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फरीदपुर विधानसभा चुनाव 2027 (Faridpur Assembly Election 2027)

फरीदपुर उत्तर प्रदेश के बरेली जिले का एक तहसील स्तरीय कस्बा है, जहां नगर पालिका है और यह फरीदपुर तहसील का मुख्यालय भी है. यह जिले के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है और लंबे समय से अपने पारंपरिक जरदोजी और जरी के काम के लिए जाना जाता है. यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है और आंवला लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा खंडों में से एक

है. ग्रामीण गांवों और एक छोटे शहरी केंद्र के मिश्रण वाला फरीदपुर मुख्य रूप से कृषि आधारित क्षेत्र है.

1956 के परिसीमन आदेश के तहत फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ था. 2008 के परिसीमन के दौरान इसकी सीमाओं का पुनर्गठन किया गया और अब इसमें पूरी फरीदपुर तहसील शामिल है. इसके कारण इस विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.

फरीदपुर में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. यहां मतदाताओं ने अलग-अलग दलों को मौका दिया है और किसी एक पार्टी का लंबे समय तक दबदबा नहीं रहा है. हालांकि भारतीय क्रांति दल, समाजवादी पार्टी और बीजेपी ने दो-दो लगातार कार्यकाल में यह सीट अपने पास रखी है. इस वजह से फरीदपुर की पहचान ऐसे क्षेत्र के रूप में बनी है, जहां मतदाता चुनाव दर चुनाव अपना राजनीतिक रुझान बदलते रहे हैं. सियाराम सागर ने इस सीट का चार बार प्रतिनिधित्व किया, जिसमें एक बार निर्दलीय और तीन बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की, हालांकि वह अपनी किसी भी जीत के बाद सीट बरकरार नहीं रख सके.

बीजेपी ने यह सीट पांच बार जीती है, जिसमें 1962 में उसके पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ की एकमात्र जीत भी शामिल है. समाजवादी पार्टी ने यहां चार बार जीत दर्ज की है और कांग्रेस पार्टी तीन बार विजयी रही है. भारतीय क्रांति दल ने अपने संक्षिप्त राजनीतिक अस्तित्व के दौरान दो बार यह सीट जीती. जनता पार्टी, एक निर्दलीय उम्मीदवार और बहुजन समाज पार्टी ने भी एक-एक बार यहां जीत दर्ज की है.

2012 में सियाराम सागर ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की. उन्होंने बीजेपी के श्याम बिहारी लाल को 16,787 वोटों से हराया. 2017 में नतीजा बदल गया और श्याम बिहारी लाल ने बीजेपी के टिकट पर सियाराम सागर को 24,721 वोटों से हराकर सीट जीत ली. 2019 में सागर के निधन के बाद समाजवादी पार्टी ने 2022 में विजय पाल सिंह को मैदान में उतारा और उन्होंने जीत के बेहद करीब पहुंचकर मुकाबला किया. श्याम बिहारी लाल ने 2,921 वोटों के मामूली अंतर से बीजेपी के लिए सीट बरकरार रखी. उन्हें 2,03,607 डाले गए वोटों में से 92,070 वोट मिले, जबकि विजय पाल सिंह को 89,149 वोट मिले.

लोकसभा चुनावों के दौरान फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी का प्रदर्शन लंबे समय तक मजबूत रहा. हालांकि 2024 में समाजवादी पार्टी ने उसे पीछे छोड़ दिया. 2009 में बीजेपी ने समाजवादी पार्टी पर 6,960 वोटों की बढ़त बनाई थी और 2014 में उसकी बढ़त 30,393 वोटों की थी. 2019 में बहुजन समाज पार्टी पर उसकी बढ़त घटकर 20,644 वोट रह गई थी, जबकि उस चुनाव में बीएसपी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था. 2024 में समाजवादी पार्टी का लंबा इंतजार खत्म हुआ. उसके उम्मीदवार नीरज मौर्य को 96,539 वोट मिले, जबकि बीजेपी के उम्मीदवार धर्मेंद्र कश्यप को 86,144 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने विधानसभा क्षेत्र में 10,395 वोटों की बढ़त हासिल की.

