Advertisement

जलालाबाद विधानसभा चुनाव 2027 (Jalalabad Assembly Election 2027)

जलालाबाद, शाहजहांपुर जिले का एक तहसील स्तरीय शहर और जलालाबाद तहसील का मुख्यालय है. जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसका नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है. इससे पहले अगस्त 2025 में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर अनापत्ति दे दी थी. प्रस्तावित नया नाम इस स्थानीय

मान्यता को दर्शाता है कि इस क्षेत्र का संबंध भगवान परशुराम से है, जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है.

जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र का आधिकारिक नाम अभी भी जलालाबाद ही है. यह एक सामान्य यानी अनारक्षित सीट है और शाहजहांपुर लोकसभा क्षेत्र की छह विधानसभा सीटों में शामिल है. 1951 के परिसीमन आदेश के जरिए यह विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया था. 2008 के परिसीमन के बाद इसकी सीमाओं में बदलाव किया गया. वर्तमान में इसमें जलालाबाद नगर पालिका बोर्ड और अल्लाहगंज नगर पंचायत के साथ जलालाबाद, अल्लाहगंज, कलान और मिर्जापुर के कानूनगो सर्किल शामिल हैं. इस कारण विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.

जलालाबाद ने 1952 के बाद उत्तर प्रदेश में हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में मतदान किया है. अलग-अलग दशकों में यहां मतदाताओं ने अलग-अलग राजनीतिक दलों का समर्थन किया है और किसी एक पार्टी का लंबे समय तक दबदबा नहीं रहा है. कांग्रेस ने इस सीट पर पांच बार जीत दर्ज की है, जिसमें उसकी आखिरी जीत 1985 में हुई थी. समाजवादी पार्टी ने चार बार यह सीट जीती है. भाजपा और उसकी पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ ने मिलकर तीन बार जीत दर्ज की है. बहुजन समाज पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो बार जीत हासिल की है. जनता दल और जनता पार्टी ने एक-एक बार सीट जीती है.

2012 में बसपा ने अपनी सीट बरकरार रखी थी. उस चुनाव में उसके मौजूदा विधायक नीरज कुशवाहा ने समाजवादी पार्टी के शरद वीर सिंह को 550 वोटों से हराया था. शरद वीर सिंह इससे पहले समाजवादी पार्टी के टिकट पर दो बार यह सीट जीत चुके थे. उन्होंने 2017 में वापसी करते हुए भाजपा के मनोज कश्यप को 9,297 वोटों से हराया. 2022 में भाजपा ने पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की. भाजपा के हरि प्रकाश वर्मा को 99,609 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नीरज नलिनिश को 95,037 वोट मिले. भाजपा ने 4,572 वोटों के अंतर से चुनाव जीता.

जलालाबाद में भाजपा का उभार खास तौर पर उल्लेखनीय रहा है. 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सिर्फ 1.52 प्रतिशत वोट मिले थे और उसका उम्मीदवार पांचवें स्थान पर रहा था. 2017 में पार्टी का वोट शेयर बढ़कर 31.69 प्रतिशत हो गया. 2022 में यह आंकड़ा 45.97 प्रतिशत तक पहुंच गया. इस तरह करीब एक दशक में भाजपा हाशिए की स्थिति से निकलकर इस सीट पर सबसे आगे पहुंच गई.

जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनावों का मतदान रुझान भी काफी हद तक इसी बदलाव को दिखाता है. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बसपा पर 10,771 वोटों की बढ़त बनाई थी. भाजपा उस चुनाव में चौथे स्थान पर रही थी. 2014 में भाजपा ने जोरदार वापसी करते हुए समाजवादी पार्टी पर 15,469 वोटों की बढ़त के साथ पहला स्थान हासिल किया. 2019 में भाजपा की बढ़त बढ़कर 48,730 वोट हो गई. 2024 में समाजवादी पार्टी ने वापसी की. ज्योत्सना गोंड को 103,528 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार अरुण कुमार सागर को 84,088 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 19,440 वोटों की बढ़त हासिल की.

समय के साथ जलालाबाद में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यहां 3,01,417 पंजीकृत मतदाता थे. 2017 में यह संख्या बढ़कर 3,42,343 हो गई. 2019 में 3,53,129 और 2022 में 3,67,356 मतदाता दर्ज किए गए. 2024 में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 3,84,551 हो गई. इसके विपरीत मतदान प्रतिशत में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है. 2012 में मतदान 66.77 प्रतिशत था. 2017 में यह घटकर 60.87 प्रतिशत और 2019 के लोकसभा चुनाव में 54.02 प्रतिशत रह गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 59.05 प्रतिशत हुआ, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर घटकर 52.72 प्रतिशत रह गया.

जलालाबाद एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है. अनुमान के अनुसार मुस्लिम मतदाता करीब 11.20 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी 12.61 प्रतिशत है. यादव और ठाकुर यहां के प्रमुख सामाजिक समूहों में शामिल हैं. इनके अलावा अन्य ओबीसी और सवर्ण समुदाय भी चुनावी समीकरण में भूमिका निभाते हैं. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. इसकी करीब 89.60 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, जबकि 10.40 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है.

