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ददरौल विधानसभा चुनाव 2027 (Dadraul Assembly Election 2027)

ददरौल उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले का एक छोटा ब्लॉक स्तरीय कस्बा और ददरौल विकास खंड का मुख्यालय है. रोहिलखंड के उपजाऊ मैदानी क्षेत्र में स्थित ददरौल के चारों ओर खेती के खेत और गांव हैं तथा यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. शाहजहांपुर शहर के नजदीक होने के बावजूद इस क्षेत्र का ग्रामीण स्वरूप शांत और सरल है तथा यह आसपास के

ग्रामीण इलाकों के लिए स्थानीय प्रशासनिक और बाजार केंद्र के रूप में काम करता है.

1967 के परिसीमन आदेश के तहत स्थापित ददरौल एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और शाहजहांपुर लोकसभा सीट के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन के दौरान इसकी सीमाओं का पुनर्गठन किया गया था. अब इसमें शाहजहांपुर तहसील के ददरौल, मदनापुर, कांट, जमौर और सेहरामऊ दक्षिणी के कानूनगो सर्किल के साथ कांट नगर पंचायत शामिल है, जिससे इसका स्वरूप पूरी तरह ग्रामीण बन गया है.

ददरौल ने 1967 में पहली बार मतदान के बाद से अब तक 16 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है, जिसमें 2024 में हुआ उपचुनाव भी शामिल है. इस विधानसभा क्षेत्र ने आमतौर पर अलग-अलग चुनावी नतीजे दिए हैं और कोई भी दल लंबे समय तक इस सीट पर कब्जा नहीं रख पाया है. कांग्रेस ने तीन अलग-अलग दौर में लगातार दो-दो बार जीत हासिल करते हुए कुल छह बार इस सीट पर जीत दर्ज की है. भाजपा ने 2024 के उपचुनाव सहित तीन बार जीत दर्ज की है, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों और बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा ने दो-दो बार जीत हासिल की है. जनता पार्टी, जनता दल और समाजवादी पार्टी ने भी एक-एक बार इस सीट पर जीत दर्ज की है. व्यक्तिगत स्तर पर राम अवतार मिश्रा सबसे सफल नेता रहे हैं, जिन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चार बार यह सीट जीती.

2012 में समाजवादी पार्टी ने ददरौल सीट पर जीत हासिल की, जब उसके उम्मीदवार राममूर्ति सिंह वर्मा ने बसपा के रिजवान अली को 4,879 वोटों से हराया. मौजूदा बसपा विधायक अवधेश कुमार वर्मा, जिन्होंने 2002 और 2007 में यह सीट जीती थी, उस समय भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में थे, लेकिन वे काफी पीछे रहकर तीसरे स्थान पर रहे. इस नतीजे ने ददरौल के अनिश्चित चुनावी स्वभाव को दिखाया और बसपा की लगातार दो जीत के बाद समाजवादी पार्टी की वापसी कराई.

2017 में भाजपा ने मनवेंद्र सिंह को मैदान में उतारकर ददरौल की राजनीतिक तस्वीर बदल दी. उन्होंने मौजूदा समाजवादी पार्टी विधायक राममूर्ति सिंह वर्मा को 17,398 वोटों से हराया. 2021 में राममूर्ति सिंह वर्मा के निधन के बाद समाजवादी पार्टी ने 2022 के चुनाव में उनके बेटे राजेश कुमार वर्मा को उम्मीदवार बनाया. मनवेंद्र सिंह ने सीट बरकरार रखी, हालांकि उनकी जीत का अंतर घटकर 9,701 वोट रह गया. 2024 में उनके निधन के बाद उसी वर्ष उपचुनाव हुआ. भाजपा ने उनके बेटे अरविंद कुमार सिंह को मैदान में उतारा, जिन्हें सहानुभूति का लाभ मिला और पार्टी की जीत का अंतर बढ़ गया. उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश कुमार वर्मा के 89,177 वोटों के मुकाबले 105,972 वोट हासिल किए और 16,795 वोटों से जीत दर्ज की.

लोकसभा चुनावों में ददरौल विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का धीरे-धीरे बढ़ता प्रभाव भी साफ दिखाई देता है. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बसपा पर 11,322 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई, जब भाजपा तीसरे स्थान से सीधे पहले स्थान पर पहुंची और 41,971 वोटों की बढ़त हासिल की. 2019 में भाजपा ने बसपा पर अपनी बढ़त बढ़ाकर 52,883 वोट कर ली. 2024 में उसकी बढ़त कम हुई, लेकिन फिर भी काफी मजबूत रही. शाहजहांपुर लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार अरुण कुमार सागर ने 106,866 वोट हासिल किए, जबकि समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार ज्योत्सना गोंड को 88,399 वोट मिले. इस तरह भाजपा को इस विधानसभा क्षेत्र में 18,467 वोटों की बढ़त मिली.

