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छिबरामऊ विधानसभा चुनाव 2027 (Chhibramau Assembly Election 2027)

छिबरामऊ उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले का तहसील मुख्यालय स्तर का शहर है. वर्ष 1997 में फर्रुखाबाद जिले के विभाजन से कन्नौज जिला बनने के बाद छिबरामऊ को तहसील मुख्यालय बनाया गया. यह आसपास के गांवों के लिए प्रमुख प्रशासनिक और शहरी केंद्र के रूप में काम करता है.

1957 के चुनाव से पहले गठित छिबरामऊ सामान्य वर्ग की विधानसभा सीट है और कन्नौज

लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा खंडों में शामिल है. वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद इसकी सीमाओं में बदलाव किया गया. वर्तमान में इसमें छिबरामऊ और गुरसहायगंज नगर पालिका, सिकंदरपुर, समधन और तालग्राम नगर पंचायत तथा छिबरामऊ, सिकंदरपुर, तालग्राम और गुरसहायगंज के कनूगो सर्किल के बड़ी संख्या में गांव शामिल हैं. इस कारण क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है, हालांकि इसमें शहरी आबादी का भी अच्छा हिस्सा है.

छिबरामऊ ने 1957 में पहली बार मतदान किया था और अब तक 17 विधानसभा चुनाव देख चुका है. यह एक ऐसी सीट रही है जहां अलग-अलग दलों को समय-समय पर जीत मिलती रही है और किसी एक दल का लंबे समय तक प्रभुत्व नहीं रहा. भाजपा यहां छह बार जीत चुकी है. इसमें शुरुआती दौर में उसके पूर्व संगठन भारतीय जनसंघ की दो जीत भी शामिल हैं, जिसके बाद 1977 में उसका जनता पार्टी में विलय हो गया था. समाजवादी पार्टी ने तीन बार, जबकि प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी और कांग्रेस ने दो-दो बार सीट जीती है. जनता पार्टी सेक्युलर और जनता दल ने एक-एक बार जीत दर्ज की. खास बात यह है कि भाजपा की सभी छह जीत ब्राह्मण उम्मीदवारों के माध्यम से हुई हैं, जबकि समाजवादी पार्टी की तीनों जीत यादव उम्मीदवारों के जरिए मिली हैं. इससे सीट के चुनावी समीकरण में जातीय आधार की भूमिका दिखाई देती है. राम प्रकाश त्रिपाठी यहां सबसे अधिक बार जीतने वाले नेताओं में रहे हैं. उन्होंने जनसंघ के उम्मीदवार के रूप में दो बार और बाद में भाजपा के उम्मीदवार के रूप में दो बार सीट जीती.

वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी के अरविंद सिंह यादव ने 2007 में जीती सीट को बरकरार रखा. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के ताहिर हुसैन सिद्दीकी को 2,426 मतों से हराया, जबकि भाजपा की अर्चना पांडे तीसरे स्थान पर रहीं. वर्ष 2017 में अर्चना पांडे ने भाजपा के लिए सीट जीती और ताहिर हुसैन सिद्दीकी दूसरे स्थान पर रहे. उन्होंने 37,224 मतों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि मौजूदा समाजवादी पार्टी विधायक अरविंद सिंह यादव तीसरे स्थान पर रहे. वर्ष 2022 में भाजपा ने सीट बरकरार रखी, लेकिन मुकाबला बेहद करीबी रहा. अर्चना पांडे को 1,24,773 मत मिले, जबकि अरविंद सिंह यादव को 1,23,662 मत प्राप्त हुए. भाजपा की जीत का अंतर केवल 1,111 मत रहा.

कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों के विपरीत, जहां लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत दिखाई देता है, छिबरामऊ में लोकसभा चुनाव के आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं. यहां भाजपा अब तक लोकसभा चुनाव में पहले स्थान पर नहीं पहुंची है. इसका एक प्रमुख कारण कन्नौज लोकसभा सीट से मुलायम सिंह यादव परिवार के उम्मीदवारों की मौजूदगी रही है. वर्ष 2009 में समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी पर 35,040 मतों की बढ़त बनाई. वर्ष 2014 में समाजवादी पार्टी की बढ़त घटकर 23,633 मत रह गई और भाजपा दूसरे स्थान पर आ गई. वर्ष 2019 में यह अंतर और घटकर 11,741 मत रह गया. वर्ष 2024 में समाजवादी पार्टी ने अपनी बढ़त को फिर मजबूत किया. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज लोकसभा उम्मीदवार अखिलेश यादव को 1,61,107 मत मिले, जबकि भाजपा के सुब्रत पाठक को 1,09,631 मत प्राप्त हुए. इस तरह इस विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को 51,476 मतों की बढ़त मिली.

