बिंदकी उत्तर प्रदेश के दोआब क्षेत्र में फतेहपुर जिले का एक नगरपालिका शहर और बिंदकी तहसील का मुख्यालय है. गंगा और यमुना नदियों के बीच स्थित यह शहर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक, वाणिज्यिक और कृषि केंद्र के रूप में कार्य करता है.
बिंदकी के नाम पर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है, जो 1962 से अस्तित्व
में है. यह फतेहपुर लोकसभा सीट के छह विधानसभा खंडों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इसमें बिंदकी तहसील के जोनिहा, बिंदकी और मलवां के कानूनगो सर्किल तथा बिंदकी नगर पालिका परिषद के साथ फतेहपुर तहसील का कांधी कानूनगो सर्किल शामिल है. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है, जिसमें बिंदकी शहर का शहरी हिस्सा अपेक्षाकृत छोटा है.
बिंदकी में इसकी स्थापना के बाद से अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. कांग्रेस पार्टी ने यह सीट चार बार जीती है, हालांकि 1980 के बाद उसे यहां कोई जीत नहीं मिली. भाजपा और बहुजन समाज पार्टी ने तीन-तीन बार इस सीट पर कब्जा किया है. जनता दल ने दो बार जीत हासिल की, जबकि भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, भारतीय लोक दल और अपना दल (सोनेलाल) ने एक-एक बार यह सीट जीती है. बिंदकी में मतदाताओं का राजनीतिक रुझान अक्सर बदलता रहा है. पहले तीन चुनावों में कांग्रेस की लगातार तीन जीत को छोड़कर किसी भी पार्टी को लंबे समय तक जनादेश नहीं मिला है, जिससे यह सीट एक स्विंग सीट बन गई है.
बिंदकी में इसकी स्थापना के बाद से अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. कांग्रेस ने यह सीट चार बार जीती है, हालांकि 1980 के बाद उसे यहां कोई जीत नहीं मिली. भाजपा और बहुजन समाज पार्टी ने तीन-तीन बार इस सीट पर कब्जा किया है. जनता दल ने दो बार जीत हासिल की, जबकि भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, भारतीय लोक दल और अपना दल (सोनेलाल) ने एक-एक बार यह सीट जीती है. बिंदकी में मतदाताओं का राजनीतिक रुझान अक्सर बदलता रहा है. पहले तीन चुनावों में कांग्रेस की लगातार तीन जीत को छोड़कर किसी भी पार्टी को लंबे समय तक जनादेश नहीं मिला है, जिससे यह सीट एक स्विंग सीट बन गई है.
2012 में बसपा के सुखदेव प्रसाद वर्मा ने लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर भाजपा के राजेंद्र सिंह पटेल को 7,962 वोटों से हराया. 2017 में भाजपा ने करण सिंह पटेल को उम्मीदवार बनाया. यह बदलाव पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हुआ और उन्होंने समाजवादी पार्टी के रामेश्वर दयाल को 56,378 वोटों से हराया. इस बड़ी जीत के बावजूद करण सिंह पटेल को इस सीट से दोबारा चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला, क्योंकि 2022 में बिंदकी सीट भाजपा की क्षेत्रीय सहयोगी अपना दल (एस) को दे दी गई. अपना दल (एस) के जय कुमार सिंह जैकी, जिन्होंने 2017 में पड़ोसी जहानाबाद सीट जीती थी, दोनों सहयोगी दलों के बीच सीटों की अदला-बदली के तहत बिंदकी आ गए. उन्होंने 78,165 वोट हासिल करके जीत दर्ज की, जबकि रामेश्वर दयाल को 74,368 वोट मिले. जीत का अंतर 3,797 वोट रहा.
लोकसभा चुनावों के दौरान बिंदकी विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं का फैसला बंटा हुआ रहा है. 2009 के बाद हुए चुनावों में समाजवादी पार्टी और भाजपा ने दो-दो बार बढ़त हासिल की है. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बसपा पर 10,386 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में भाजपा ने पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने के बाद दोनों दलों को पीछे छोड़ दिया और बसपा पर 37,778 वोटों की बढ़त हासिल की. इस दौरान समाजवादी पार्टी तीसरे स्थान पर खिसक गई. 2019 में भी भाजपा ने अपनी बढ़त बरकरार रखी. उस चुनाव में भाजपा ने बसपा पर 38,618 वोटों की बढ़त बनाई, जो समाजवादी पार्टी की सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ रही थी. 2024 के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपना सहयोगी बदलकर कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया. यह फैसला उसके लिए फायदेमंद साबित हुआ. फतेहपुर से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नरेश चंद्र उत्तम पटेल को 86,163 वोट मिले, जबकि भाजपा की निरंजन ज्योति, जिन्हें साध्वी निरंजन ज्योति के नाम से जाना जाता है, को 77,002 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 9,161 वोटों की बढ़त हासिल की.