फरीदपुर में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2,67,792 थी, जो 2017 में बढ़कर 3,07,012, 2019 में 3,13,166, 2022 में 3,28,070 और 2024 में 3,40,653 हो गई. मतदान प्रतिशत भी आमतौर पर अपेक्षाकृत ऊंचा रहा है, हालांकि 2024 का लोकसभा चुनाव हाल के वर्षों में पहला ऐसा चुनाव रहा, जब मतदान 60 प्रतिशत से नीचे चला गया. 2012 में मतदान 64.74 प्रतिशत, 2017 में 62.12 प्रतिशत, 2019 के लोकसभा चुनाव में 60.34 प्रतिशत, 2022 के विधानसभा चुनाव में 62.28 प्रतिशत और 2024 के लोकसभा चुनाव में 59.59 प्रतिशत मतदान हुआ.

इस आरक्षित विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी 15.78 प्रतिशत है, हालांकि मुस्लिम मतदाता 21.50 प्रतिशत के साथ उनसे अधिक हैं. यादव, मौर्य, कश्यप और अन्य ओबीसी समूहों की भी यहां उल्लेखनीय मौजूदगी है. इनके अलावा ठाकुर, ब्राह्मण और अन्य छोटे समुदाय भी क्षेत्र में रहते हैं. फरीदपुर की आबादी में 81.43 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 18.57 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. सामाजिक समीकरणों को देखते हुए प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए अपने पारंपरिक वोट बैंक से आगे बढ़कर व्यापक गठबंधन तैयार करना महत्वपूर्ण हो जाता है.

फरीदपुर को पहले पुरा के नाम से जाना जाता था. स्थानीय परंपरा के अनुसार, इसकी स्थापना कठेरिया राजपूतों की एक शाखा ने की थी, जिन्हें 1657 से 1679 के बीच किसी समय बरेली से बाहर कर दिया गया था. बाद में इस स्थान का नाम शेख फरीद के नाम पर फरीदपुर पड़ा, जो रोहिला शक्ति के उदय से पहले बरेली के गवर्नर थे. यह 18वीं शताब्दी तक पुराने करोर परगना का हिस्सा रहा. बाद में उत्तरी हिस्सा अलग परगना बन गया. 19वीं शताब्दी की शुरुआत में अंग्रेजों ने इसे नई तहसील का मुख्यालय बनाया और लगभग 1825 तक इसने पड़ोसी तिसुआ क्षेत्र को भी अपने में शामिल कर लिया था. समय के साथ यह कस्बा जरी कढ़ाई के लिए जाना जाने लगा. आज भी यह पारंपरिक कला स्थानीय परिवारों को रोजगार देने में भूमिका निभाती है.

फरीदपुर उपजाऊ रोहिलखंड के मैदानी क्षेत्र में स्थित है और इसकी अर्थव्यवस्था कृषि तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्र पर काफी निर्भर है. गेहूं, धान, गन्ना, आलू और अन्य मौसमी फसलें स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था का आधार हैं. डेयरी गतिविधियां और छोटे स्तर का व्यापार भी आय के अतिरिक्त स्रोत हैं. कस्बे के पारंपरिक जरी और कढ़ाई के काम ने इसे क्षेत्र के अन्य ग्रामीण केंद्रों से अलग आर्थिक पहचान दी है. बरेली और आंवला-बदायूं क्षेत्र के बीच इसकी स्थिति ने इसे आसपास के गांवों के लिए स्थानीय बाजार और सेवा केंद्र के रूप में विकसित होने में मदद की है.

फरीदपुर की बरेली, बदायूं, आंवला और रोहिलखंड क्षेत्र के अन्य हिस्सों से अच्छी सड़क कनेक्टिविटी है. बरेली से इसकी नजदीकी के कारण लोगों को बड़े शहरी बाजार और रेलवे नेटवर्क तक पहुंच मिलती है. बदायूं और शाहजहांपुर की ओर जाने वाली सड़कें फरीदपुर को पड़ोसी जिलों से जोड़ती हैं. व्यापक क्षेत्र को उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार का भी लाभ मिला है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और मध्य उत्तर प्रदेश की ओर पहुंच बेहतर हुई है.