छिबरामऊ में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी. वर्ष 2012 में यहां 3,89,276 मतदाता थे, जो 2017 में बढ़कर 4,22,147 हो गए. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या 4,35,464 थी. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या 4,64,772 और 2024 में 4,80,187 हो गई. वर्ष 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर 3,81,397 रह गई. वर्ष 2024 की तुलना में 98,790 मतदाताओं की कमी हुई. यह 20.57 प्रतिशत की कमी है.

मतदान प्रतिशत मध्यम से ऊंचे स्तर के बीच रहा है. लोकसभा चुनावों में मतदान विधानसभा चुनावों की तुलना में कुछ कम रहा. वर्ष 2012 में मतदान प्रतिशत 57.69 रहा, जो 2017 में बढ़कर 63.82 प्रतिशत हो गया. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 58.56 प्रतिशत रहा. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान 60.82 प्रतिशत तक पहुंचा और 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर घटकर 59.60 प्रतिशत रह गया.

छिबरामऊ हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी भी उल्लेखनीय है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम आबादी 18.80 प्रतिशत और अनुसूचित जाति की आबादी 16.47 प्रतिशत थी. अन्य प्रमुख सामाजिक समूहों में यादव, ब्राह्मण, शाक्य, लोधी, पाल, कटियार और क्षत्रिय शामिल हैं. हाल के विधानसभा क्षेत्र स्तर के अनुमानों के अनुसार यादव सबसे बड़ा सामाजिक समूह है और उसकी आबादी करीब एक-पांचवां हिस्सा है. ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 13 से 14 प्रतिशत मानी जाती है. इसके बाद शाक्य, लोधी, पाल और कटियार समुदायों की उल्लेखनीय मौजूदगी है. क्षेत्र की 73.54 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, जबकि 26.46 प्रतिशत आबादी छिबरामऊ, गुरसहायगंज, सिकंदरपुर, समधन और तालग्राम के शहरी क्षेत्रों में रहती है.

छिबरामऊ गंगा-यमुना दोआब का एक पुराना शहर है. करीब 1595 के आसपास तैयार आईन-ए-अकबरी में इसका उल्लेख कन्नौज सरकार के अंतर्गत एक महाल के रूप में मिलता है. उस समय यहां से पर्याप्त राजस्व मिलने का उल्लेख है और मुगल सेना के लिए सैनिक उपलब्ध कराने की भी अपेक्षा की जाती थी. इससे अकबर के शासनकाल में इसकी प्रशासनिक भूमिका का पता चलता है. 18वीं शताब्दी की शुरुआत में फर्रुखाबाद के नवाब मुहम्मद खान बंगश ने यहां मुहम्मदगंज नाम का नया इलाका बसाया और वहां एक अच्छी सराय बनवाई. बाद में ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित होने के कारण शहर का व्यापारिक विकास हुआ.

छिबरामऊ और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और व्यापार पर निर्भर है. शहर आसपास के गांवों के लिए बाजार और सेवा केंद्र की भूमिका निभाता है. कन्नौज, एटा और फर्रुखाबाद के बीच स्थित होने के कारण यहां लंबे समय से व्यापारिक गतिविधियां होती रही हैं.

पुरानी ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित होने के कारण छिबरामऊ का सड़क संपर्क महत्वपूर्ण है. यह शहर कन्नौज, फर्रुखाबाद, एटा, मैनपुरी और कानपुर से सड़क मार्ग से जुड़ा है. गुरसहायगंज रेलवे स्टेशन आसपास के क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोड़ता है. छिबरामऊ और गुरसहायगंज के शहरी क्षेत्र आसपास के गांवों के लिए व्यापार और परिवहन केंद्र के रूप में काम करते हैं. गंगा नदी छिबरामऊ से करीब 25 किलोमीटर दूर है, जबकि काली नदी शहर के अपेक्षाकृत नजदीक बहती है.

छिबरामऊ सड़क मार्ग से कन्नौज से करीब 40 किलोमीटर, कानपुर से करीब 115 से 120 किलोमीटर और आगरा से करीब 145 से 150 किलोमीटर दूर है. लखनऊ की दूरी लगभग 160 किलोमीटर है.

