खागा उत्तर प्रदेश के दोआब क्षेत्र में फतेहपुर जिले की खागा तहसील का मुख्यालय और एक नगर पंचायत शहर है. कानपुर और प्रयागराज (इलाहाबाद) के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित यह शहर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थानीय प्रशासनिक, वाणिज्यिक और परिवहन केंद्र के रूप में कार्य करता है.
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है और फतेहपुर लोकसभा सीट के छह विधानसभा खंडों में से एक है. 2008 के परिसीमन से पहले यह सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र था, लेकिन परिसीमन के बाद इसका दर्जा बदलकर आरक्षित कर दिया गया और इसकी सीमाओं का पुनर्गठन किया गया. वर्तमान में इसमें खागा, विजयीपुर, खखरेरू, मंझनपुर और धाता के कानूनगो सर्किल शामिल हैं. इसके अलावा खागा और किशनपुर नगर पंचायतें भी इसका हिस्सा हैं, जो मुख्य रूप से ग्रामीण इस विधानसभा क्षेत्र को छोटा शहरी स्वरूप प्रदान करती हैं.
स्थापना के बाद से खागा में 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआती दशकों में कांग्रेस का दबदबा रहा, लेकिन हाल के वर्षों में यह विधानसभा क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ बनकर उभरा है. पार्टी ने पिछले चार चुनावों में लगातार जीत हासिल की है. कुल मिलाकर कांग्रेस और भाजपा ने पांच-पांच बार इस सीट पर जीत दर्ज की है. भाजपा की जीत में 1962 में उसकी पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ की एक जीत भी शामिल है. जनता दल और बहुजन समाज पार्टी ने दो-दो बार इस सीट पर कब्जा किया है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
खागा में भाजपा का उदय 2007 में शुरू हुआ, जब यह सीट सामान्य श्रेणी की थी. बाद में इसके आरक्षित विधानसभा क्षेत्र बनने का पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ा और उसने इसके बाद हुए तीनों चुनावों में जीत हासिल की. 2012 में कृष्णा पासवान ने चुनाव जीता और बसपा के मुरली धर को 18,922 वोटों से हराया. 2017 में भाजपा ने यह सीट बरकरार रखी. उस चुनाव में पासवान ने कांग्रेस के ओम प्रकाश गिहर को हराया, जो समाजवादी पार्टी के कनिष्ठ सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे. भाजपा की जीत का अंतर बढ़कर 56,434 वोट हो गया. 2022 में पासवान ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की. उन्हें 83,735 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के रामतीर्थ परमहंस को 78,226 वोट मिले. इस तरह भाजपा की जीत का अंतर तेजी से घटकर 5,509 वोट रह गया.
लोकसभा चुनावों के दौरान खागा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का दबदबा बरकरार रहा है. पार्टी को एकमात्र झटका 2009 में लगा, जब वह तीसरे स्थान पर रही और समाजवादी पार्टी ने बसपा पर 5,211 वोटों की बढ़त हासिल की. 2014 में भाजपा ने जोरदार वापसी की और इसके बाद से प्रत्येक लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाए रखी. 2014 में भाजपा ने बसपा पर 17,775 वोटों की बढ़त हासिल की थी. 2019 में यह अंतर काफी बढ़कर 39,020 वोट हो गया, जब बसपा ने समाजवादी पार्टी के सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ा था. 2024 में समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगी दल को बदलकर बसपा की जगह कांग्रेस को शामिल किया. इस बदलाव से उसे भाजपा के साथ अंतर कम करने में मदद मिली. फतेहपुर लोकसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार निरंजन ज्योति, जिन्हें साध्वी निरंजन ज्योति के नाम से भी जाना जाता है, को 84,333 वोट मिले. वहीं समाजवादी पार्टी के नरेश चंद्र उत्तम पटेल को 81,573 वोट मिले. इस तरह विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की बढ़त केवल 2,760 वोट रह गई.
खागा में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 304,956 से बढ़कर 2017 में 323,594 और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 330,388 हो गई. 2022 में यह संख्या 343,495 थी, जबकि 2024 में बढ़कर 346,851 हो गई. विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में कथित तौर पर 313,428 मतदाता दर्ज थे. यह 2024 के आंकड़े से 33,423 कम है, यानी इसमें 9.64 प्रतिशत की कमी आई है.
