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बांगरमऊ विधानसभा चुनाव 2027 (Bangermau Assembly Election 2027)

बांगरमऊ उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में स्थित एक तहसील मुख्यालय और नगर पालिका परिषद नगर है. यह कल्याणी नदी के बाएं किनारे से ऊंची भूमि पर स्थित है. यह जिले के उत्तरी हिस्से में आता है और ऐतिहासिक रूप से स्थानीय सड़क और बाजार केंद्र के रूप में काम करता रहा है. इसका अतीत नगर से लगभग तीन किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित नवल के निकट पुरातात्विक स्थल

से जुड़ा हुआ है. यहां प्राचीन टीले और अन्य अवशेष मिले हैं, जो काफी पुराने समय से यहां बस्ती होने की ओर संकेत करते हैं.

बांगरमऊ को 1962 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र के रूप में गठित किया गया था. वर्ष 1967 में यह सामान्य यानी अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र बन गया. यह उन्नाव लोकसभा सीट के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र में पूरी बांगरमऊ तहसील के साथ सफीपुर तहसील के कुछ निर्धारित क्षेत्र शामिल किए गए. इसके कारण इसका स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.

बांगरमऊ में 1962 में पहली बार मतदान होने के बाद से अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इनमें वर्ष 2020 में हुआ उपचुनाव भी शामिल है. यह सीट परंपरागत रूप से ऐसा विधानसभा क्षेत्र रही है, जहां मतदाताओं का रुझान समय के साथ बदलता रहा है. किसी एक पार्टी का लंबे समय तक लगातार दबदबा नहीं रहा है. हालांकि हाल के वर्षों में इसका झुकाव भारतीय जनता पार्टी की ओर रहा है. कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी ने यह सीट पांच बार जीती है. भारतीय जनता पार्टी ने चार बार इस सीट पर जीत दर्ज की है. इसमें उसकी पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ की वर्ष 1967 की एकमात्र जीत भी शामिल है. समाजवादी पार्टी ने यह सीट तीन बार और बहुजन समाज पार्टी ने दो बार जीती है. भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी और जनता दल ने एक-एक बार इस सीट पर जीत दर्ज की है.

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने बदले खां को उम्मीदवार बनाया था. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद इरशाद खान को 6,795 वोटों से हराया था. वर्ष 2017 में भारतीय जनता पार्टी तीसरे स्थान से सीधे जीत दर्ज करने में सफल रही. पार्टी ने समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्मीदवार बनाया था. समाजवादी पार्टी द्वारा टिकट नहीं दिए जाने और उनकी जगह बदले खां को उम्मीदवार बनाए जाने के पांच साल बाद सेंगर ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा. उन्होंने समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक को 28,327 वोटों से हराया. इस जीत के साथ भारतीय जनता पार्टी ने 50 साल बाद बांगरमऊ सीट पर वापसी की. इससे पहले भारतीय जनसंघ ने 1967 में यहां जीत दर्ज की थी.

इसके बाद दुष्कर्म मामले में गिरफ्तारी के बाद कुलदीप सिंह सेंगर को भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और वर्ष 2020 में उपचुनाव कराना पड़ा. इस उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने श्रीकांत कटियार को उम्मीदवार बनाया. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार आरती बाजपेयी को 31,398 वोटों से हराकर सीट पर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा.

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में श्रीकांत कटियार ने फिर जीत दर्ज की. इसके साथ भारतीय जनता पार्टी ने लगातार तीन चुनाव जीतने का क्रम पूरा किया. कटियार को 90,980 वोट मिले. उनके समाजवादी पार्टी के प्रतिद्वंद्वी डॉ. मुन्ना को 75,187 वोट मिले. इस तरह भारतीय जनता पार्टी ने 15,793 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. यह अंतर उपचुनाव में मिली जीत के मुकाबले काफी कम था, लेकिन इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी स्पष्ट बढ़त के साथ आगे रही.

