अमृतपुर एक बड़ा गांव और अमृतपुर तहसील का मुख्यालय है, जो फर्रुखाबाद जिले में स्थित है. खास बात यह है कि तहसील मुख्यालय होने के बावजूद अमृतपुर को अभी तक नगर के रूप में दर्ज नहीं किया गया है और यहां के स्थानीय नागरिक कार्यों की देखरेख ग्राम पंचायत करती है. आसपास के अनेक गांवों वाले पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र के लिए यह प्रमुख प्रशासनिक और बाजार
केंद्र है.
2008 के परिसीमन के बाद बनी अमृतपुर विधानसभा सीट सामान्य और गैर आरक्षित सीट है. यह फर्रुखाबाद लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. इसमें अमृतपुर तहसील का पूरा क्षेत्र, कायमगंज तहसील का रोशनाबाद कानूनगो सर्किल और फर्रुखाबाद तहसील का शमशाबाद पूर्वी कानूनगो सर्किल शामिल है. इस कारण इसका स्वरूप पूरी तरह ग्रामीण है.
नई विधानसभा सीट होने के कारण अमृतपुर का चुनावी इतिहास सीमित है. अब तक यहां तीन विधानसभा और चार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. 2012 के पहले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के नरेंद्र सिंह यादव ने जन क्रांति पार्टी के जितेंद्र सिंह यादव को 18,971 वोटों से हराया था. भारतीय जनता पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी. उस समय भाजपा के वोटों का विभाजन भाजपा और जन क्रांति पार्टी के बीच हुआ था. कल्याण सिंह के भाजपा में लौटने और 2013 में जन क्रांति पार्टी के भाजपा में विलय के बाद अगले चुनावों में तस्वीर बदल गई.
2017 के चुनाव में भाजपा के सुशील कुमार शाक्य ने समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक नरेंद्र सिंह यादव को 40,507 वोटों से हराया. 2022 में भी शाक्य ने सीट बरकरार रखी. उन्होंने समाजवादी पार्टी के जितेंद्र सिंह यादव को 44,686 वोटों से हराया. शाक्य को 98,848 वोट मिले, जबकि यादव को 54,162 वोट मिले.
लोकसभा चुनावों में भी अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदान रुझान में बदलाव देखा गया है. 2009 में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी पर करीब 1,200 वोटों की बढ़त बनाई थी. भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी. 2014 में भाजपा आगे निकल गई और उसने समाजवादी पार्टी पर 37,105 वोटों की बढ़त बनाई. 2019 में यह अंतर बढ़कर 49,022 वोट हो गया. 2024 में समाजवादी पार्टी ने फर्रुखाबाद लोकसभा सीट पर वापसी की और अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की बढ़त कम हुई. भाजपा के मुकेश राजपूत को 92,970 वोट और समाजवादी पार्टी के नवल किशोर शाक्य को 78,214 वोट मिले. इस तरह भाजपा की बढ़त 14,756 वोट रही.
अमृतपुर में मतदाताओं की संख्या समय के साथ बढ़ी है. 2012 में यहां 2,69,064 मतदाता थे, जो 2017 में बढ़कर 2,98,668 और 2019 में 3,05,828 हो गए. 2022 में यह संख्या 3,15,501 और 2024 में 3,16,821 थी. 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 2.71 लाख रह गई. फर्रुखाबाद जिला प्रशासन ने अमृतपुर को विधानसभा क्षेत्र संख्या 193 के रूप में सूचीबद्ध किया है.
मतदान प्रतिशत पिछले चुनावों में करीब 58 से 59 प्रतिशत के बीच रहा है. 2012 में यह 58.93 प्रतिशत, 2017 में 58.48 प्रतिशत, 2019 में 58.95 प्रतिशत और 2022 में 59.19 प्रतिशत रहा. 2024 के लोकसभा चुनाव में यह 57.30 प्रतिशत दर्ज किया गया.
अमृतपुर हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है और यहां मुस्लिम आबादी का हिस्सा कम है. 2011 की जनगणना के अनुसार अमृतपुर उपखंड में मुस्लिम आबादी 4.67 प्रतिशत थी, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी 13.05 प्रतिशत थी. यादव, शाक्य, ठाकुर और ब्राह्मण यहां के प्रमुख सामाजिक समूहों में शामिल हैं. कुर्मी भी एक महत्वपूर्ण पिछड़ा वर्ग समुदाय है.
स्थानीय परंपरा के अनुसार अमृतपुर की स्थापना मानसिंह नामक व्यक्ति ने की थी. कहा जाता है कि उन्होंने परगना में गहरवार राजपूतों की एक बस्ती बसाई थी. स्थानीय मान्यता में अमृतपुर नाम को यहां के पानी की गुणवत्ता से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि संस्थापक ने यहां के पानी की तुलना अमृत से की थी. 1857 के विद्रोह से पहले अमृतपुर तहसील और पुलिस सर्किल का मुख्यालय था. उस समय कार्यालय एक पुराने किले में थे. विद्रोह के दौरान विद्रोहियों ने किले और वहां रखे अभिलेखों को नष्ट कर दिया था. अमृतपुर लंबे समय से कृषि केंद्र के रूप में जाना जाता है और आसपास के गांवों के लिए यहां सप्ताह में दो दिन बाजार लगता है.
अमृतपुर फर्रुखाबाद के उत्तर में स्थित उपजाऊ मैदानी क्षेत्र में आता है. इसका संबंध गंगा और रामगंगा नदी तंत्र से है. यहां कृषि प्रमुख आर्थिक गतिविधि है. ग्रामीण क्षेत्र में गेहूं, धान, आलू और अन्य फसलों की खेती होती है. अमृतपुर के आसपास मौसमी आर्द्र क्षेत्र भी हैं. इनमें फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर स्थित कुठिला झील शामिल है. करीब 4.65 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह झील मानसून के दौरान गंगा और रामगंगा के पानी से प्रभावित होती है और यहां प्रवासी पक्षी भी पहुंचते हैं.
अमृतपुर सड़क मार्ग से फर्रुखाबाद, बदायूं, शाहजहांपुर और आसपास के अन्य केंद्रों से जुड़ा है. यहां के सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ में हैं. अमृतपुर फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ से करीब 20 से 25 किलोमीटर दूर है. कन्नौज की दूरी करीब 60 से 70 किलोमीटर और कानपुर की दूरी करीब 150 किलोमीटर है. लखनऊ सड़क मार्ग से करीब 165 से 180 किलोमीटर दूर है. शाहजहांपुर करीब 55 से 60 किलोमीटर और हरदोई करीब 60 से 65 किलोमीटर दूर है.
अमृतपुर में 2014 के बाद हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा है. 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने यहां जीत दर्ज की. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा आगे रही. 2024 में समाजवादी पार्टी ने भाजपा की बढ़त को काफी कम किया, लेकिन भाजपा फिर भी 14,756 वोटों से आगे रही.
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची में हुई कमी ने अमृतपुर के चुनावी आंकड़ों में बदलाव किया है. 2024 में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन 2012 के बाद इस क्षेत्र में उसके लिए महत्वपूर्ण रहा, हालांकि वह भाजपा से आगे नहीं निकल सकी. नई मतदाता सूची के कारण 2027 के चुनाव के लिए मतदाताओं का आधार पहले की तुलना में अलग होगा. भाजपा के पास हाल के विधानसभा और लोकसभा चुनावों का रिकॉर्ड है, जबकि समाजवादी पार्टी 2024 के प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी. अमृतपुर फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र बना रहेगा.
(अजय झा)