अलग-अलग चुनावों में मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और यह अपेक्षाकृत मध्यम स्तर पर रहा है. 2012 में मतदान प्रतिशत 57.70 था, जबकि 2017 में यह 57.05 प्रतिशत रहा. 2019 के लोकसभा चुनाव में इसमें मामूली गिरावट आई और यह 56.06 प्रतिशत रह गया. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 58.37 हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 56.65 प्रतिशत रह गया.
खागा हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी लगभग 12.30 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी करीब 29.04 प्रतिशत है. अन्य प्रमुख समुदायों में मौर्य, लोधी, कुर्मी, यादव, निषाद, पाल और प्रजापति शामिल हैं. इनके अलावा ब्राह्मण, ठाकुर और अन्य पिछड़ी जातियों के समूह भी यहां रहते हैं. अनुसूचित जाति के समुदायों में पासी, जाटव और कोरी सहित अन्य समूह शामिल हैं. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां के 91.06 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि खागा और किशनपुर कस्बों में शहरी मतदाताओं की हिस्सेदारी शेष 8.94 प्रतिशत है.
खागा गंगा-यमुना दोआब के उपजाऊ क्षेत्र में स्थित है और लंबे समय से कृषि बाजार के रूप में जाना जाता है. 1927 में इसे टाउन एरिया का दर्जा दिया गया था और बाद में नगर पंचायत के रूप में उन्नत किया गया. यह शहर ग्रैंड ट्रंक रोड, जिसे अब राष्ट्रीय राजमार्ग 19 कहा जाता है, और रेलवे लाइन के किनारे विकसित हुआ. इससे यह तहसील के प्रशासनिक मुख्यालय के रूप में सुविधाजनक स्थान बन गया. इसकी अर्थव्यवस्था आज भी मुख्य रूप से कृषि और आसपास के गांवों की जरूरतों को पूरा करने वाले व्यापार पर निर्भर है. व्यापक फतेहपुर क्षेत्र का इतिहास भी काफी पुराना है. 1857 के विद्रोह और ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्थानीय क्रांतिकारियों के प्रतिरोध में भी इस क्षेत्र की भूमिका रही है.
खागा सड़क और रेल मार्गों से जुड़ा हुआ है. यहां का स्थानीय रेलवे स्टेशन शहर और आसपास के गांवों की जरूरतों को पूरा करता है. फतेहपुर शहर यहां से लगभग 45 से 50 किलोमीटर दूर है, जबकि कानपुर की दूरी करीब 100 से 110 किलोमीटर और प्रयागराज की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 90 से 100 किलोमीटर है. मार्ग के अनुसार लखनऊ लगभग 150 से 165 किलोमीटर दूर है.
पिछले दो दशकों से खागा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा अपराजित रही है और 2007 के बाद से लगातार चार बार जीत हासिल कर चुकी है. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की लगातार बढ़त ने उसके इस रिकॉर्ड को और मजबूत किया है. समाजवादी पार्टी ने विधानसभा सीट केवल एक बार, 1993 में जीती थी और 2009 के लोकसभा चुनाव में भी इस क्षेत्र में बढ़त हासिल की थी. इसके बावजूद पिछले दो चुनावों में पार्टी का समर्थन लगातार बढ़ा है, जिससे भाजपा सतर्क हो गई है. 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी भाजपा से 2.75 प्रतिशत अंकों से पीछे थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह अंतर घटकर 1.40 प्रतिशत अंक रह गया.
बसपा की अप्रत्याशित वापसी को छोड़ दें, जिसका प्रभाव अब काफी सीमित हो गया है, तो खागा सीट बरकरार रखने की भाजपा की कोशिश को मुख्य चुनौती समाजवादी पार्टी से मिलेगी. विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद 2024 की मतदाता सूची की तुलना में 33,423 मतदाताओं या 9.64 प्रतिशत की कमी ने चुनावी मुकाबले को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है. इसका राजनीतिक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि किन दलों या समुदायों के मतदाता सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. भाजपा के पक्ष में जहां उसका पुराना चुनावी रिकॉर्ड है, वहीं समाजवादी पार्टी को उम्मीद है कि हाल के चुनावों में हासिल बढ़त को वह बड़ी जीत में बदल सकती है. भाजपा अब भी इस सीट पर सबसे मजबूत दावेदार है, लेकिन जीत के घटते अंतर से संकेत मिलता है कि 2027 में खागा का मुकाबला पिछले चुनावी रिकॉर्ड की तुलना में अधिक कड़ा हो सकता है.
(अजय झा)