लोकसभा चुनावों के दौरान बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र में मतदान के रुझान भी यहां मतदाताओं की बदलती राजनीतिक पसंद को दिखाते हैं. वर्ष 2009 में कांग्रेस पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी पर 31,572 वोटों की बढ़त बनाई थी. भारतीय जनता पार्टी उस चुनाव में चौथे स्थान पर रही थी. वर्ष 2014 में भाजपा ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए समाजवादी पार्टी पर 44,663 वोटों की व्यापक बढ़त बनाई. वर्ष 2019 में उसकी बढ़त घटकर समाजवादी पार्टी के मुकाबले 21,715 वोट रह गई. वर्ष 2024 का मुकाबला बेहद करीबी रहा. इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर केवल दो वोटों की बढ़त हासिल की. समाजवादी पार्टी की उन्नाव लोकसभा उम्मीदवार अन्नू टंडन को 87,206 वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी के स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी को 87,204 वोट मिले.

समय के साथ बांगरमऊ में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. वर्ष 2012 में यहां पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2,96,335 थी. वर्ष 2017 में यह बढ़कर 3,37,892 हो गई. वर्ष 2019 में मतदाताओं की संख्या 3,39,806 रही. वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 3,57,627 और वर्ष 2024 में 3,61,374 हो गई. मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि के बावजूद मतदान प्रतिशत में व्यापक रूप से गिरावट का रुझान देखा गया. वर्ष 2012 में मतदान प्रतिशत 60.17 रहा था. वर्ष 2017 में यह घटकर 59.83 प्रतिशत हो गया. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत और घटकर 56.11 प्रतिशत रह गया. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई और मतदान प्रतिशत 56.96 रहा. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत फिर घटकर 54.51 हो गया.

बांगरमऊ कस्बे का इतिहास मुस्लिम परंपराओं से जुड़ा रहा है, लेकिन विधानसभा क्षेत्र में हिंदू आबादी बहुमत में है. अनुमान के अनुसार मुस्लिम मतदाता यहां के कुल मतदाताओं का करीब 18.50 प्रतिशत हैं. अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 26.96 प्रतिशत है. व्यापक क्षेत्र में अनुसूचित जाति के प्रमुख समूहों में पासी, जाटव या चमार, कोरी, धोबी और वाल्मीकि शामिल हैं. अन्य राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सामाजिक समूहों में ब्राह्मण, ठाकुर या राजपूत, कुर्मी, लोध, यादव, मौर्य, शाक्य, सैनी, कटियार, वैश्य और विभिन्न कारीगर तथा अन्य पिछड़ी जातियों के समुदाय शामिल हैं.

बांगरमऊ मुख्य रूप से ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है. यहां के करीब 84.70 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि 15.30 प्रतिशत मतदाता शहरी क्षेत्रों में रहते हैं. इसलिए यहां की राजनीति पर कृषि आधारित ग्रामीण क्षेत्र का प्रभाव रहता है. इसके साथ ही बांगरमऊ नगर आसपास के गांवों के लिए सेवा, व्यापार और प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में काम करता है. इन गतिविधियों का भी विधानसभा क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर प्रभाव रहता है.

बांगरमऊ का इतिहास कई अलग-अलग कालखंडों से जुड़ा हुआ है. आसपास के क्षेत्र में बहुत पुराने समय से मानव बस्ती होने के प्रमाण मिलते हैं. इनमें नवल का पुरातात्विक स्थल प्रमुख है. पुरातात्विक रिकॉर्ड में इस स्थान पर कई प्राचीन टीलों का उल्लेख मिलता है. यहां दीवारों, नक्काशीदार ईंटों, मूर्तियों, टेराकोटा वस्तुओं, सिक्कों और अन्य अवशेषों के प्रमाण मिले हैं. इस स्थल की पहचान चीनी यात्री ह्वेनसांग द्वारा बताए गए प्राचीन नगर नवद्रयकुल से की गई है. स्थानीय परंपरा के अनुसार, किसी संत के श्राप के कारण नवल की पुरानी बस्ती नष्ट हो गई थी और उसके बाद बांगरमऊ की स्थापना हुई. यह कथा स्थानीय ऐतिहासिक स्मृति का हिस्सा है, जबकि पुरातात्विक अवशेष क्षेत्र की प्राचीनता के ठोस प्रमाण देते हैं.

