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कानपुर कैंट विधानसभा चुनाव 2027 (Kanpur Cantt. Assembly Election 2027)

कानपुर कैंटोनमेंट, जिसे आम तौर पर कानपुर कैंट के नाम से जाना जाता है, उत्तर प्रदेश के कानपुर में गंगा के दाहिने किनारे स्थित एक ऐतिहासिक सैन्य स्टेशन है. यह एक बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है और तीन तरफ से शहर से घिरा है. यह कानपुर का एक अलग हिस्सा बना हुआ है. इसकी चौड़ी सड़कें, बड़े खुले क्षेत्र, पार्क, बैरक, अधिकारियों के आवास और संस्थागत

इमारतें इसे आसपास के घने नागरिक इलाकों से अलग पहचान देती हैं.

कानपुर कैंटोनमेंट के नाम पर विधानसभा क्षेत्र का नाम रखा गया है, जिसे 1967 के चुनावों से पहले स्थापित किया गया था. यह कानपुर लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा खंडों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इसमें पूरा कानपुर कैंटोनमेंट बोर्ड, नॉर्दर्न रेलवे कॉलोनी और कानपुर नगर निगम के 12 वार्ड शामिल हैं. इस वजह से इसका स्वरूप पूरी तरह शहरी है.

कानपुर कैंटोनमेंट में स्थापना के बाद से 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. बीजेपी ने यह सीट छह बार जीती है और उसकी सभी जीत 1991 से 2012 के बीच लगातार हुईं. कांग्रेस ने यह सीट पांच बार जीती है, जबकि भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, जनता दल और समाजवादी पार्टी ने एक-एक बार यह सीट जीती है.

हाल के वर्षों में इस विधानसभा क्षेत्र में काफी राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है और पिछले तीन विधानसभा चुनावों में तीन अलग-अलग दलों ने जीत दर्ज की है. 2012 में बीजेपी ने रघुनंदन सिंह भदौरिया को नया उम्मीदवार बनाकर लगातार छठी बार यह सीट बरकरार रखी. सतिश महाना, जो लगातार पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके थे, 2012 में नवगठित महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र में चले गए. भदौरिया ने समाजवादी पार्टी के मोहम्मद हसन रूमी को 9,308 वोटों से हराया. यह 2007 में बीजेपी की 26,536 वोटों की जीत के अंतर की तुलना में काफी कम था. हालांकि यह संकेत बीजेपी को 2017 में भदौरिया को फिर से मैदान में उतारने से नहीं रोक सका. उन्हें कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी सोहिल अख्तर अंसारी ने 9,364 वोटों से हरा दिया. समाजवादी पार्टी, जो उस चुनाव में काफी पीछे रहकर चौथे स्थान पर रही थी, 2022 में अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकल गई. उसके उम्मीदवार मोहम्मद हसन रूमी को 94,729 वोट मिले, जबकि भदौरिया को 74,742 वोट मिले. इससे समाजवादी पार्टी ने इस विधानसभा क्षेत्र में पहली बार 19,987 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. मौजूदा कांग्रेस विधायक सोहिल अख्तर अंसारी काफी पीछे रहकर तीसरे स्थान पर रहे.

विधानसभा चुनावों में अपने उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन और लंबे समय तक सीट बरकरार रखने में असमर्थता के विपरीत, कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों में कानपुर कैंट विधानसभा खंड में अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन किया है. 2009 के बाद हुए चारों लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने बीजेपी पर बढ़त बनाई है. 2009 में कांग्रेस ने बीजेपी पर 13,825 वोटों की बढ़त बनाई थी, जो 2014 में घटकर 3,062 वोट रह गई. 2019 में कांग्रेस ने वापसी करते हुए 15,695 वोटों की बढ़त बनाई. 2024 में यह बढ़त काफी बढ़ गई, जब कानपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार आलोक मिश्रा को कानपुर कैंट विधानसभा खंड में 115,028 वोट मिले, जबकि बीजेपी के रमेश अवस्थी को 71,520 वोट मिले. इस तरह कांग्रेस ने कानपुर कैंट विधानसभा खंड में 43,508 वोटों की बढ़त हासिल की. 2024 में कांग्रेस के वोटों में यह उछाल समाजवादी पार्टी के साथ उसके गठबंधन के संदर्भ में आया, जो इससे पहले दोनों दलों के साझा मुस्लिम वोट आधार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही थी.

कानपुर कैंटोनमेंट में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 297,863 से बढ़कर 2017 में 335,587 और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 348,343 हो गई. 2022 में यह संख्या 362,382 और 2024 में 374,262 थी. 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 276,704 मतदाता दर्ज थे. यह 2024 के 374,262 मतदाताओं की तुलना में 97,558 की कमी है, यानी 26.59 प्रतिशत की गिरावट.

मतदान प्रतिशत आम तौर पर मध्यम रहा है, हालांकि चुनावों के बीच इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2012 में मतदान प्रतिशत 48.46 रहा था और 2017 में बढ़कर 52.58 प्रतिशत हो गया. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में यह 49.14 प्रतिशत रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान बढ़कर 52.40 प्रतिशत हो गया, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 50.84 प्रतिशत रह गया.