ददरौल का मतदाता आधार समय के साथ लगातार बढ़ा है. पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 302,477 से बढ़कर 2017 में 330,219, 2019 में 343,604, 2022 में 356,005 और 2024 में 373,862 हो गई. हालांकि मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और आमतौर पर इसमें गिरावट आई है. 2012 में मतदान 69.81 प्रतिशत था, जो 2017 में घटकर 65.58 प्रतिशत रह गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह और घटकर 60.34 प्रतिशत हो गया, हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 62.99 प्रतिशत पहुंच गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान फिर घटकर 58.89 प्रतिशत रह गया, जो इस अवधि का सबसे कम स्तर था.

ददरौल हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां अनुसूचित जाति की आबादी भी अच्छी संख्या में है. मुस्लिम मतदाता अनुमानित रूप से कुल मतदाताओं का 12.10 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 19.76 प्रतिशत है. बाकी मतदाताओं में ओबीसी और सवर्ण समुदायों का मिश्रण शामिल है. यह विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण है, जहां 94.72 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और केवल 5.28 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती है.

ददरौल शाहजहांपुर जिले के कृषि प्रधान मैदानी इलाके में विकसित हुआ एक सामान्य ग्रामीण कस्बा है, जो स्थानीय प्रशासनिक और बाजार केंद्र के रूप में उभरा. आसपास का क्षेत्र बड़े रोहिलखंड इलाके का हिस्सा रहा, जो 17वीं शताब्दी में मुगल प्रभाव के अधीन आया था. सदियों तक यह क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर रहा और गांवों की अर्थव्यवस्था उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में होने वाली खेती पर टिकी रही. 1813 में ब्रिटिश शासन के दौरान शाहजहांपुर जिला बनने के बाद भी यह क्षेत्र रोहिलखंड के एक सामान्य ग्रामीण इलाके के रूप में बना रहा, जहां कृषि और छोटे स्तर का स्थानीय व्यापार अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार थे.

आज भी ददरौल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है. ब्लॉक में बड़े पैमाने पर खेती योग्य भूमि है और सिंचाई की व्यवस्था भी व्यापक है, जिसमें भूजल सिंचाई का प्रमुख स्रोत है. गेहूं और चावल मुख्य फसलों में शामिल हैं, जबकि अन्य फसलों में धान, बाजरा, मक्का, चना, जौ, दलहन, तिलहन, गन्ना और आलू शामिल हैं. कृषि आधारित अर्थव्यवस्था स्थानीय व्यापार, परिवहन, छोटे प्रसंस्करण केंद्रों और गांव आधारित कई तरह के कारोबार को भी सहारा देती है.

ददरौल के आसपास का भूभाग मुख्य रूप से समतल जलोढ़ मैदानों से बना है और खेती के लिए काफी उपयुक्त है. यह क्षेत्र शाहजहांपुर जिले के व्यापक नहर नेटवर्क से जुड़ी सिंचाई नहरों से लाभ उठाता है. सिंचाई व्यवस्था की शाहजहांपुर शाखा ददरौल और आसपास के ब्लॉकों से होकर जलालाबाद और हरदोई की दिशा में आगे बढ़ती है. सिंचाई की उपलब्धता ने विधानसभा क्षेत्र के बड़े हिस्से में गहन खेती को बनाए रखने में मदद की है.

ददरौल सड़क मार्ग से शाहजहांपुर और आसपास के कस्बों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, हालांकि बड़े परिवहन, व्यापारिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए लोगों को जिला मुख्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है. शाहजहांपुर ददरौल से सड़क मार्ग से करीब 8 किलोमीटर दूर है, जिससे ब्लॉक मुख्यालय जिले के प्रमुख शहरी केंद्र तक आसानी से पहुंच सकता है. सड़क नेटवर्क इस विधानसभा क्षेत्र को तिलहर, कांट, पुवायां और शाहाबाद से जोड़ता है, जबकि शाहजहांपुर के जरिए व्यापक राजमार्ग नेटवर्क तक पहुंच मिलती है.

ददरौल में कोई बड़ा रेलवे स्टेशन नहीं है. शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन इस क्षेत्र का प्रमुख रेल संपर्क केंद्र है, जो ददरौल से करीब 7 से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. रोजा जंक्शन भी स्थानीय रेलवे नेटवर्क का हिस्सा है.

शाहजहांपुर ददरौल से करीब 8 किलोमीटर दूर है, जबकि तिलहर लगभग 20 किलोमीटर और पुवायां करीब 35 किलोमीटर दूर है. हरदोई जिले का शाहाबाद लगभग 30 से 35 किलोमीटर, बरेली करीब 75 से 80 किलोमीटर, फर्रुखाबाद लगभग 70 किलोमीटर और पीलीभीत सड़क मार्ग से करीब 90 किलोमीटर दूर है. लखनऊ लगभग 180 किलोमीटर दूर है, जबकि नई दिल्ली की दूरी करीब 300 किलोमीटर है.

