Advertisement

बिधूना विधानसभा चुनाव 2027 (Bidhuna Assembly Election 2027)

बिधूना उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में स्थित एक कस्बा और बिधूना तहसील का मुख्यालय है. 19वीं शताब्दी के मध्य में अंग्रेजों द्वारा इसे परगना के रूप में स्थापित किया गया था और धीरे-धीरे यह एक ग्रामीण बस्ती से प्रशासनिक और बाजार केंद्र के रूप में विकसित हुआ. स्थानीय अर्थव्यवस्था में आज भी कृषि का प्रमुख स्थान है और बिधूना आसपास के बड़ी संख्या में

गांवों के लिए प्रमुख सेवा और व्यापार केंद्र के रूप में काम करता है.

बिधूना विधानसभा क्षेत्र पहले आम चुनाव के समय से अस्तित्व में है. 1952 में यह दो सदस्यीय सीट थी और इसे बिधूना वेस्ट-कम-भरथना नॉर्थ-कम-इटावा नॉर्थ के नाम से जाना जाता था. 1957 से यह एक सदस्यीय विधानसभा क्षेत्र बन गया और तब से बिधूना नाम से ही जारी है. यह एक सामान्य, अनारक्षित सीट है और कन्नौज लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. वर्तमान सीमाएं 2008 के परिसीमन आदेश के तहत तय की गई थीं और पहली बार 2012 के चुनाव में लागू हुईं. इसमें पूरा बिधूना नगर पंचायत क्षेत्र तथा बिधूना तहसील के अरवाकटरा, सहायल और बिधूना कानूनगो सर्किल शामिल हैं, जिससे इसका स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.

1957 में अलग विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद से बिधूना में 18 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें 2009 का उपचुनाव भी शामिल है. शुरुआत से ही यहां मिश्रित चुनावी परिणाम देखने को मिले हैं और किसी भी पार्टी का लंबे समय तक लगातार कब्जा नहीं रहा है. समाजवादी पार्टी ने यह सीट पांच बार, कांग्रेस ने तीन बार जीती है, जबकि बीजेपी, जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने दो-दो बार जीत दर्ज की है. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय क्रांति दल और जनता दल ने एक-एक बार इस सीट पर जीत हासिल की है.

2009 का उपचुनाव उस समय जरूरी हुआ, जब तत्कालीन समाजवादी पार्टी विधायक धनीराम वर्मा ने बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने के बाद विधानसभा से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद हुए उपचुनाव में बीएसपी ने उनके बेटे डॉ. महेश चंद्र वर्मा को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को 27,284 वोटों से हराया.

समाजवादी पार्टी ने 2012 के चुनाव में प्रमोद कुमार को उम्मीदवार बनाकर सीट वापस हासिल कर ली. बीएसपी ने अपने मौजूदा विधायक महेश चंद्र वर्मा को दोबारा टिकट नहीं दिया और प्रमोद कुमार ने पार्टी के नए उम्मीदवार देवेश कुमार को 18,106 वोटों से हराया. बीजेपी, जो इस चुनाव में मामूली अंतर से तीसरे स्थान पर रही थी, 2017 में आगे बढ़कर सीट जीतने में सफल रही. उसके उम्मीदवार विनय शाक्य ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार दिनेश कुमार वर्मा को 3,910 वोटों से हराया. 2022 में समाजवादी पार्टी ने रेखा वर्मा को उम्मीदवार बनाया और सीट वापस हासिल कर ली. रेखा वर्मा को 97,257 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार रिया शाक्य को 89,492 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 7,765 वोटों के बहुमत से जीत दर्ज की.

बिधूना के चुनावों की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि प्रमुख राजनीतिक दलों ने, जानबूझकर या परिस्थितियों के कारण, उम्मीदवारों में लगातार बदलाव करके सीट के बदलते राजनीतिक रुझान के साथ तालमेल बिठाया है. उदाहरण के लिए, बीजेपी के 2017 के विजेता विनय शाक्य ने बाद में पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया और 2022 के चुनाव से पहले पार्टी बदल ली.

