भोजपुर गंगा नदी के पास स्थित एक बड़ा गांव है और फर्रुखाबाद जिले की फर्रुखाबाद तहसील का हिस्सा है. इसका इतिहास मध्यकाल से जुड़ा हुआ है. यह एक सामान्य कृषि प्रधान बस्ती है.
1957 के चुनाव से पहले गठित भोजपुर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और फर्रुखाबाद लोकसभा सीट के पांच विधानसभा खंडों में से एक है. शुरुआत में यह केवल 1957 और
1962 के दो विधानसभा चुनावों के लिए अस्तित्व में रहा. इसके बाद इसकी जगह कमालगंज विधानसभा क्षेत्र ने ले ली, जो 1967 से 2007 तक अस्तित्व में रहा. वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद कमालगंज सीट समाप्त कर दी गई और उसकी जगह भोजपुर विधानसभा क्षेत्र को फिर से अस्तित्व में लाया गया. वर्तमान में इसमें भोजपुर, मोहम्मदाबाद और खिमसेपुर के कानूनगो सर्किल तथा मोहम्मदाबाद और कमालगंज नगर पंचायत शामिल हैं. इस कारण इसका स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.
1957 और 1962 के चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी. इसके दोबारा अस्तित्व में आने के बाद यह उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख पार्टियों भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले का क्षेत्र बन गया. वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी के जमालुद्दीन सिद्दीकी ने सीट जीती. उन्होंने जन क्रांति पार्टी के मुकेश राजपूत को 18,629 मतों से हराया. भाजपा तीसरे स्थान पर रही. समाजवादी पार्टी की जीत में भाजपा के मतों के विभाजन की भूमिका रही. भाजपा के बागी नेता कल्याण सिंह द्वारा बनाई गई जन क्रांति पार्टी को 33,021 मत मिले, जबकि भाजपा को 27,953 मत मिले. दोनों दलों को मिलाकर 60,974 मत मिले, जो समाजवादी पार्टी को मिले 51,650 मतों से काफी अधिक थे.
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के भाजपा में वापस आने और जन क्रांति पार्टी के भाजपा में विलय के बाद वर्ष 2017 में भाजपा ने भोजपुर सीट पर जीत दर्ज की. भाजपा के नागेंद्र सिंह राठौर ने तत्कालीन विधायक जमालुद्दीन सिद्दीकी के बेटे और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अरशद जमाल सिद्दीकी को 34,877 मतों से हराया. वर्ष 2022 में दोनों उम्मीदवार फिर आमने सामने आए. भाजपा ने सीट बरकरार रखी. नागेंद्र सिंह राठौर को 99,979 मत मिले, जबकि अरशद जमाल सिद्दीकी को 72,521 मत मिले. जीत का अंतर 27,458 मत रहा.
लोकसभा चुनावों में भी भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के मतदान रुझान दिखाई देते हैं. पिछले चार लोकसभा चुनावों में से तीन में भाजपा इस क्षेत्र में आगे रही है. वर्ष 2009 में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी पर 11,327 मतों की बढ़त बनाई थी, जबकि भाजपा चौथे स्थान पर रही थी. इसके बाद के तीन लोकसभा चुनावों में भाजपा सबसे आगे रही. वर्ष 2014 में भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर 61,821 मतों की बढ़त बनाई. वर्ष 2019 में भाजपा ने बसपा पर 33,383 मतों की बढ़त हासिल की. उस समय समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगी दल बसपा के लिए फर्रुखाबाद लोकसभा सीट छोड़ दी थी.
वर्ष 2024 में समाजवादी पार्टी ने फर्रुखाबाद लोकसभा सीट पर फिर चुनाव लड़ा और भाजपा की बढ़त को काफी कम कर दिया. हालांकि भाजपा इस क्षेत्र में आगे रही. भाजपा के फर्रुखाबाद लोकसभा उम्मीदवार मुकेश राजपूत को 95,243 मत मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नवल किशोर शाक्य को 86,377 मत मिले. इस तरह भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की बढ़त 8,866 मत रही.
भोजपुर में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या वर्षों के दौरान लगातार बढ़ी, लेकिन 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद इसमें बड़ी कमी दर्ज की गई. वर्ष 2012 में मतदाताओं की संख्या 2,87,622 थी, जो 2017 में बढ़कर 3,07,153 हो गई. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या 3,12,199 थी. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या 3,21,402 हो गई. वर्ष 2024 में यह मामूली बढ़ोतरी के साथ 3,23,030 हो गई. विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 2,80,939 मतदाता दर्ज हुए. यह 2024 की संख्या से 42,091 कम है. इसमें 13.03 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई.
मतदान प्रतिशत लगातार रहा है और सामान्य तौर पर ऊंचा रहा है, हालांकि लोकसभा चुनावों में इसमें थोड़ी कमी देखी गई. वर्ष 2012 में मतदान प्रतिशत 59.92 रहा. वर्ष 2017 में यह 61.12 प्रतिशत था. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 59.35 प्रतिशत हो गया. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 61.74 हो गया. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में यह फिर घटकर 59.65 प्रतिशत रहा.
