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मलिहाबाद विधानसभा चुनाव 2027 (Malihabad Assembly Election 2027)

मलिहाबाद का नाम आते ही आम के शौकीनों के मुंह में पानी आ सकता है. सदियों से अपने आम के बागों और अलग-अलग किस्मों के लिए पहचाने जाने वाले मलिहाबाद में आज भी आम की खेती और इसका कारोबार स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. इसके साथ ही चिकनकारी कढ़ाई भी यहां के रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक हिस्सा है. मलिहाबाद उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले में स्थित

एक तहसील स्तर का कस्बा है.

1957 के विधानसभा चुनाव से पहले गठित मलिहाबाद विधानसभा सीट शुरुआत में सामान्य यानी अनारक्षित सीट थी. 1967 के चुनाव से इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया. यह मोहनलालगंज लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में पूरी मलिहाबाद तहसील के अलावा लखनऊ तहसील के कुछ निर्धारित क्षेत्र और काकोरी नगर पंचायत भी शामिल हैं. यह क्षेत्र कई गांवों से घिरा हुआ है और विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.

मलिहाबाद में 1957 में पहली बार मतदान होने के बाद अब तक 19 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इनमें 1984 और 2009 में हुए दो उपचुनाव भी शामिल हैं. 2009 का उपचुनाव समाजवादी पार्टी के तत्कालीन विधायक गौरी शंकर की मृत्यु के बाद हुआ था. गौरी शंकर ने बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई थी. शुरुआत में मलिहाबाद कांग्रेस का मजबूत और स्थिर गढ़ रहा. 1957 से 1985 के बीच हुए नौ चुनावों में कांग्रेस ने सात बार जीत दर्ज की. इस दौर में उसे 1977 के आम चुनाव और 1984 के उपचुनाव में हार मिली.

समय के साथ कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई और मलिहाबाद एक स्विंग सीट में बदल गया. समाजवादी पार्टी यहां सबसे प्रभावशाली दलों में शामिल हुई और उसने चार चुनाव जीते. इनके अलावा जनता पार्टी, भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो बार मलिहाबाद सीट जीती. जनता दल और बहुजन समाज पार्टी को भी यहां एक-एक बार जीत मिली.

मलिहाबाद में बहुजन समाज पार्टी की एकमात्र जीत गौरी शंकर से जुड़ी रही. मलिहाबाद के विधायक पद से इस्तीफा देकर बसपा में शामिल होने के बाद गौरी शंकर की मृत्यु हो गई. इसके बाद बसपा ने उनके बेटे सिद्धार्थ शंकर को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने 2009 का उपचुनाव जीत लिया.

2012 में समाजवादी पार्टी के इंदल कुमार ने मलिहाबाद सीट पर जीत दर्ज की. उन्होंने राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कौशल किशोर को 2,215 वोटों के मामूली अंतर से हराया. कौशल किशोर इससे पहले 2002 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में यह सीट जीत चुके थे. वह पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य थे और 2001 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. इसके बाद कौशल किशोर भाजपा में शामिल हुए और 2014 में राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया.

यह फैसला कौशल किशोर और भाजपा दोनों के लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हुआ. कौशल किशोर ने 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर मोहनलालगंज लोकसभा सीट जीती. उन्होंने 2021 से 2024 के बीच केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के रूप में भी काम किया. इसी दौरान उनकी पत्नी जय देवी ने 2017 और 2022 में भाजपा के टिकट पर मलिहाबाद विधानसभा सीट जीती.

2017 में जय देवी ने समाजवादी पार्टी की राजबाला को 22,668 वोटों से हराया. 2022 में उन्होंने फिर यह सीट भाजपा के पास बरकरार रखी. जय देवी को 1,06,372 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सुरेंद्र कुमार को 98,627 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 7,745 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.

मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक मुकाबला लगातार बदलता रहा है. इसमें स्थानीय प्रभावशाली नेता कौशल किशोर की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बसपा पर 8,048 वोटों की बढ़त बनाई थी, जबकि भाजपा काफी पीछे रहते हुए पांचवें स्थान पर रही थी. कौशल किशोर के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा ने यहां अपनी स्थिति मजबूत की.

2014 में भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर 47,097 वोटों की बढ़त बनाई. 2019 में यह अंतर घटकर सिर्फ 4,294 वोट रह गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने आखिरकार भाजपा को पीछे छोड़ दिया. मोहनलालगंज लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आर.के. चौधरी को मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र में 1,15,425 वोट मिले, जबकि भाजपा के कौशल किशोर को 1,01,229 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर 14,196 वोटों की बढ़त बनाई.

