कोरा जहानाबाद उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की बिंदकी तहसील में स्थित एक नगर पंचायत है. स्थानीय स्तर पर इस शहर को आमतौर पर जहानाबाद के नाम से ही जाना जाता है. यह आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थानीय बाजार और वाणिज्यिक केंद्र है तथा इसी के नाम पर विधानसभा क्षेत्र का नाम रखा गया है.
जहानाबाद एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और फतेहपुर लोकसभा सीट के छह विधानसभा खंडों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इसकी सीमाओं का पुनर्गठन किया गया. अब इसमें बिंदकी उपखंड के अंतर्गत आने वाले अमौली, टप्पाजार, पपरेंदा, जहानाबाद और खजुहा के कानूनगो सर्किल के साथ कोरा जहानाबाद नगर पंचायत शामिल है. इसके कारण इस विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है, जबकि कोरा जहानाबाद कस्बा इसका एक छोटा शहरी हिस्सा है.
उत्तर प्रदेश में अब तक हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में जहानाबाद की भागीदारी रही है. कांग्रेस ने यह सीट छह बार जीती है, हालांकि 1985 के बाद पार्टी को यहां कोई जीत नहीं मिली. जनता दल ने 1989 से 1993 के बीच लगातार तीन कार्यकाल तक इस सीट पर कब्जा बनाए रखा. बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने दो-दो बार यह सीट जीती है, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, अपना दल (सोनेलाल) और भाजपा ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
2012 में समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर फिर से कब्जा कर लिया, जिसे उसने 2007 में बसपा के हाथों गंवा दिया था. सपा उम्मीदवार मदन गोपाल वर्मा ने बसपा के समीर त्रिवेदी को 36,211 वोटों से हराया. 2012 में बेहद खराब प्रदर्शन के बाद भाजपा ने 2017 में जहानाबाद सीट अपने क्षेत्रीय सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) को दे दी. 2012 में भाजपा की जमानत जब्त हो गई थी, उसे केवल 2.41 प्रतिशत वोट मिले थे और वह काफी अंतर से पांचवें स्थान पर रही थी. यह फैसला सफल रहा, क्योंकि अपना दल (एस) के जय कुमार सिंह जैकी ने समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक मदन गोपाल वर्मा को 47,606 वोटों से हरा दिया.
सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे की व्यवस्था के तहत भाजपा ने 2022 में जहानाबाद सीट पर चुनाव लड़ा. उसके उम्मीदवार राजेंद्र सिंह पटेल को 78,503 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के मदन गोपाल वर्मा को 60,311 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 18,192 वोटों से जीत दर्ज की.
लोकसभा चुनावों के दौरान जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला बंटा हुआ रहा है. 2009 के बाद हुए चार लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों ने दो-दो बार बढ़त हासिल की है. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बसपा पर 17,678 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में भाजपा ने पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने के बाद दोनों दलों को पीछे छोड़ दिया और बसपा पर 65,621 वोटों की बढ़त हासिल की, जबकि समाजवादी पार्टी तीसरे स्थान पर खिसक गई. 2019 में भाजपा ने अपनी बढ़त बरकरार रखी. उस समय उसने बसपा पर 47,656 वोटों की बढ़त बनाई थी, जिसने समाजवादी पार्टी के सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ा था. 2024 के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपना सहयोगी बदलकर कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया. यह फैसला सफल रहा, क्योंकि फतेहपुर लोकसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार नरेश चंद्र उत्तम पटेल को 89,210 वोट मिले, जबकि भाजपा की प्रतिद्वंद्वी निरंजन ज्योति, जिन्हें साध्वी निरंजन ज्योति के नाम से जाना जाता है, को 81,050 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 8,160 वोटों की बढ़त हासिल की.
जहानाबाद में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 283,309 से बढ़कर 2017 में 296,282 और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 299,751 हो गई. 2022 में यह संख्या 312,775 थी, जबकि 2024 में बढ़कर 317,334 हो गई. विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में कथित तौर पर 281,332 मतदाता दर्ज थे. यह 2024 के आंकड़े से 36,002 कम है, यानी इसमें 11.34 प्रतिशत की कमी आई है.
यहां मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और लोकसभा चुनावों में मतदान अपेक्षाकृत कम रहा है. 2012 में मतदान प्रतिशत 62.73 था, जो 2017 में घटकर 61.26 प्रतिशत रह गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह और गिरकर 57.74 प्रतिशत हो गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 61.38 प्रतिशत पहुंच गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत घटकर 58.20 रह गया.