भोजपुर हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी भी महत्वपूर्ण है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम आबादी 15.70 प्रतिशत थी, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी 17.33 प्रतिशत थी. अन्य प्रमुख सामाजिक समूहों में ठाकुर या राजपूत, लोधी, यादव, शाक्य, कुर्मी और ब्राह्मण शामिल हैं. वर्ष 2022 के चुनाव पर आधारित विधानसभा क्षेत्र के अनुमान के अनुसार ठाकुर मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 16.38 प्रतिशत, लोधी 10.42 प्रतिशत, मुस्लिम 11.91 प्रतिशत, जाटव 8.74 प्रतिशत और यादव 7.14 प्रतिशत थे. विधानसभा क्षेत्र की आबादी मुख्य रूप से ग्रामीण है. करीब 90.89 प्रतिशत लोग गांवों में रहते हैं, जबकि 9.11 प्रतिशत आबादी मोहम्मदाबाद और कमालगंज नगर पंचायतों के शहरी इलाकों में रहती है.
स्थानीय परंपरा इस स्थान को मालवा के 11वीं शताब्दी के प्रसिद्ध परमार शासक राजा भोज से जोड़ती है. भारत में कई स्थानों के नाम भी राजा भोज से जुड़े हैं. ऐतिहासिक रूप से यहां एक पुराना किला होने की जानकारी मिलती है. फर्रुखाबाद जिला गजेटियर के अनुसार 13वीं शताब्दी के अंतिम दौर में सुल्तान जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने भोजापुर के किले का दौरा किया था. माना जाता है कि उन्होंने इसके पास गंगा नदी पर एक पुल का निर्माण कराया था. वर्तमान में यह गांव एक सामान्य कृषि प्रधान बस्ती है.
गंगा के आसपास की उपजाऊ जलोढ़ भूमि के कारण कृषि स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है. क्षेत्र में गेहूं, धान, आलू और अन्य फसलों की खेती होती है. पशुपालन और कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियां भी आय के स्रोत हैं. व्यापक फर्रुखाबाद क्षेत्र में छोटे स्तर की कृषि आधारित गतिविधियों के साथ ब्लॉक प्रिंटिंग और जरी के काम जैसी पारंपरिक गतिविधियां भी होती हैं. कमालगंज और मोहम्मदाबाद की निकटता आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए स्थानीय बाजार और व्यापारिक केंद्र उपलब्ध कराती है.
गंगा के पास स्थित होने के कारण भोजपुर विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां गांव गंगा नदी और फर्रुखाबाद तहसील के अंदरूनी हिस्सों के बीच फैले कृषि क्षेत्र में स्थित हैं. कमालगंज स्थानीय परिवहन और बाजार का एक महत्वपूर्ण केंद्र है. मोहम्मदाबाद भी विधानसभा क्षेत्र का एक प्रमुख शहरी इलाका है. यह क्षेत्र सड़क मार्ग से फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ शहरी क्षेत्र से जुड़ा है. भोजपुर फतेहगढ़ से करीब 15 से 20 किलोमीटर दूर है. कमालगंज फतेहगढ़ से करीब 10 से 15 किलोमीटर दूर है और यहां रेलवे स्टेशन है, जहां से फर्रुखाबाद और कन्नौज की ओर रेल संपर्क मिलता है. भोजपुर कन्नौज से करीब 40 से 45 किलोमीटर, कानपुर से करीब 125 से 130 किलोमीटर और लखनऊ से सड़क मार्ग द्वारा करीब 160 से 170 किलोमीटर दूर है.
भोजपुर में भाजपा का चुनावी प्रदर्शन पिछले वर्षों में लगातार दिखाई देता है. पार्टी ने लगातार दो विधानसभा चुनाव जीते हैं और 2014 के बाद हुए तीन लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र में बढ़त बनाई है. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने भाजपा की बढ़त को घटाकर करीब 4.60 प्रतिशत अंक कर दिया. वर्ष 2012 में जीत हासिल करने के बाद समाजवादी पार्टी विधानसभा क्षेत्र में दोबारा सीट हासिल नहीं कर सकी है.
भाजपा को कई हिंदू समुदायों के बीच समर्थन मिलता रहा है, जिनमें कुछ सवर्ण और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता शामिल हैं. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव को अलग संदर्भ में देखा जा सकता है, क्योंकि कांग्रेस ने फर्रुखाबाद सीट पर अलग से चुनाव नहीं लड़ा था. ऐसे में समाजवादी पार्टी भाजपा के सामने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी रही. भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी द्वारा भाजपा की बढ़त को 8,866 मतों तक सीमित करना 2024 के परिणाम का एक महत्वपूर्ण तथ्य रहा.
2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण का 2027 के विधानसभा चुनाव पर प्रभाव पड़ सकता है, हालांकि इसका वास्तविक असर अभी स्पष्ट नहीं है. वर्ष 2024 में 3,23,030 मतदाताओं से घटकर अंतिम पुनरीक्षित सूची में 2,80,939 मतदाता रह गए हैं. मतदाताओं की संख्या में इस बड़ी कमी से विधानसभा क्षेत्र के पुराने चुनावी आंकड़ों के आधार पर किए जाने वाले आकलन में बदलाव हो सकता है. भोजपुर का चुनावी इतिहास भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच लगातार मुकाबले को दिखाता है. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कम हुई बढ़त ने समाजवादी पार्टी के लिए विधानसभा क्षेत्र में नए राजनीतिक समीकरण की संभावना को भी सामने रखा है.
(अजय झा)