बिंदकी में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 286,224 से बढ़कर 2017 में 297,115 और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 301,593 हो गई. 2022 में यह संख्या 313,978 थी, जबकि 2024 में बढ़कर 320,036 हो गई. विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में कथित तौर पर 289,520 मतदाता थे. यह 2024 के आंकड़े से 30,516 कम है, यानी इसमें 9.54 प्रतिशत की कमी आई है.
मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, हालांकि विधानसभा चुनावों में भागीदारी अधिक रही है. 2012 में मतदान प्रतिशत 61.48 था, जो 2017 में बढ़कर 61.92 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 58.35 प्रतिशत रह गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 61.01 प्रतिशत हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत फिर घटकर 57.68 रह गया.
बिंदकी हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है. यहां मुस्लिम आबादी लगभग 15 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी अनुमानित 27.51 प्रतिशत है. अन्य प्रमुख समुदायों में कुर्मी, लोध, ब्राह्मण, क्षत्रिय, यादव और जाटव शामिल हैं. इनके अलावा अन्य पिछड़ी जातियों के समूह भी यहां रहते हैं. अनुमान के अनुसार, ग्रामीण मतदाता कुल आबादी का 91.43 प्रतिशत हैं, जबकि बिंदकी शहर का शहरी हिस्सा शेष 8.57 प्रतिशत है.
1857 के विद्रोह के इतिहास में बिंदकी का महत्वपूर्ण स्थान है. 28 अप्रैल 1858 को ब्रिटिश सेना ने बिंदकी तहसील के खजुहा के पास एक इमली के पेड़ से स्थानीय विद्रोही नेता ठाकुर जोधा सिंह अटैया सहित 52 भारतीय क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया था. इस स्थान को बावनी इमली के नाम से जाना जाने लगा, जिसका नाम वहां फांसी पर चढ़ाए गए 52 लोगों की याद में रखा गया. बताया जाता है कि उनके शव 37 दिनों तक पेड़ से लटके रहे, ताकि स्थानीय आबादी को चेतावनी दी जा सके. इस स्थान पर मौजूद पेड़ और स्मारक आज भी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रतिरोध के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं.
बिंदकी की अर्थव्यवस्था आसपास के गांवों की कृषि और उनसे जुड़े व्यापार पर निर्भर करती है. यहां के बाजार आसपास के ग्रामीण लोगों की जरूरतों को पूरा करते हैं. फतेहपुर और कानपुर के बीच स्थित होने के कारण यह शहर दो महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्रों से जुड़ा हुआ है. बिंदकी रोड रेलवे स्टेशन शहर से लगभग 8 किलोमीटर दूर है और रेल नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करता है, जबकि फतेहपुर रेलवे स्टेशन भी एक अन्य विकल्प है. सड़क मार्ग से फतेहपुर लगभग 35 किलोमीटर और कानपुर करीब 50 किलोमीटर दूर है. बांदा की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है, जबकि लखनऊ करीब 120 किलोमीटर दूर है. दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित प्रयागराज यहां से लगभग 160 किलोमीटर दूर है.
बिंदकी के चुनावी रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2009 के बाद हुए सात प्रमुख चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों का पलड़ा भारी रहा है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने दो विधानसभा चुनाव जीते हैं और दो लोकसभा चुनावों में बढ़त हासिल की है. इसके मुकाबले समाजवादी पार्टी ने दो संसदीय चुनावों में बढ़त बनाई, जबकि बसपा ने 2012 में विधानसभा चुनाव जीता था. हालांकि, हाल के नतीजे बताते हैं कि समाजवादी पार्टी सत्तारूढ़ गठबंधन को कड़ी चुनौती दे रही है. पार्टी अभी तक बिंदकी विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा पर 4.96 प्रतिशत अंकों की बढ़त उसे उम्मीद देती है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वह अपना दल (एस) से केवल 1.99 प्रतिशत अंकों से पीछे रही थी.
समाजवादी पार्टी जानती होगी कि लोकसभा चुनाव में मिली बढ़त जरूरी नहीं कि विधानसभा चुनाव में जीत में भी बदल जाए. हाल के चुनावों में अपना प्रभाव खोने के बावजूद बसपा भी एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है. विशेष गहन पुनरीक्षण ने एक और नया पहलू जोड़ दिया है, क्योंकि 2024 की मतदाता सूची से कथित तौर पर 30,516 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. राजनीतिक निष्ठा में बदलाव और करीबी मुकाबलों के लिए जानी जाने वाली इस सीट पर मतदाताओं की संख्या में आई इस कमी का प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को हाल के विधानसभा चुनावों में मिली जीत का लाभ है, लेकिन 2024 में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन से संकेत मिलता है कि वह गंभीर चुनौती पेश कर सकती है. 2027 में बिंदकी में एक और कड़ा मुकाबला होने की संभावना है, जिसमें कोई भी पक्ष अपनी जीत को निश्चित नहीं मान सकता.
(अजय झा)