कानपुर कैंटोनमेंट हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जिसमें मुस्लिम आबादी भी काफी बड़ी है. अनुमान के अनुसार इसकी आबादी में मुस्लिम करीब 45.20 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी करीब 9.05 प्रतिशत है. अन्य महत्वपूर्ण समुदायों में ब्राह्मण, वैश्य और अन्य सवर्ण हिंदू समूहों के साथ-साथ ओबीसी समुदाय भी शामिल हैं. विधानसभा क्षेत्र में सिख, जैन और ईसाई समुदायों की भी लंबे समय से मौजूदगी है. इसके अलावा पंजाबी और सिंधी परिवार भी कई पीढ़ियों से कानपुर में बसे हुए हैं. मुस्लिम आबादी कैंटोनमेंट और उससे जुड़े नागरिक इलाकों के कई हिस्सों में केंद्रित है. वहीं सैन्य और रेलवे प्रतिष्ठानों की मौजूदगी इसे कानपुर के कई अन्य हिस्सों से अलग सामाजिक संरचना देती है.

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1811 में कानपुर कैंटोनमेंट को औपचारिक रूप से एक प्रमुख सैन्य छावनी के रूप में स्थापित किया था. गंगा के किनारे इसकी स्थिति ने दोआब क्षेत्र में परिवहन और रक्षा के लिहाज से इसे रणनीतिक लाभ दिया. 19वीं सदी की शुरुआत में यह सैन्य स्टेशन तेजी से विकसित हुआ और उत्तरी भारत की महत्वपूर्ण ब्रिटिश छावनियों में शामिल हो गया. 1857 के विद्रोह के दौरान यह क्षेत्र सीज ऑफ कानपुर का स्थल बना, जिसमें ब्रिटिश सेना और नागरिकों को घेर लिया गया था. आत्मसमर्पण के बाद बड़ी संख्या में ब्रिटिश महिलाओं और बच्चों की हत्या बीबिघर हत्याकांड में हुई. इन घटनाओं ने कैंटोनमेंट के इतिहास पर गहरी छाप छोड़ी. आजादी के बाद भी यह रक्षा प्रतिष्ठान के रूप में महत्वपूर्ण बना रहा और कैंटोनमेंट बोर्ड के तहत काम करता रहा. इसने अपनी विशिष्ट संरचना, हरित क्षेत्रों और सैन्य एवं नागरिक क्षेत्रों के मिश्रण को बनाए रखा और साथ ही कानपुर का अभिन्न हिस्सा बना रहा.

कानपुर कैंटोनमेंट का स्वरूप कानपुर शहर के अंदरूनी हिस्सों के भीड़भाड़ वाले वाणिज्यिक और आवासीय इलाकों से काफी अलग है. कैंटोनमेंट में पारंपरिक रूप से चौड़ी सड़कें, अधिक खुले क्षेत्र और कम घनत्व वाला निर्मित वातावरण रहा है. हालांकि इसे शहर के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली सड़कों पर यातायात भारी हो सकता है. मॉल रोड कैंटोनमेंट को सिविल लाइंस और शहर के केंद्रीय कारोबारी इलाकों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क है. कैंटोनमेंट में फेथफुलगंज और कंट्री कार्ट पराओ जैसे स्थानीय बाजार भी हैं. इस क्षेत्र में कई पार्क, चर्च, कब्रिस्तान और ऐतिहासिक इमारतें भी हैं, जो इसकी सैन्य पृष्ठभूमि को दर्शाती हैं. कानपुर मेमोरियल चर्च, कॉनपुर क्लब, गोल्फ कोर्स और कई पुराने सैन्य प्रतिष्ठान इसकी अलग पहचान में योगदान देते हैं. गंगा के किनारे स्थित होने के कारण इसका भौगोलिक स्वरूप भी घनी आबादी वाले शहर के अंदरूनी विधानसभा क्षेत्रों से अलग है.

यह विधानसभा क्षेत्र कानपुर की प्रमुख परिवहन सुविधाओं के करीब होने का लाभ उठाता है. कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन लगभग 5-7 किलोमीटर दूर है और यह सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन है. कानपुर अनवरगंज और गोविंदपुरी स्टेशन अतिरिक्त रेल विकल्प उपलब्ध कराते हैं. कानपुर एयरपोर्ट चकेरी में है और सड़क मार्ग से लगभग 12-15 किलोमीटर दूर है. यह विधानसभा क्षेत्र मॉल रोड, कैंट और जाजमऊ तथा चकेरी की ओर जाने वाली सड़कों के माध्यम से शहर के सड़क और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से भी जुड़ा है. कानपुर कैंटोनमेंट से उन्नाव की अनुमानित सड़क दूरी 20-25 किलोमीटर, लखनऊ की करीब 80-90 किलोमीटर, अयोध्या की करीब 205-215 किलोमीटर, प्रयागराज की करीब 190-200 किलोमीटर और वाराणसी की करीब 300 किलोमीटर है. आगरा की दूरी लगभग 330-350 किलोमीटर है.

