भगवंतनगर उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में स्थित एक छोटा शहर है, जिसे नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त है. यह जिले के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्थानीय बाजार के रूप में काम करता है.
इस शहर का नाम भगवंत कुंवर के नाम पर पड़ा, जो दौंडिया खेड़ा के प्रमुख बैस राजपूत सरदार राव मर्दन सिंह की पत्नी थीं.
18वीं शताब्दी में अवध के नवाबों के शासन के दौरान भगवंत कुंवर ने इस बस्ती की स्थापना की थी और उनके पति ने इसे एक नए परगने का मुख्यालय बनाया था. बाद में यह क्षेत्र ऐतिहासिक बैसवाड़ा क्षेत्र का हिस्सा बना और 1869 में रायबरेली जिले से उन्नाव जिले में स्थानांतरित कर दिया गया.
1957 के चुनावों से पहले स्थापित भगवंतनगर एक सामान्य और अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है. यह उन्नाव लोकसभा सीट के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इसकी सीमाओं में बदलाव किया गया और वर्तमान विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप तैयार हुआ. इसके बाद भी यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण बना हुआ है.
भगवंतनगर में 1957 में पहली बार मतदान होने के बाद से अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इसे एक स्विंग सीट माना जाता है, क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल लगातार दो से अधिक बार यहां जीत दर्ज नहीं कर पाया है. कांग्रेस पार्टी ने इस सीट पर कुल छह बार जीत हासिल की है. उसकी आखिरी जीत तीन दशक से भी अधिक समय पहले हुई थी. कांग्रेस के कमजोर होने के साथ भारतीय जनता पार्टी का प्रभाव बढ़ा और भाजपा अब तक पांच बार इस सीट पर जीत हासिल कर चुकी है. अन्य दलों में अब अस्तित्व में नहीं रहने वाली प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने दो-दो बार जीत दर्ज की है, जबकि जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने एक-एक बार यह सीट जीती है.
उन्नाव जिले में दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद विवादित रहे कुलदीप सिंह सेंगर ने 2012 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में भगवंतनगर सीट जीती थी. उन्होंने भाजपा की पूनम शुक्ला को 23,829 मतों से हराया था. इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए और 2017 का विधानसभा चुनाव पड़ोसी बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र से लड़ा और जीता. उनके भगवंतनगर से हटने के बाद भाजपा के लिए इस सीट को दोबारा हासिल करने का रास्ता खुला. भाजपा ने 1996 के बाद 2017 में पहली बार भगवंतनगर सीट पर फिर जीत दर्ज की.
हृदय नारायण दीक्षित ने 2012 में भाजपा के उम्मीदवार के रूप में भगवंतनगर विधानसभा सीट जीती थी. उन्होंने बसपा के शशांक शेखर सिंह को 53,366 मतों के अंतर से हराया था. दीक्षित ने 2017 से 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और 2022 का चुनाव नहीं लड़ा. भाजपा ने उनकी जगह आशुतोष शुक्ला को उम्मीदवार बनाया और सीट बरकरार रखी. आशुतोष शुक्ला को 127,118 वोट मिले, जबकि उनके समाजवादी पार्टी के प्रतिद्वंद्वी अंकित सिंह परिहार को 84,108 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 43,010 वोटों के अंतर से जीत हासिल की.
कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों की तरह भगवंतनगर में भी लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने शुरुआत में धीमी बढ़त बनाई और बाद में सीट पर अपनी स्थिति मजबूत की. 2009 में कांग्रेस ने बहुजन समाज पार्टी पर 65,777 मतों की बढ़त हासिल की थी. भाजपा उस चुनाव में चौथे स्थान पर रही थी, लेकिन 2014 में वह सबसे आगे पहुंच गई. इसके बाद से इस विधानसभा क्षेत्र में हुए प्रत्येक लोकसभा चुनाव में भाजपा आगे रही है. 2019 में भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर 61,186 मतों की बढ़त बनाई थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की बढ़त काफी कम हो गई. भाजपा के उन्नाव उम्मीदवार स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी को 108,456 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार अन्नू टंडन को 104,663 वोट मिले. इस तरह भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की बढ़त केवल 3,793 वोट रही.
भगवंतनगर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है. 2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 362,916 थी, जो 2017 में बढ़कर 409,687 हो गई. 2019 में यह संख्या घटकर 403,818 रह गई. इसके बाद 2022 में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 419,429 और 2024 में 423,214 हो गई. हालांकि मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखा गया है और यह अपेक्षाकृत कम रहा है. 2012 में मतदान प्रतिशत 57.25 रहा था, जो 2017 में घटकर 57.21 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह और घटकर 55.47 प्रतिशत रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 59.39 हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में यह फिर घटकर 55.26 प्रतिशत रह गया.