2014 के बाद से ददरौल में भाजपा का रिकॉर्ड मजबूत रहा है. पार्टी ने पिछले तीनों विधानसभा चुनाव जीते हैं और पिछले तीन लोकसभा चुनावों में इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाई है. 2012 के विधानसभा चुनाव में शीर्ष स्थान पर रही समाजवादी पार्टी इसके बावजूद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बनी हुई है. भाजपा की जीत के बावजूद यहां वैसा एकतरफा दबदबा नहीं दिखा है, जैसा कुछ पड़ोसी विधानसभा क्षेत्रों में देखने को मिलता है.

कागज पर 2027 के चुनाव में भाजपा बढ़त के साथ उतरती दिखाई देती है. पार्टी ने 2014 के बाद से इस विधानसभा क्षेत्र में हर बड़ा चुनाव जीता है और मजबूत संगठनात्मक आधार तैयार किया है. फिर भी ददरौल का लंबा चुनावी इतिहास सावधानी बरतने का संकेत देता है. कोई भी दल लंबे समय तक इस सीट पर अपना कब्जा नहीं बनाए रख पाया है और समाजवादी पार्टी ने भी दिखाया है कि अनुकूल राजनीतिक परिस्थितियों में वह मजबूत सामाजिक और चुनावी गठजोड़ तैयार कर सकती है.

समाजवादी पार्टी अभी मुकाबले से बाहर नहीं है. 2024 के विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के मुकाबले उसका वोट प्रतिशत अंतर करीब 7.61 प्रतिशत अंक था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह अंतर लगभग 8.40 प्रतिशत अंक रहा. ये अंतर जरूर महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ऐसे विधानसभा क्षेत्र में विपक्षी दल के लिए इन्हें पाटना असंभव नहीं है, जहां मतदाताओं की राजनीतिक पसंद बदलने का इतिहास रहा है.

इसलिए भाजपा को समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले मजबूत विपक्ष के प्रति सतर्क रहना होगा. दूसरी ओर समाजवादी पार्टी को अपनी रणनीति और संगठन को मजबूत करना होगा, व्यापक स्वीकार्यता वाले उम्मीदवार का चयन करना होगा और उन समुदायों के बीच अपना समर्थन फिर से बनाना होगा, जो 2014 के बाद भाजपा की ओर बढ़े हैं.

मतदान प्रतिशत भी एक महत्वपूर्ण कारक बन सकता है. 2024 के लोकसभा चुनाव में हर 10 में से चार से अधिक पंजीकृत मतदाता मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंचे थे, जबकि विधानसभा चुनाव में भी मतदान प्रतिशत 2012 के स्तर से नीचे रहा है. 2027 में मतदान प्रतिशत में बड़ी बढ़ोतरी मौजूदा चुनावी गणित को बदल सकती है, खासकर अगर अतिरिक्त मतदाता उन इलाकों से ज्यादा मतदान करें, जहां विपक्ष को मजबूत समर्थन प्राप्त है.

(अजय झा)

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ददरौल विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Manvendra Singh

BJP
वोट1,00,957
विजेता पार्टी का वोट %45.1 %
जीत अंतर %4.4 %

ददरौल विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Rajesh Kumar Verma

    SP

    91,256
  • Chandraketu Maurya

    BSP

    21,671
  • Akhilesh Kumar

    IND

    2,014
  • Anil Kumar Bharti

    IND

    1,470
  • Tanveer Khan

    INC

    1,436
  • Nota

    NOTA

    993
  • Surpati

    VPI

    781
  • Pradeep Kumar Singh

    JANADIP

    735
  • Rajeev Singh

    AAAP

    716
  • Jitendra Pal Singh

    LJPRV

    668
  • Ram Rahish

    IND

    421
  • Mukesh

    RMGP

    374
  • Nirmala Gupta

    SHS

    317
  • Pradeep Singh

    RSPS

    246
WINNER

Manvendra Singh

BJP
वोट86,435
विजेता पार्टी का वोट %39.9 %
जीत अंतर %8 %

ददरौल विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Rammurtee Singh Verma

    SP

    69,037
  • Rizwan Ali

    BSP

    50,762
  • Roopa

    CPI

    2,387
  • Nota

    NOTA

    2,383
  • Kuver

    IND

    1,410
  • Pratap Singh

    IND

    1,246
  • Rajendra Prasad

    IND

    971
  • Gur Dayal

    BSRD

    689
  • Omkar Singh Verma

    LD

    687
  • Gur Preet Singh

    IND

    556
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ददरौल विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

ददरौल विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में ददरौल में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के ददरौल विधानसभा चुनाव सीट पर Manvendra Singh को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

ददरौल विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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