गई. मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2012 में मतदान 58.88 प्रतिशत रहा. 2017 में यह बढ़कर 63.69 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान घटकर 58.20 प्रतिशत रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह बढ़कर 61.58 प्रतिशत हुआ. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान फिर घटकर 57.25 प्रतिशत रह गया.
मिश्रिख एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत कम है. आरक्षित सीट होने के कारण अनुसूचित जातियां यहां के मतदाताओं में 43.26 प्रतिशत हिस्सा रखती हैं. यह क्षेत्र का सबसे बड़ा सामाजिक समूह है. प्रमुख अनुसूचित जाति समुदायों में पासी, चमार या जाटव, धोबी, कोरी और अन्य छोटे दलित समूह शामिल हैं. मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 8.50 प्रतिशत है. बाकी मतदाताओं में कुर्मी, यादव, लोध और अन्य पिछड़े वर्गों के समुदायों के साथ ब्राह्मण, ठाकुर और अन्य सवर्ण समुदाय शामिल हैं. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां की 96.39 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, जबकि केवल 3.61 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है.
मिश्रिख प्राचीन धार्मिक वन नैमिषारण्य के पास स्थित है. इसे नीमसार या निमसार के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू धार्मिक परंपरा में इसे पवित्र स्थानों में शामिल किया जाता है. महाभारत और पुराणों में नैमिषारण्य का उल्लेख मिलता है. धार्मिक परंपरा में इसे ऋषियों की बड़ी सभाओं और पवित्र ग्रंथों के वाचन से जोड़ा जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार मिश्रिख नाम का संबंध ऋषि दधीचि और इस स्थान पर पवित्र जल के मिश्रण से जुड़ा है. आसपास के क्षेत्र में शुंग और गुप्त काल से जुड़े पुरातात्विक अवशेष मिलने की जानकारी भी सामने आई है. यह क्षेत्र आज भी तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है.
मिश्रिख विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से मध्य उत्तर प्रदेश के समतल जलोढ़ मैदानों में स्थित है. गोमती नदी और छोटी नदियां तथा जलधाराएं आसपास के क्षेत्र से होकर गुजरती हैं. यहां की अधिकांश भूमि कृषि के लिए उपयुक्त है. सीतापुर जिले में सामान्य तौर पर दोमट या बलुई दोमट, मटियार या चिकनी मिट्टी और कुछ हिस्सों में रेतीली भूर मिट्टी पाई जाती है. इन मिट्टियों के कारण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कृषि के लिए उपयोगी है.
सीतापुर जिले के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों की तरह मिश्रिख की स्थानीय अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है. मिश्रिख क्षेत्र में धान, गेहूं और गन्ना प्रमुख फसलों में शामिल हैं. इसके अलावा दलहन, तिलहन और अन्य मौसमी फसलें भी उगाई जाती हैं. नहरों और नलकूपों से मिलने वाली सिंचाई खेती में सहायता करती है. पशुपालन भी कई ग्रामीण परिवारों की आय का एक अतिरिक्त साधन है. मिश्रिख शहर स्थानीय व्यापार और सेवाओं के केंद्र के रूप में काम करता है. पास के नैमिषारण्य से जुड़ा धार्मिक पर्यटन भी आसपास के क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों में योगदान देता है. यहां बड़े स्तर के उद्योग सीमित हैं और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, व्यापार और छोटे स्थानीय व्यवसायों पर निर्भर है.
मिश्रिख सड़क मार्ग से आसपास के शहरों और बड़े शहरी केंद्रों से जुड़ा हुआ है. यह सीतापुर से करीब 24 किलोमीटर, हरदोई से 43 किलोमीटर, सिधौली से 47 किलोमीटर और लखनऊ से 95 किलोमीटर की दूरी पर है. अयोध्या यहां से करीब 190 किलोमीटर और वाराणसी करीब 350 किलोमीटर दूर है. मिश्रिख में अपना रेलवे स्टेशन भी है, जिसे मिश्रिख तीर्थ कहा जाता है. यह स्टेशन सीतापुर और बालामऊ जंक्शन की दिशा में रेल संपर्क उपलब्ध कराता है और क्षेत्र को व्यापक रेल नेटवर्क से जोड़ता है.
मिश्रिख में मतदान के रुझान और मतदाताओं का रुख अक्सर आसानी से समझ में नहीं आता. विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यहां अलग-अलग राजनीतिक तस्वीर देखने को मिली है. क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी की बड़ी अनुसूचित जाति आबादी के बीच मजबूत मौजूदगी रही है और उसने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र में बढ़त बनाई. इसके बावजूद वह विधानसभा सीट कभी नहीं जीत सकी. इसी तरह भाजपा ने लगातार दो विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की, लेकिन हाल के किसी लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र से बढ़त नहीं बना सकी.
संभव है कि मिश्रिख के मतदाता विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए अलग-अलग आधारों पर निर्णय लेते हों. यदि यह रुझान आगे भी जारी रहता है तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को लगातार दो विधानसभा जीतों से आत्मविश्वास मिल सकता है. दूसरी ओर 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की बड़ी बढ़त के बावजूद भाजपा विधानसभा में अपना प्रदर्शन दोहराने की कोशिश करेगी. समाजवादी पार्टी के लिए 2024 की लोकसभा बढ़त इस बात का संकेत हो सकती है कि विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की पकड़ पूरी तरह मजबूत नहीं है.
यह अंतर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मिश्रिख की राजनीतिक स्थिति को समझना कठिन बनाता है. भाजपा मिश्रिख में लगातार कई चुनावों तक किसी एक पार्टी को समर्थन देने की परंपरा के आधार पर अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने की कोशिश करेगी. समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाला विपक्ष लोकसभा चुनाव में मिली बढ़त को विधानसभा चुनाव में जीत में बदलने का प्रयास करेगा. बड़ी अनुसूचित जाति आबादी हर प्रमुख राजनीतिक दल की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण बनी रहेगी. सभी दलों को मतदाताओं के बदलते रुख को समझने के लिए प्रयास करना होगा. 2027 में मिश्रिख एक बार फिर सभी राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति और गणनाओं की परीक्षा ले सकता है.
(अजय झा)