बरखेड़ा उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के बीसलपुर उपखंड में स्थित एक ब्लॉक स्तरीय कस्बा है. यह पीलीभीत-बीसलपुर मार्ग पर स्थित है और आसपास के कृषि प्रधान गांवों के लिए एक स्थानीय प्रशासनिक और बाजार केंद्र के रूप में विकसित हुआ है. बरखेड़ा एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है, जिसकी स्थापना 1967 के चुनावों से पहले हुई थी और यह पीलीभीत लोकसभा
सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. वर्ष 2008 के परिसीमन के दौरान इसके अधिकार क्षेत्र का पुनर्गठन किया गया था और बरखेड़ा तथा न्योरिया हुसैनपुर जैसे शहरी क्षेत्रों की मौजूदगी के बावजूद यह विधानसभा क्षेत्र आज भी मुख्य रूप से ग्रामीण है.
वर्तमान विधानसभा क्षेत्र में पीलीभीत तहसील के न्योरिया और पौटा कलां के कानूनगो सर्किल तथा न्योरिया हुसैनपुर नगर पंचायत शामिल हैं. इसके अलावा बीसलपुर तहसील का बरखेड़ा कानूनगो सर्किल और बरखेड़ा नगर पंचायत तथा पूरनपुर तहसील के पश्चिम कानूनगो सर्किल के 17 निर्धारित राजस्व सर्किल भी इस क्षेत्र का हिस्सा हैं.
बरखेड़ा में अपनी स्थापना के बाद से अब तक 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और यह क्षेत्र भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मजबूत झुकाव वाला रहा है. भाजपा की पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ ने यहां पहले तीन चुनाव जीते थे. इसके बाद भाजपा ने छह बार जीत दर्ज की, जिससे भगवा दल की कुल जीत की संख्या नौ हो गई. समाजवादी पार्टी ने यह सीट दो बार जीती है, जबकि जनता पार्टी, कांग्रेस, एक निर्दलीय और समाजवादी जनता पार्टी ने एक-एक बार इस सीट पर जीत दर्ज की है. व्यक्तिगत उम्मीदवारों में किशन लाल सबसे सफल रहे हैं. उन्होंने यह सीट सात बार जीती, जिनमें तीन बार जनसंघ, तीन बार भाजपा और एक बार जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जीत शामिल है. जनसंघ के 1977 में जनता पार्टी में विलय के बाद उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था.
वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी ने कुछ समय के लिए भाजपा के दबदबे को तोड़ा, जब उसके उम्मीदवार हेमराज वर्मा ने भाजपा प्रत्याशी स्वामी प्रवक्तानंद को 30,374 वोटों के बड़े अंतर से हराया. पांच साल बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई, जब भाजपा ने किशन लाल राजपूत को उम्मीदवार बनाकर सीट वापस जीत ली. राजपूत ने मौजूदा समाजवादी पार्टी विधायक हेमराज वर्मा को 57,930 वोटों के भारी अंतर से हराया. वर्ष 2022 में भाजपा ने स्वामी प्रवक्तानंद को फिर से मैदान में उतारकर अपनी स्थिति और मजबूत की. उन्होंने हेमराज वर्मा के 70,299 वोटों के मुकाबले 151,771 वोट हासिल किए और 81,472 वोटों, यानी पड़े कुल वोटों के 34.25 प्रतिशत के बड़े अंतर से जीत दर्ज की.
लोकसभा चुनावों में भी बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का दबदबा रहा है. वर्ष 2009 से अब तक हुए सभी चार संसदीय चुनावों में भाजपा ने इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त हासिल की है और आमतौर पर अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे रही है. वर्ष 2009 में भाजपा ने कांग्रेस पर 74,164 वोटों की बढ़त बनाई. वर्ष 2014 में समाजवादी पार्टी पर उसकी बढ़त बढ़कर 87,507 वोट हो गई. वर्ष 2019 में यह बढ़त 97,171 वोट तक पहुंच गई, जबकि वर्ष 2024 में घटकर 77,263 वोट रह गई. नवीनतम चुनाव में भाजपा उम्मीदवार जितिन प्रसाद को 139,292 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार भगवत सरन गंगवार को 62,029 वोट प्राप्त हुए. इस तरह भाजपा को इस विधानसभा क्षेत्र में 35.10 प्रतिशत की बढ़त मिली.
बरखेड़ा के मतदाताओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है. वर्ष 2012 में यहां 281,531 पंजीकृत मतदाता थे, जो वर्ष 2017 में बढ़कर 303,706 हो गए. वर्ष 2019 में मतदाताओं की संख्या 311,011, वर्ष 2022 में 324,068 और वर्ष 2024 में 330,647 हो गई. मतदाता भागीदारी भी सामान्य रूप से अच्छी रही है, हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में इसमें लगभग सात प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज की गई. वर्ष 2012 में मतदान प्रतिशत 69.78 रहा. वर्ष 2017 में यह लगभग समान रहते हुए 69.77 प्रतिशत था. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान बढ़कर 72.36 प्रतिशत हुआ और वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में यह 73.50 प्रतिशत तक पहुंच गया. हालांकि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत घटकर 66.53 प्रतिशत रह गया.