मलिहाबाद में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यहां 3,08,229 पंजीकृत मतदाता थे. 2017 में यह संख्या बढ़कर 3,40,477 और 2019 में 3,52,307 हो गई. 2022 में मतदाताओं की संख्या 3,60,402 और 2024 में 3,69,648 हो गई.

मलिहाबाद में मतदान प्रतिशत आम तौर पर अपेक्षाकृत अधिक रहा है, हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान इसमें मामूली कमी देखी गई है. 2012 में मतदान प्रतिशत 65.35 रहा. 2017 में यह बढ़कर 66.89 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत मामूली रूप से घटकर 64.97 प्रतिशत रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह फिर बढ़कर 66.92 प्रतिशत हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत एक बार फिर घटकर 64.30 प्रतिशत रह गया.

मलिहाबाद कस्बे में मुस्लिम आबादी बहुमत में है, लेकिन पूरी मलिहाबाद विधानसभा सीट हिंदू बहुल है. यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 18.20 प्रतिशत है. अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 39.22 प्रतिशत हैं, जबकि यादव मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 7.40 प्रतिशत है. अनुसूचित जाति के मतदाताओं में जाटव या चमार, पासी, कोरी, धोबी और वाल्मीकि समेत कई अन्य समुदाय शामिल हैं.

मलिहाबाद की राजनीति में ब्राह्मण, ठाकुर या राजपूत, लोध, कुर्मी, मौर्य, शाक्य, सैनी और अन्य गैर-यादव पिछड़ा वर्ग के समुदाय भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं. यहां 92.43 प्रतिशत मतदाता गांवों में रहते हैं, जबकि सिर्फ 7.57 प्रतिशत मतदाता शहरी इलाकों में रहते हैं. इस लिहाज से मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप काफी हद तक ग्रामीण है.

मलिहाबाद का इतिहास आसपास के अवध क्षेत्र के विकास से जुड़ा हुआ है. लखनऊ को क्षेत्र के उत्तरी हिस्सों से जोड़ने वाले मार्गों के आसपास स्थित होने के कारण यह समय के साथ एक स्थानीय बस्ती और बाजार केंद्र के रूप में विकसित हुआ. बाद में यह क्षेत्र अपने आम के बागों और खास तौर पर दशहरी आम के लिए जाना जाने लगा. दशहरी आम आज भी मलिहाबाद और इसके आसपास के गांवों की पहचान से जुड़ा हुआ है. स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी आम की खेती का महत्वपूर्ण स्थान है. लखनऊ जिला प्रशासन भी क्षेत्र से जुड़े सांस्कृतिक संदर्भों में दशहरी आम की मिठास का उल्लेख करता है.

मलिहाबाद का इतिहास मुगल काल तक जाता है. आइने अकबरी में इसका उल्लेख एक परगना के मुख्यालय के रूप में मिलता है. शाहजहां के शासनकाल में अमानजई पठानों ने इस क्षेत्र में बसावट की और बाद में वे यहां के प्रमुख जमींदारों में शामिल हो गए. सफदरजंग के शासनकाल में यार बेग खान अफरीदी, बाज खान अफरीदी और करम खान अफरीदी जैसे पठान जमींदारों को मलिहाबाद के कुछ हिस्से दिए गए. इनमें कवलहर नाम का क्षेत्र भी शामिल था.

19वीं सदी की शुरुआत में नवाब फकीर मुहम्मद खान गोया का मलिहाबाद से खास जुड़ाव हुआ. वह यार बेग खान अफरीदी के पोते थे और बाद में गाजी-उद-दीन हैदर शाह की सेना में सेनापति बने. उन्होंने नवाब से मलिहाबाद में आम की खेती करने की अनुमति ली. इसके बाद उन्होंने यहां आम का पहला बाग लगाया माना जाता है. इसी पहल ने मलिहाबाद को लंबे समय तक आम की खेती से जुड़ी पहचान देने की नींव रखी.

मलिहाबाद लखनऊ जिले के उत्तरी हिस्से में स्थित है. इसका अधिकांश क्षेत्र मध्य गंगा के मैदानी इलाके का समतल और उपजाऊ हिस्सा है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती की मुख्य भूमिका है और आम की खेती इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है. मलिहाबाद का आम क्षेत्र खेती, आम की छंटाई, व्यापार और परिवहन के माध्यम से बड़ी संख्या में परिवारों को रोजगार देता है.

कृषि के अलावा छोटे स्तर का व्यापार, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और चिकनकारी से जुड़े काम भी यहां रोजगार के साधन हैं. मलिहाबाद आसपास के गांवों के लिए स्थानीय बाजार और सेवा केंद्र के रूप में भी काम करता है.