जहानाबाद हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी लगभग 9.80 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी अनुमानित 19.83 प्रतिशत है. अन्य प्रमुख समुदायों में कुर्मी, निषाद, ब्राह्मण, क्षत्रिय और यादव शामिल हैं. इनके अलावा अन्य पिछड़ी जातियों के समूह भी यहां रहते हैं. अनुमान के अनुसार, ग्रामीण मतदाता कुल आबादी का 93.89 प्रतिशत हैं, जबकि कोरा जहानाबाद कस्बे की शहरी आबादी शेष 6.11 प्रतिशत है.
कोरा जहानाबाद एक पुरानी बस्ती है, जिसका इतिहास व्यापक कोरा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. परंपरागत रूप से इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अरगल के राजाओं के अधिकार में था और यह कन्नौज राज्य का हिस्सा रहा था. प्रारंभिक मध्यकाल के दौरान यह दिल्ली सल्तनत और जौनपुर सल्तनत के शासकों सहित विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियों के अधीन रहा. अकबर के शासनकाल में वर्तमान फतेहपुर जिले का पश्चिमी हिस्सा कोरा सरकार का हिस्सा था, जबकि पूर्वी भाग का प्रशासन कर्रा के माध्यम से संचालित होता था. व्यापक क्षेत्र में मुगल उत्तराधिकार संघर्षों के दौरान भी कई लड़ाइयां हुईं. इनमें 1659 में खजुआ के पास हुआ युद्ध भी शामिल है, जिसमें औरंगजेब ने अपने भाई शुजा को हराया था.
18वीं सदी में मुगल सत्ता कमजोर होने के बाद इस क्षेत्र में मराठों, फर्रुखाबाद के पठानों और अवध के नवाबों के बीच संघर्ष का दौर शुरू हुआ. अंग्रेजों ने 1801 में फतेहपुर जिले पर अधिकार कर लिया. इसके बाद कोरा जहानाबाद आसपास के दोआब क्षेत्र के गांवों की जरूरतों को पूरा करने वाले एक स्थानीय कृषि और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ. पुराने सड़क नेटवर्क के किनारे स्थित होने के कारण इस बस्ती का बाजार के रूप में महत्व बना रहा.
जहानाबाद सड़क मार्ग से बिंदकी से जुड़ा हुआ है, जो लगभग 22 किलोमीटर दूर है, जबकि फतेहपुर की दूरी करीब 43 किलोमीटर है. कानपुर उत्तर दिशा में लगभग 43 किलोमीटर दूर है, जबकि हमीरपुर करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. प्रयागराज लगभग 150 किलोमीटर, बांदा करीब 100 किलोमीटर और लखनऊ लगभग 110 किलोमीटर दूर है. औंग रेलवे स्टेशन करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित निकटतम रेलवे स्टेशनों में से एक है, जबकि कानपुर सेंट्रल और फतेहपुर रेलवे स्टेशन व्यापक रेल संपर्क उपलब्ध कराते हैं.
2009 के बाद जहानाबाद में हुए सात प्रमुख चुनावों में भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों तीन-तीन बार आगे रही हैं. यदि 2017 के विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) की जीत को एनडीए के खाते में शामिल किया जाए, तो गठबंधन की बढ़त चार चुनावों में रही है. समाजवादी पार्टी ने 2012 में विधानसभा सीट जीती थी और 2009 तथा 2024 के लोकसभा चुनावों में बढ़त हासिल की थी, जबकि भाजपा ने 2022 में विधानसभा सीट जीती और 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनावों में आगे रही. एनडीए को लगातार दो विधानसभा चुनावों में मिली जीत से भी लाभ मिल सकता है, चाहे 2027 में इस सीट पर भाजपा चुनाव लड़े या अपना दल (एस).
हालांकि, समाजवादी पार्टी को 2024 के प्रदर्शन से प्रोत्साहन लेने का कारण मिला है, जब विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के मुकाबले उसकी बढ़त 4.42 प्रतिशत अंक रही थी. लोकसभा चुनाव का परिणाम जरूरी नहीं कि विधानसभा चुनाव में भी जीत में बदल जाए. विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या में दर्ज की गई 11.34 प्रतिशत की कमी भी एक महत्वपूर्ण कारक है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इससे किन दलों या समुदायों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा. हाल के चुनावों में प्रभाव घटने के बावजूद बसपा तीसरे दावेदार के रूप में मौजूद है. एनडीए लगातार विधानसभा चुनावों में मिली जीत के लाभ के साथ मैदान में उतरेगा, लेकिन समाजवादी पार्टी के हालिया संसदीय प्रदर्शन को देखते हुए 2027 में जहानाबाद में कड़ा मुकाबला होने की संभावना है.
(अजय झा)