भगवंतनगर हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है और यहां मतदाताओं की सामाजिक संरचना मिश्रित है. अनुसूचित जाति की आबादी क्षेत्र की कुल आबादी का 29.79 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम समुदाय की मौजूदगी अपेक्षाकृत कम है और इसे मतदाताओं का लगभग 5.50 प्रतिशत माना जाता है. जातीय समूहों में ब्राह्मण सबसे बड़ा समुदाय है, जिसकी अनुमानित हिस्सेदारी लगभग 16.69 प्रतिशत है. इसके बाद क्षत्रिय या ठाकुर 11.44 प्रतिशत, लोधी 8.58 प्रतिशत, कुर्मी 8.11 प्रतिशत और यादव 7.39 प्रतिशत हैं. अनुसूचित जातियों में रैदास सबसे बड़ा अनुमानित समूह है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 10.49 प्रतिशत है. अनुसूचित जाति के अन्य समुदायों में पासी, जाटव या चमार और कोरी शामिल हैं. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां 91.30 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि केवल 8.70 प्रतिशत मतदाता शहरी क्षेत्रों में रहते हैं.
भगवंतनगर का इतिहास दौंडिया खेड़ा के बैस राजपूत जमींदारी और बैसवाड़ा क्षेत्र के प्रशासनिक विकास से जुड़ा हुआ है. पुराने गजेटियर में उल्लेख है कि इस नगर की स्थापना राव मर्दन सिंह की पत्नी भगवंत कुंवर ने की थी और बाद में उनके पति ने इसे भगवंतनगर परगने का मुख्यालय बनाया. यह नगर स्थानीय प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ. बक्सर और बिहार के बीच जाने वाली सड़क पर स्थित होने के कारण भी इसका महत्व बढ़ा. 19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों तक यहां स्थानीय व्यापार विकसित हो चुका था. उस समय यहां हिंदू मंदिर, एक स्थानीय भाषा का विद्यालय, डाकघर और पंजीकरण कार्यालय मौजूद थे. ऐतिहासिक दस्तावेजों में यहां तांबे के बर्तनों के निर्माण का भी उल्लेख मिलता है.
भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की मुख्य भूमिका है. उपजाऊ मैदानी क्षेत्र में गेहूं, धान, दलहन, तिलहन और अन्य फसलों की खेती की जाती है. पशुपालन और छोटे स्तर की कृषि गतिविधियां भी लोगों की आय के स्रोतों में शामिल हैं. भगवंतनगर शहर आसपास के गांवों के लिए स्थानीय व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करता है. यहां रोजगार का एक हिस्सा खुदरा व्यापार, परिवहन, छोटे कारोबार, सरकारी सेवाओं और अन्य सेवा गतिविधियों से जुड़ा है. व्यापक क्षेत्र का बैसवाड़ा और उन्नाव के दक्षिण-पूर्वी ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से पारंपरिक संबंध बना हुआ है.
यह विधानसभा क्षेत्र गंगा-यमुना दोआब के उपजाऊ मैदानी हिस्से में स्थित है और यहां का भू-भाग मुख्य रूप से समतल है. क्षेत्र में छोटी नदियां और जल निकासी की धाराएं बहती हैं. खारी और सुआवां नदियों ने ऐतिहासिक रूप से भगवंतनगर परगने के स्थानीय भूगोल को प्रभावित किया है. उन्नाव, पुरवा, बक्सर और रायबरेली-फतेहपुर क्षेत्र के बीच स्थित होने के कारण भगवंतनगर स्थानीय सड़क और बाजार केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण है. यह क्षेत्र सड़क मार्ग से पुरवा, उन्नाव, रायबरेली, फतेहपुर और कानपुर से जुड़ा है. भगवंतनगर रेलवे स्टेशन भी यहां परिवहन का एक साधन है और उन्नाव सहित अन्य क्षेत्रों की ओर रेल संपर्क उपलब्ध कराता है. भगवंतनगर और उन्नाव के बीच रेल दूरी लगभग 54 किलोमीटर है.
भगवंतनगर पुरवा से करीब 28 किलोमीटर, उन्नाव से 50 किलोमीटर, कानपुर से 55 किलोमीटर और रायबरेली से करीब 54 किलोमीटर दूर है. फतेहपुर की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है, जबकि लखनऊ करीब 75 से 80 किलोमीटर दूर है. वास्तविक दूरी चुने गए मार्ग के अनुसार अलग हो सकती है.
2024 के लोकसभा चुनाव तक भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की स्थिति काफी मजबूत रही थी. 2014 के बाद यहां हुए पांच प्रमुख चुनावों में भाजपा या तो जीत हासिल करती रही या सबसे आगे रही. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने भाजपा को कड़ी चुनौती दी. इस चुनाव में विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर भाजपा की बढ़त उसके मुख्य प्रतिद्वंद्वी से केवल 1.60 प्रतिशत अंक अधिक रही.
भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में विधानसभा और लोकसभा चुनावों के परिणामों में अंतर दिखाई देता है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी बढ़त मिली थी, लेकिन केवल दो साल बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी बढ़त काफी कम हो गई. इस बदलाव ने भाजपा के लिए क्षेत्र में मतदाताओं के रुझान को लेकर सवाल खड़े किए हैं. समाजवादी पार्टी के लिए यह परिणाम उम्मीद पैदा करता है कि बेहतर उम्मीदवार और केंद्रित चुनावी अभियान के जरिए वह 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को चुनौती दे सकती है.
(अजय झा)