पिछले सात प्रमुख चुनावों का आंकड़ा देखें तो समाजवादी पार्टी के खाते में पांच और भाजपा के खाते में दो जीत दर्ज हुई हैं. हालांकि यह आंकड़ा कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को पूरी तरह स्पष्ट नहीं करता. वर्ष 2012 की जीत के बाद समाजवादी पार्टी वर्तमान स्वरूप वाली विधानसभा सीट पर दोबारा जीत दर्ज नहीं कर सकी है, जबकि 2009 के बाद हुए सभी चार लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी आगे रही है. वर्ष 2009 और 2024 में अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रहे, जबकि 2014 और 2019 में उनकी पत्नी डिंपल यादव ने कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. कन्नौज लोकसभा सीट पर यादव परिवार की लगातार चुनावी मौजूदगी और विधानसभा चुनावों के अलग परिणाम यह संकेत देते हैं कि छिबरामऊ में लोकसभा मतदान पर परिवार की व्यक्तिगत लोकप्रियता का प्रभाव रहा है. इसे विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की ताकत का सीधा प्रतिबिंब नहीं माना जा सकता.

वर्ष 2024 में छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर करीब 18 प्रतिशत की बढ़त बनाई. यह बढ़त 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण आधार हो सकती है. हालांकि विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड अलग तस्वीर दिखाता है. मौजूदा स्वरूप में सीट के पुनर्गठन के बाद समाजवादी पार्टी ने केवल एक बार जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा लगातार दो विधानसभा चुनाव जीत चुकी है. वर्ष 2022 में भाजपा की जीत का अंतर केवल 1,111 मत रहा था, जिससे दोनों दलों के बीच करीबी मुकाबले का संकेत मिलता है.

भाजपा के लिए छिबरामऊ के लोकसभा चुनाव परिणामों को अकेले आधार बनाकर विधानसभा स्थिति को समझना पर्याप्त नहीं होगा. विधानसभा में उसकी स्थिति पिछले दो चुनावों की जीत के कारण मजबूत रही है, लेकिन 2022 का बेहद कम अंतर और 2024 में समाजवादी पार्टी की बड़ी बढ़त चुनावी समीकरण को महत्वपूर्ण बनाती है. वर्ष 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या 2024 के 4,80,187 से घटकर 3,81,397 हो गई है. इस बदलाव ने विधानसभा क्षेत्र के चुनावी आंकड़ों में एक नया पहलू जोड़ा है. छिबरामऊ का राजनीतिक रिकॉर्ड इसे एक प्रतिस्पर्धी विधानसभा सीट के रूप में प्रस्तुत करता है, जहां भाजपा के पास लगातार दो विधानसभा चुनावों की जीत है, जबकि समाजवादी पार्टी के पास हाल के लोकसभा चुनाव में मिली बड़ी बढ़त का आधार मौजूद है.

(अजय झा)

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छिबरामऊ विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Archana Pandey

BJP
वोट1,24,773
विजेता पार्टी का वोट %44.3 %
जीत अंतर %0.4 %

छिबरामऊ विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Arvind Singh Yadav

    SP

    1,23,662
  • Waheeda Bano Urf Juhi Sultan

    BSP

    22,000
  • Mohd Chandan

    JANADIP

    4,574
  • Nota

    NOTA

    1,775
  • Sanjay

    IND

    1,282
  • Vijay Kumar

    INC

    1,194
  • Nurul Shams

    IND

    525
  • Dr Chandra Kant Yadav

    AAAP

    470
  • Imran Vegam

    IND

    308
  • Ankit Kumar Pal

    RSPS

    235
  • Amol Dixit

    IND

    231
  • Mohd. Kamar

    IND

    196
  • Arjuman

    BMUP

    189
  • Laloo Yadav

    VPI

    183
WINNER

Archana Pandey

BJP
वोट1,12,209
विजेता पार्टी का वोट %41.8 %
जीत अंतर %13.9 %

छिबरामऊ विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Tahir Hussain Siddiqui

    BSP

    74,985
  • Arvind Singh

    SP

    72,663
  • Nota

    NOTA

    1,861
  • Meera Devi

    IND

    1,287
  • Taskeen

    IND

    989
  • Umesh Chandra

    IND

    968
  • Sanjeev Kumar

    IND

    837
  • Umashankar

    MNVP

    612
  • Vivek Kumar

    JAM

    570
  • Rajesh Kumar Singh

    BSRD

    523
  • Ashish

    IND

    500
  • Kusum

    BMUP

    292
  • Archana

    IND

    263
  • Surendra Singh

    SDU

    195
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छिबरामऊ विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में छिबरामऊ में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के छिबरामऊ विधानसभा चुनाव सीट पर Archana Pandey को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

छिबरामऊ विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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