बांगरमऊ स्वयं मध्यकाल में एक महत्वपूर्ण बस्ती के रूप में विकसित हुआ. इसका इतिहास सूफी संत सैयद अलाउद्दीन से जुड़ा हुआ है. उनकी दरगाह पर 702 हिजरी यानी 1302 ईस्वी की तारीख वाला एक शिलालेख मिलता है. बांगरमऊ का उल्लेख बाबरनामा में भी मिलता है. बाबर ने 15 मार्च 1528 को बांगरमऊ में एक झील के पास पड़ाव डालने का उल्लेख किया था. इसके बाद वह लखनऊ की ओर बढ़ा था. कस्बे की प्रमुख सूफी परंपरा और मुस्लिम ऐतिहासिक संबंध आसपास के क्षेत्र की बहुसंख्यक हिंदू आबादी के साथ लंबे समय से मौजूद रहे हैं.

पुरानी बस्ती ने उन संचार मार्गों पर भी महत्वपूर्ण स्थान बनाया था, जो कन्नौज, अवध और उत्तर भारत के अन्य केंद्रों को जोड़ते थे. ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार बांगरमऊ और नवल मथुरा, कन्नौज और अयोध्या जैसे प्राचीन नगरों को जोड़ने वाले पुराने मार्ग पर स्थित थे. ब्रिटिश शासन के दौरान बांगरमऊ उन्नाव जिले की सफीपुर तहसील का हिस्सा था. इस दौरान यह आगे चलकर बाजार और प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ. उन्नाव और हरदोई के बीच सड़क मार्ग पर स्थित होने के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इसका व्यापारिक महत्व बना रहा.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की प्रमुख भूमिका है. उपजाऊ मैदानों में खेती और पशुपालन से जुड़ी गतिविधियां होती हैं. बांगरमऊ नगर आसपास के गांवों के लिए एक प्रमुख स्थानीय बाजार के रूप में काम करता है. यहां व्यापार, परिवहन, खुदरा कारोबार और छोटे व्यवसायों से जुड़े रोजगार भी मौजूद हैं. क्षेत्र में औद्योगिक आधार भी है, हालांकि मध्य उत्तर प्रदेश के बड़े औद्योगिक केंद्रों की तुलना में इसका स्तर सीमित है. बांगरमऊ में एक मिनी औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किया गया है, जिससे क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों में विस्तार हुआ है.

बांगरमऊ का भूभाग मुख्य रूप से समतल है और यह उपजाऊ गंगा के मैदान का हिस्सा है. कल्याणी नदी और उससे जुड़े जल निकासी मार्ग स्थानीय भूगोल को प्रभावित करते हैं. उन्नाव-हरदोई मार्ग के पास इसकी स्थिति जिले के उत्तरी हिस्से में इसे महत्वपूर्ण स्थान देती है. यह सड़क मार्ग से उन्नाव, हरदोई, संडीला, सफीपुर और आसपास के अन्य केंद्रों से जुड़ा हुआ है. बांगरमऊ रेलवे स्टेशन भी यहां मौजूद है. यह रेलवे नेटवर्क के माध्यम से क्षेत्र को उन्नाव, हरदोई और मध्य तथा उत्तरी उत्तर प्रदेश के अन्य कस्बों से जोड़ता है.