बरखेड़ा हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है. अनुमान के अनुसार मुस्लिम मतदाता कुल मतदाताओं का 13.90 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाता 18.93 प्रतिशत हैं. लोधी राजपूत यहां का एक प्रमुख समुदाय है. इसके अलावा कुर्मी, मौर्य और अन्य ओबीसी समूहों की भी अच्छी मौजूदगी है. ब्राह्मण और अन्य सवर्ण समुदाय भी इस क्षेत्र में रहते हैं. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां 92.64 प्रतिशत आबादी गांवों में और केवल 7.36 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है.
बरखेड़ा एक पुराने बसावट स्थल पर स्थित है और इसके नाम को खेरा, यानी एक प्राचीन टीले, से जुड़ा माना जाता है. स्थानीय परंपराओं और पुराने विवरणों में इस क्षेत्र को एक पुरानी आबादी वाला स्थान बताया गया है, जो बाद में पीलीभीत के ग्रामीण इलाके में एक बाजार केंद्र के रूप में विकसित हुआ. इसका आधुनिक विकास पीलीभीत और बीसलपुर के बीच सड़क पर स्थित होने तथा बाद में आसपास के क्षेत्रों में कृषि और चीनी उद्योग से जुड़ी गतिविधियों के विकास से जुड़ा रहा है. कस्बा आकार में अभी भी अपेक्षाकृत छोटा है और इसके आसपास का क्षेत्र आज भी मुख्य रूप से कृषि प्रधान है.
कृषि यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है. उपजाऊ तराई के मैदानों में बड़े पैमाने पर खेती होती है और गन्ना, गेहूं तथा धान प्रमुख फसलों में शामिल हैं. बरखेड़ा अपने बड़े चीनी उद्योग के लिए भी जाना जाता है. पीलीभीत-बीसलपुर मार्ग पर बजाज हिंदुस्तान की चीनी इकाई स्थित है, जो जिले के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों में शामिल है. जिले की औद्योगिक गतिविधियों में चावल मिल, इंजीनियरिंग इकाइयां, ईंट भट्ठे और अन्य छोटे उद्यम भी शामिल हैं. कृषि स्थानीय गतिविधियों के एक बड़े हिस्से के लिए कच्चा माल और आर्थिक आधार उपलब्ध कराती है.
बरखेड़ा की स्थिति इसे आसपास के कस्बों और शहरों से सड़क और रेल संपर्क उपलब्ध कराती है. यह पीलीभीत से लगभग 20 से 25 किलोमीटर और बीसलपुर से लगभग 18 से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. बरेली लगभग 45 किलोमीटर दूर है, जबकि शाहजहांपुर की दूरी करीब 70 किलोमीटर है. यह कस्बा उत्तरी तराई और उत्तराखंड की तलहटी वाले क्षेत्रों तक भी अपेक्षाकृत आसान पहुंच रखता है. खटीमा लगभग 60 किलोमीटर दूर है और टनकपुर की दूरी करीब 80 से 85 किलोमीटर है. हल्द्वानी और काठगोदाम क्षेत्र लगभग 105 से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं. नई दिल्ली बरखेड़ा से लगभग 300 किलोमीटर दूर है, जबकि राज्य की राजधानी लखनऊ की दूरी करीब 290 किलोमीटर है. नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा भी विधानसभा क्षेत्र की व्यापक पहुंच के दायरे में है.
बरखेड़ा को पीलीभीत की निकटता का भी लाभ मिलता है, जो इस क्षेत्र के प्रमुख परिवहन और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में काम करता है. जिले का सड़क नेटवर्क इस विधानसभा क्षेत्र को बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, बीसलपुर और उत्तर की ओर स्थित तराई के कस्बों से जोड़ता है. विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशनों में बरखेड़ा और आसपास के भोपतपुर तथा शेरगंज जैसे स्टेशन शामिल हैं, जो रोहिलखंड क्षेत्र से अतिरिक्त संपर्क उपलब्ध कराते हैं.
बरखेड़ा पिछले कुछ वर्षों में भाजपा के लगभग अभेद्य गढ़ के रूप में उभरा है. वर्ष 2012 को छोड़कर, जब समाजवादी पार्टी ने बढ़त बनाकर विधानसभा सीट जीत ली थी, भाजपा ने वर्ष 2009 के बाद यहां हुए बाकी सभी छह प्रमुख चुनावों में जीत या बढ़त हासिल की है. केवल जीत ही नहीं, बल्कि भाजपा की जीत के अंतर का आकार भी समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 81,472 वोटों की जीत और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में 77,263 वोटों की बढ़त भाजपा की वर्तमान मजबूत स्थिति को स्पष्ट करती है.
हालांकि समाजवादी पार्टी वर्ष 2012 की अपनी जीत से कुछ उम्मीद जरूर ले सकती है. बरखेड़ा के मतदाताओं ने यह दिखाया है कि सही उम्मीदवार, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक परिस्थितियों के मेल से भाजपा को हराया जा सकता है. विपक्ष के सामने समस्या यह है कि इसके बाद भाजपा की जीत के बड़े अंतर ने चुनौती को काफी कठिन बना दिया है. इसलिए भाजपा वर्ष 2027 के चुनाव में स्पष्ट और मजबूत बढ़त के साथ उतरने की स्थिति में है. जब तक समाजवादी पार्टी इस विधानसभा क्षेत्र के मतदान पैटर्न में कोई बड़ा बदलाव नहीं ला पाती, तब तक बरखेड़ा ऐसी सीट बना हुआ है, जहां मुकाबला विपक्ष के जीतने से अधिक भाजपा के हारने पर निर्भर दिखाई देता है.
(अजय झा)