फरीदपुर बरेली से लगभग 25 किलोमीटर, आंवला से करीब 30 किलोमीटर और बदायूं से लगभग 65 किलोमीटर दूर है. शाहजहांपुर करीब 80 किलोमीटर, जबकि मुरादाबाद लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर है. नई दिल्ली की दूरी मार्ग के अनुसार लगभग 260 किलोमीटर और लखनऊ की दूरी करीब 300 किलोमीटर है. बरेली-बदायूं कॉरिडोर में स्थित होने के कारण फरीदपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरी और व्यावसायिक केंद्रों की पहुंच में है.

बीजेपी ने फरीदपुर में पिछले सात प्रमुख चुनावों में से पांच में जीत या बढ़त हासिल की हो, लेकिन समाजवादी पार्टी से उसकी चुनौती लगातार मजबूत हो रही है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की मामूली जीत के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का आगे निकलना बताता है कि मुकाबला अभी पूरी तरह तय नहीं है. 2020-21 के लंबे किसान आंदोलन का असर, जो विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ हुआ था, उसके बाद हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बीजेपी के प्रदर्शन में गिरावट के रूप में साफ दिखाई दिया, खासकर इस कृषि प्रधान विधानसभा क्षेत्र में. बीजेपी को उम्मीद होगी कि अब किसान आंदोलन बीते समय की बात हो चुका है और किसानों में नाराजगी इतनी कम हो गई है कि वह अपना समर्थन फिर से मजबूत कर सके. फिर भी 2027 में फरीदपुर सीट बरकरार रखने के लिए उसे अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं. 2024 में मिली बढ़त से उत्साहित समाजवादी पार्टी भी जोरदार चुनौती देने की तैयारी करेगी और उम्मीद करेगी कि उसका लोकसभा चुनाव का लाभ विधानसभा चुनाव में भी बना रहे. अगर बीजेपी किसानों के बीच अपना समर्थन फिर से मजबूत करने और गैर-समाजवादी वोटों को एकजुट करने में सफल रहती है, तो वह आगे रह सकती है. वहीं अगर समाजवादी पार्टी 2024 के अपने लाभ को बरकरार रखते हुए उसे व्यापक विधानसभा स्तर के गठबंधन में बदलने में सफल रहती है, तो वह यह सीट दोबारा हासिल कर सकती है. इसलिए 2027 के चुनाव में फरीदपुर किसी भी पक्ष के लिए पूरी तरह सुरक्षित नजर नहीं आता. यहां एक बार फिर करीबी और दिलचस्प मुकाबले की संभावना है, जिसमें नतीजा किसी भी पक्ष के पक्ष में जा सकता है.

(अजय झा)

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फरीदपुर विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Prof. Shyam Bihari Lal

BJP
वोट92,070
विजेता पार्टी का वोट %45.2 %
जीत अंतर %1.4 %

फरीदपुर विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Vijay Pal Singh

    SP

    89,149
  • Shalini Singh

    BSP

    14,478
  • Amish Sagar

    LD

    1,759
  • Vishal Sagar

    INC

    1,744
  • Nota

    NOTA

    1,532
  • Mahendra

    IND

    837
  • Priyanka Kumari

    IND

    582
  • Sushil Kumar Gautam

    BMUP

    359
  • Suneeta Singh

    IND

    355
  • Janak Prasad

    AAAP

    347
  • Ulfat

    JaSSP

    226
  • Prempal Sagar

    VIP

    169
WINNER

Dr. Shyam Bihari Lal

BJP
वोट83,656
विजेता पार्टी का वोट %44 %
जीत अंतर %13 %

फरीदपुर विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Dr. Siya Ram Sagar

    SP

    58,935
  • Vijay Pal Singh

    BSP

    37,680
  • Poonam Sen

    RLD

    3,075
  • Shalini Singh

    IND

    1,927
  • Nota

    NOTA

    1,831
  • Vijendra Pal

    LD

    1,208
  • Ulfat Singh Katheriya

    JASSP

    990
  • Daulat Ram

    PECP

    907
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फरीदपुर विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में फरीदपुर में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के फरीदपुर विधानसभा चुनाव सीट पर Prof. Shyam Bihari Lal को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

फरीदपुर विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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