बांगरमऊ सफीपुर से करीब 21 किलोमीटर, कन्नौज से 34 किलोमीटर, संडीला से 34 किलोमीटर, बिलग्राम से 36 किलोमीटर, उन्नाव से 47 किलोमीटर, कानपुर से 49 किलोमीटर और हरदोई से 57 किलोमीटर की दूरी पर है. लखनऊ की दूरी मार्ग के आधार पर करीब 65 से 70 किलोमीटर है.

बांगरमऊ की राजनीति में लंबे समय से अलग-अलग दलों के बीच मुकाबला देखने को मिलता रहा है. हाल के वर्षों में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा है. पिछले सात प्रमुख चुनावों में से पांच में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है या बढ़त हासिल की है. हालांकि वर्ष 2022 में उसकी जीत का अंतर काफी कम हो गया था. इसके बाद वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी ने केवल दो वोटों के अंतर से भारतीय जनता पार्टी पर बढ़त हासिल की. इससे समाजवादी पार्टी को विधानसभा चुनाव में सीट वापस हासिल करने की संभावना को लेकर राजनीतिक आधार मिला है.

भारतीय जनता पार्टी की ओर से वर्ष 2024 के नतीजे को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मतदाताओं के अलग-अलग चुनावी रुझान के आधार पर देखा जा सकता है. विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मतदाता अलग-अलग मुद्दों और मानदंडों के आधार पर मतदान कर सकते हैं. ऐसे में किसी एक दल को निर्णायक बढ़त हासिल होने का दावा करना मुश्किल है. हालांकि दो वोटों का परिणाम बांगरमऊ को जिले की करीबी राजनीतिक सीटों में शामिल करता है.

यदि वर्ष 2024 जैसा बेहद करीबी मुकाबला वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलता है, तो परिणाम किसी भी दल के पक्ष में जा सकता है. मतदाताओं की भागीदारी में कोई भी महत्वपूर्ण बदलाव मौजूदा चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र में आगामी चुनाव के दौरान मतदान प्रतिशत, ग्रामीण मतदाताओं का रुझान और प्रमुख सामाजिक समूहों की राजनीतिक पसंद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

(अजय झा)

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बांगरमऊ विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Shrikant Katiyar

BJP
वोट90,980
विजेता पार्टी का वोट %44.7 %
जीत अंतर %7.8 %

बांगरमऊ विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Dr. Munna

    SP

    75,187
  • Ram Kishore Pal

    BSP

    25,543
  • Arti Bajpai

    INC

    5,285
  • Anil Kumar Mishra

    SP(I)

    1,385
  • Nota

    NOTA

    1,267
  • Rizwanullah

    NEP

    1,014
  • Satyendra

    AAAP

    798
  • Chand Alam

    ASPKR

    754
  • Abdul Rzzak Mansuri

    IND

    704
  • Balram

    IND

    610
WINNER

Kuldeep Singh Sengar

BJP
वोट87,657
विजेता पार्टी का वोट %43.4 %
जीत अंतर %14 %

बांगरमऊ विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Badaloo Khan

    SP

    59,330
  • Mohd Irashad Khan

    BSP

    44,730
  • Nota

    NOTA

    1,873
  • Sundar Lal

    IND

    1,504
  • Shree Kant Verma

    RLD

    1,281
  • Manoj Kumar

    IND

    1,114
  • Yadunandan Prasad

    IND

    1,079
  • Shailendra Kumar Alias Shailendra Singh

    NINSHAD

    967
  • Kaushalendra Singh

    BSRD

    445
  • Manish Kumar

    IND

    394
  • Faiz Ur Rehman

    IND

    388
  • Rajesh Kumar

    HKRD

    355
  • Rajendra Kumar

    BSCP

    353
  • Gulistan Khan

    PECP

    303
  • Babu Ram

    MWSP

    291
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बांगरमऊ विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में बांगरमऊ में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के बांगरमऊ विधानसभा चुनाव सीट पर Shrikant Katiyar को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

बांगरमऊ विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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