मलिहाबाद सड़क मार्ग से लखनऊ, काकोरी और जिले के अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ है. यह लखनऊ-हरदोई सड़क मार्ग के आसपास स्थित है, जिससे राज्य की राजधानी और आसपास के जिलों तक पहुंच आसान होती है. यहां मलिहाबाद रेलवे स्टेशन भी है, जो लखनऊ-मुरादाबाद रेल मार्ग पर स्थित है. यह स्टेशन मलिहाबाद को लखनऊ और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से रेल मार्ग के जरिए जोड़ता है. लखनऊ से यहां प्रमुख हवाई अड्डे और व्यापक सड़क व रेल नेटवर्क तक पहुंच उपलब्ध होती है.

मलिहाबाद लखनऊ से करीब 28 किलोमीटर, काकोरी से 18 किलोमीटर, संडीला से 42 किलोमीटर, हरदोई से 50 किलोमीटर और उन्नाव से करीब 55 किलोमीटर दूर है. कानपुर की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है. अयोध्या करीब 150 किलोमीटर, प्रयागराज करीब 200 किलोमीटर और वाराणसी करीब 300 किलोमीटर दूर है. वास्तविक दूरी चुने गए मार्ग के आधार पर कुछ अलग हो सकती है.

2009 के बाद यहां हुए पिछले सात प्रमुख चुनावों में भाजपा ने चार बार जीत या बढ़त हासिल की है, जबकि समाजवादी पार्टी ने तीन बार जीत या बढ़त बनाई है. हालांकि यह आंकड़ा पूरी राजनीतिक तस्वीर नहीं बताता है. भाजपा की विधानसभा में दो जीत और लोकसभा चुनावों में मिली बराबर संख्या की बढ़त के पीछे एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में कौशल किशोर का प्रभाव रहा है. हालांकि अब उनकी लोकप्रियता में तेजी से कमी आती दिखाई दे रही है.

कौशल किशोर के राजनीतिक प्रभाव में गिरावट 2019 से दिखाई देने लगी थी, जब वह बेहद कम अंतर से बढ़त बना सके. इसके बाद 2022 में उनकी पत्नी जय देवी की जीत का अंतर भी काफी कम हो गया. 2024 में कौशल किशोर को मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार से करीब छह प्रतिशत की बढ़त के अंतर से पीछे रहना पड़ा. इससे भाजपा के सामने आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं.

भाजपा के सामने यह सवाल है कि क्या वह ऐसे परिवार पर फिर दांव लगाएगी, जिसकी राजनीतिक स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है, या फिर मौजूदा विधायक को बदलने का फैसला करेगी. इसके अलावा यह भी सवाल है कि कौशल किशोर और जय देवी के अलावा भाजपा के पास मलिहाबाद में अपना स्वतंत्र मतदाता आधार और ऐसा उपयुक्त उम्मीदवार कितना है, जो पार्टी की घटती संभावनाओं को पलट सके.

समाजवादी पार्टी के लिए रणनीति अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है. पार्टी लोकसभा चुनाव में मिली बढ़त को विधानसभा चुनाव तक आगे बढ़ाना चाहेगी. ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मलिहाबाद में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला करीबी और कड़ा होने की संभावना बनती है.

(अजय झा)

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मलिहाबाद विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Jai Devi

BJP
वोट1,06,372
विजेता पार्टी का वोट %44.1 %
जीत अंतर %3.2 %

मलिहाबाद विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Surendra Kumar

    SP

    98,627
  • Jagdish

    BSP

    25,914
  • Indal Kumar

    INC

    2,142
  • Ajay Kumar Rawat

    IND

    1,983
  • Nota

    NOTA

    1,478
  • Ramesh Kumar

    JANADIP

    1,145
  • Rupendra Kumar Urf Dr.r.k Adarsh

    ASPKR

    1,015
  • Jai Bandhu

    BMUP

    950
  • Acche Lal

    IND

    896
  • Neelam Saroj

    BAWPA

    419
WINNER

Jai Devi

BJP
वोट94,677
विजेता पार्टी का वोट %41.6 %
जीत अंतर %10 %

मलिहाबाद विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Rajbala

    SP

    72,009
  • Satya Kumar Gautam

    BSP

    53,481
  • Jagdish Rawat

    RLD

    1,972
  • Nota

    NOTA

    1,692
  • Kallu

    BMUP

    1,351
  • Pawan Kumar Saroj

    RASHVIP

    897
  • Ramesh Kumar

    IND

    853
  • Jitendra Kumar

    IND

    792
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मलिहाबाद विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में मलिहाबाद में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के मलिहाबाद विधानसभा चुनाव सीट पर Jai Devi को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

मलिहाबाद विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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