बिधूना में राजनीतिक निष्ठा में लगातार बदलाव लोकसभा चुनावों में भी दिखाई देता है, जहां विधानसभा क्षेत्र में बढ़त अक्सर एक पार्टी से दूसरी पार्टी के बीच बदलती रही है. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बीएसपी पर 13,679 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में बीजेपी तीसरे स्थान से आगे बढ़कर समाजवादी पार्टी पर 10,422 वोटों की बढ़त बनाने में सफल रही. 2019 में बीजेपी की बढ़त काफी कम होकर केवल 340 वोट रह गई. इसके बाद 2024 में तस्वीर पूरी तरह अलग रही. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और बिधूना विधानसभा क्षेत्र में उन्हें 120,460 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार सुब्रत पाठक को 80,343 वोट मिले. इस तरह इस विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को 40,117 वोटों की बढ़त मिली.

बिधूना में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद कमी आने से पहले लगातार बढ़ती रही. 2012 में यह संख्या 331,702 थी, जो 2017 में बढ़कर 355,368 हो गई और 2019 के लोकसभा चुनाव में 357,938 रही. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर 365,791 हो गया और 2024 में 368,720 तक पहुंच गया. एसआईआर के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 335,627 मतदाता थे. यह 2024 के आंकड़े से 33,093 कम है और इसमें 8.97 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है.

मतदाता मतदान लगातार ऊंचा रहा है, हालांकि इसमें कुछ उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले हैं. 2012 में मतदान 60.39 प्रतिशत था और 2017 में बढ़कर 61.47 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह थोड़ा घटकर 60.56 प्रतिशत रहा और 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 62.69 प्रतिशत हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान मामूली घटकर 61.22 प्रतिशत रहा.

बिधूना एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत कम है. 2011 की जनगणना के अनुसार बिधूना तहसील की आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी लगभग नौ प्रतिशत थी, हालांकि यह तहसील का आंकड़ा है और विधानसभा क्षेत्र का सटीक अनुमान नहीं है. विधानसभा क्षेत्र की आबादी में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी 25.70 प्रतिशत है. सामाजिक संरचना के अनुमानों में यादवों की हिस्सेदारी लगभग 20.60 प्रतिशत, शाक्यों की 17.87 प्रतिशत, जाटवों की 12.10 प्रतिशत, लोधियों की 11.38 प्रतिशत और ब्राह्मणों की 7.82 प्रतिशत बताई जाती है. कठेरिया, कुशवाहा, पाल, ठाकुर, कोरी और अन्य समुदायों की भी यहां मौजूदगी है.

बिधूना की लगभग 93.65 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और केवल 6.35 प्रतिशत आबादी बिधूना कस्बे की सीमा के भीतर रहती है. इस कारण बिधूना का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है. कृषि यहां की प्रमुख आर्थिक गतिविधि है, जिसमें गेहूं, धान, आलू और अन्य फसलों की खेती की जाती है. बिधूना कस्बा स्थानीय बाजार, प्रशासनिक और सेवा केंद्र के रूप में काम करता है.

बिधूना का वर्तमान परगना 1857 में बनाया गया था. इसमें मुख्य रूप से पुराने बेला परगना के क्षेत्र शामिल किए गए थे और फर्रुखाबाद के सकतपुर-ऐरवा से कुछ गांव जोड़े गए थे. यह इटावा और कन्नौज को जोड़ने वाली सड़क पर एक छोटे ग्रामीण प्रशासनिक और बाजार केंद्र के रूप में विकसित हुआ. स्वतंत्रता के बाद के अधिकांश समय में यह क्षेत्र इटावा जिले का हिस्सा रहा. 17 सितंबर 1997 को औरैया और बिधूना तहसीलों को इटावा जिले से अलग कर नया औरैया जिला बनाया गया.

बिधूना की भौगोलिक स्थिति सड़क संपर्क के लिहाज से अधिक महत्वपूर्ण रही है, जबकि रेल संपर्क अपेक्षाकृत सीमित है. कस्बा इटावा और कन्नौज को जोड़ने वाली सड़क पर स्थित है. सड़क मार्ग से इटावा लगभग 55 किलोमीटर और कन्नौज भी लगभग 55 किलोमीटर दूर है. अछल्दा रेलवे स्टेशन बिधूना से करीब 16 किलोमीटर दूर सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जो इसे मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ता है. औरैया लगभग 45 किलोमीटर, भरथना लगभग 35 किलोमीटर, छिबरामऊ करीब 50 किलोमीटर, कानपुर लगभग 105 किलोमीटर और लखनऊ लगभग 155 किलोमीटर दूर है. मैनपुरी लगभग 65 किलोमीटर, जबकि आगरा करीब 160 किलोमीटर और नई दिल्ली लगभग 360 किलोमीटर दूर है. सड़क नेटवर्क बिधूना को इटावा-कन्नौज मार्ग और औरैया, इटावा, कन्नौज तथा मैनपुरी के आसपास के क्षेत्रों से भी जोड़ता है.