जलालाबाद का संबंध क्षेत्र के इतिहास और धार्मिक परंपराओं से लंबे समय से रहा है. स्थानीय मान्यता के अनुसार इसे भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है. इसी मान्यता को शहर का नाम बदलने के प्रस्ताव का एक प्रमुख आधार बताया गया है. ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र व्यापक कठेर क्षेत्र का हिस्सा रहा है और बाद में रोहिल्ला प्रभाव में आया. ब्रिटिश शासन के दौरान जलालाबाद एक तहसील मुख्यालय और स्थानीय प्रशासनिक तथा व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ. आज भी यह आसपास के बड़े ग्रामीण क्षेत्र के लिए प्रशासन और स्थानीय बाजार के केंद्र के रूप में काम करता है.

जलालाबाद की स्थानीय अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है. शाहजहांपुर जिले का यह हिस्सा मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है. यहां गेहूं, धान, दालें, गन्ना, मूंगफली और तिलहन जैसी प्रमुख फसलें उगाई जाती हैं. जिला प्रशासन के अनुसार जलालाबाद तहसील बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है. रामगंगा नदी और अन्य नदियां तथा उनसे जुड़े जल निकासी मार्ग ग्रामीण क्षेत्रों की खेती और आवागमन को प्रभावित करते हैं.

जलालाबाद सड़क मार्ग से शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, हरदोई, बरेली और रोहिलखंड तथा मध्य उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों से जुड़ा है. शाहजहांपुर यहां से करीब 45 किलोमीटर दूर है. तिलहर लगभग 40 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है. फर्रुखाबाद की दूरी करीब 65 किलोमीटर और हरदोई की दूरी करीब 75 किलोमीटर है. बरेली लगभग 95 किलोमीटर दूर है, जबकि लखनऊ की सड़क दूरी करीब 200 किलोमीटर है. नई दिल्ली की दूरी लगभग 300 किलोमीटर है. रामगंगा नदी और आसपास के कृषि क्षेत्र की निकटता ने ऐतिहासिक रूप से जलालाबाद को स्थानीय व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित होने में मदद की है.

2009 के बाद यहां हुए सात प्रमुख चुनावों में समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच मुकाबला बराबरी का रहा है. दोनों दलों ने तीन-तीन बार जीत या बढ़त हासिल की है. पिछले तीन विधानसभा चुनावों में तीन अलग-अलग दलों ने जीत दर्ज की है. वहीं पिछले दो लोकसभा चुनावों में दो अलग-अलग दलों ने इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाई है. 2024 का लोकसभा चुनाव परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि विधानसभा में भाजपा के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बावजूद लोकसभा चुनाव में उसे चुनौती दी जा सकती है.

2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 2022 की जीत के आधार पर मैदान में उतर सकती है. वहीं समाजवादी पार्टी के पास भी इस सीट को दोबारा जीतने का आधार मौजूद है. 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी जीत ने दिखाया कि विपक्ष अपने समर्थन को एकजुट करके भाजपा को चुनौती दे सकता है. 2027 के चुनाव का परिणाम उम्मीदवारों के चयन, मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने की क्षमता और विभिन्न सामाजिक समूहों के समर्थन पर निर्भर कर सकता है. कई वर्षों से अलग-अलग दलों के बीच बदलता रहा जलालाबाद एक बार फिर कड़े राजनीतिक मुकाबले के लिए तैयार दिखाई देता है.

(अजय झा)

और पढ़ें
छोटा करें
Advertisement

जलालाबाद विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Hari Prakash Verma

BJP
वोट99,609
विजेता पार्टी का वोट %46 %
जीत अंतर %2.1 %

जलालाबाद विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Neeraj (kushwaha) Maurya

    SP

    95,037
  • Anuruddh Singh

    BSP

    16,057
  • Santram Singh Chauhan

    AAAP

    1,301
  • Gurmeet Kaur

    INC

    1,260
  • Nota

    NOTA

    1,258
  • Alok Kumar Sharma

    IND

    893
  • Alok Yadav

    IND

    793
  • Sanjeev Kumar

    IND

    480
WINNER

Sharadvir Singh

SP
वोट75,326
विजेता पार्टी का वोट %36.2 %
जीत अंतर %4.5 %

जलालाबाद विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Manoj Kashyap

    BJP

    66,029
  • Neeraj Kushwaha Maurya

    BSP

    58,337
  • Nota

    NOTA

    1,614
  • Amit Priyadarshi Rajput

    RLD

    1,306
  • Asha Ram

    IND

    1,281
  • Ram Prakash

    BSRD

    1,175
  • Mohd. Akil

    BMUP

    1,149
  • Bharat Bhushan

    IND

    1,065
  • Jay Shree

    LD

    621
  • Jagpal

    RVNP

    429
Advertisement

जलालाबाद विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में जलालाबाद में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के जलालाबाद विधानसभा चुनाव सीट पर Hari Prakash Verma को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

जलालाबाद विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

Advertisement