बीजेपी को अतीत में मुस्लिम वोटों के बंटवारे से फायदा मिला है. खास तौर पर हाल के विधानसभा चुनावों में यह एकमात्र प्रमुख दल रहा है जिसने हिंदू उम्मीदवार को मैदान में उतारा, जबकि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य प्रमुख प्रतिद्वंद्वी दलों ने आम तौर पर मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा. 2017 और 2022 के नतीजे बताते हैं कि इस वोट के बंटवारे ने चुनावी मुकाबले को किस तरह प्रभावित किया है. बीजेपी को उम्मीद होगी कि यह पैटर्न आगे भी जारी रहेगा, हालांकि एसआईआर के कारण मतदाता संख्या में आई कमी ने विधानसभा क्षेत्र में एक नया बदलाव जोड़ा है. अंतिम मतदाता सूची में 2024 के मतदाताओं की तुलना में एक चौथाई से अधिक की कमी हुई है, लेकिन अभी विधानसभा क्षेत्र स्तर पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह तय किया जा सके कि इस हटाए गए मतदाता समूह में किसी खास सामाजिक वर्ग या राजनीतिक दल के समर्थक सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं.

मतदाता आधार में कमी 2027 में मतदान के पैटर्न को भी बदल सकती है, हालांकि यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि इससे मतदान प्रतिशत अपने आप बढ़ जाएगा. बीजेपी के लिए इससे भी बड़ी चिंता यह होगी कि क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की भारी बढ़त विधानसभा चुनाव में भी दोहराई जाती है. इस विधानसभा क्षेत्र का हालिया इतिहास बताता है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान का रुझान हमेशा एक जैसा नहीं रहा है. कांग्रेस के मजबूत संसदीय प्रदर्शन को 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत और इस सीट पर बीजेपी के लंबे रिकॉर्ड के संदर्भ में देखा जाना होगा.

2027 में कानपुर कैंटोनमेंट का मुकाबला हाल के विधानसभा इतिहास से अधिक अनिश्चित नजर आ रहा है. बीजेपी का इस क्षेत्र में मजबूत संगठनात्मक आधार और लंबा राजनीतिक रिकॉर्ड है. वहीं समाजवादी पार्टी 2027 के चुनाव में मौजूदा विजेता के रूप में उतरेगी और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में मजबूत संसदीय प्रदर्शन किया है. मुस्लिम वोटों का बंटवारा, संशोधित मतदाता सूची का प्रभाव और 2024 के कांग्रेस वोटों का विधानसभा चुनाव में कितना हिस्सा स्थानांतरित होता है, ये सभी महत्वपूर्ण कारक होंगे. कानपुर कैंटोनमेंट में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अनिश्चितता और कड़े मुकाबले की उम्मीद बनी हुई है.

(अजय झा)

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कानपुर कैंट विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Mohammad Hasan 'roomi'

SP
वोट94,729
विजेता पार्टी का वोट %50 %
जीत अंतर %10.6 %

कानपुर कैंट विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Raghunandan Singh Bhadauriya

    BJP

    74,742
  • Sohil Akhtar Ansari

    INC

    13,279
  • Mohammad Shafi

    BSP

    3,389
  • Moinuddin

    AIMIM

    1,112
  • Nota

    NOTA

    740
  • Rashid Jamal

    AAAP

    536
  • Devi Prasad

    IND

    246
  • Ashish Shukla

    BTSTP

    211
  • Ramesh

    ABHSLP

    178
  • Mukesh Pal

    RSPS

    135
  • Mohd Meraj

    RUC

    116
  • Jamsed

    JNABHNP

    79
WINNER

Sohil Akhtar Ansari

INC
वोट81,169
विजेता पार्टी का वोट %46 %
जीत अंतर %5.3 %

कानपुर कैंट विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Raghunandan Singh Bhadauria

    BJP

    71,805
  • Naseem Ahmad

    BSP

    14,079
  • Mohd. Hassan Roomi

    SP

    5,954
  • Nota

    NOTA

    729
  • Ranjit Singh Sangar

    SHS

    422
  • Manoj Kumar

    NCP

    393
  • Dharmendra Singh

    RLD

    307
  • Sudha Gupta

    BSCP

    293
  • Mohd Shahabuddin

    RUC

    274
  • Mohit

    SARSAMP

    229
  • Santosh Kumar Kushawaha

    IND

    221
  • Danish Ali

    NPPS

    215
  • Mohd. Firoj

    SAJPCS

    148
  • Gaurav Kumar Mishra

    SASPA

    140
  • Dinesh Kumar Gupta

    RVLP

    84
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कानपुर कैंट विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

कानपुर कैंट विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में कानपुर कैंट में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के कानपुर कैंट विधानसभा चुनाव सीट पर Mohammad Hasan 'roomi' को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

कानपुर कैंट विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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