बिधूना शायद ही कभी किसी पारंपरिक सुरक्षित सीट की तरह रहा है. पिछले सात प्रमुख चुनावों में समाजवादी पार्टी ने चार और बीजेपी ने तीन चुनाव जीते हैं, लेकिन केवल जीत की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण चुनावों का क्रम है. बीजेपी 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में आगे रही और 2017 में विधानसभा सीट भी जीती, लेकिन 2022 और 2024 में उसे दोनों चुनावों में हार का सामना करना पड़ा. 2019 के लोकसभा चुनाव में बढ़त केवल 340 वोटों की थी, जबकि 2024 में समाजवादी पार्टी को 40,117 वोटों की बढ़त तब मिली, जब अखिलेश यादव खुद कन्नौज लौटे और लोकसभा चुनाव लड़ा. यह 2024 का आंकड़ा महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे आगामी विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानना जरूरी नहीं है. बीजेपी इस तथ्य की ओर भी संकेत कर सकती है कि हाल के चुनावी दौर में वह एक बार समाजवादी पार्टी के प्रभाव को तोड़कर सीट जीत चुकी है.

एसआईआर ने मतदाताओं की संख्या में करीब नौ प्रतिशत की कमी करके एक नया कारक जोड़ दिया है, हालांकि अभी यह स्थापित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं है कि इस कमी से किसी एक पार्टी के समर्थन आधार पर दूसरी पार्टी की तुलना में अधिक असर पड़ा है. बिधूना को दिलचस्प बनाने वाली बात यह है कि इसका चुनावी इतिहास उन लोगों के लिए बहुत कम आधार देता है जो मतदाताओं के किसी एक पक्ष के साथ स्थायी रूप से जुड़े रहने की उम्मीद करते हैं. यह सीट बार-बार एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पास गई है, उम्मीदवारों ने पार्टियां बदली हैं और बहुत छोटे अंतर के बाद भी बड़े चुनावी उलटफेर देखने को मिले हैं. बिधूना में राजनीतिक झुकाव को बदलने के लिए बहुत अधिक प्रोत्साहन की जरूरत कभी नहीं पड़ी और 2027 का चुनाव भी समाजवादी पार्टी तथा बीजेपी दोनों के लिए इसी चुनावी इतिहास की पृष्ठभूमि में शुरू होगा.

(अजय झा)

और पढ़ें
छोटा करें
Advertisement

बिधूना विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Rekha Verma

SP
वोट97,257
विजेता पार्टी का वोट %42.6 %
जीत अंतर %3.4 %

बिधूना विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Riya Shakya

    BJP

    89,492
  • Gaurav Raghuvanshi

    BSP

    32,220
  • Sanjiv Kumar

    JANADIP

    3,927
  • Akhilesh Kumar Tripathi

    IND

    1,107
  • Nota

    NOTA

    1,097
  • Suman Vyas

    INC

    1,086
  • Naveen Verma

    IND

    633
  • Er. Shivam Pal

    RSPS

    533
  • Jitendra Singh

    AAAP

    416
  • Amar Deep

    KMBS

    286
  • Ram Singh

    BSCP

    286
WINNER

Vinay Shakya

BJP
वोट81,905
विजेता पार्टी का वोट %37.5 %
जीत अंतर %1.8 %

बिधूना विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Dinesh Kumar Verma

    SP

    77,995
  • Shiv Prasad Yadav

    BSP

    53,366
  • Nota

    NOTA

    1,270
  • Sanjeev Kumar Shakya

    JAM

    1,147
  • Umakant

    DESP

    964
  • Radhakrishna

    IND

    695
  • Krishnaveer Singh

    IND

    688
  • Laxman Kumar

    JANADIP

    346
Advertisement

बिधूना विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

बिधूना विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में बिधूना में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के बिधूना विधानसभा चुनाव सीट पर Rekha Verma को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

बिधूना विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

Advertisement