Panchayat Aaj Tak UP 2026 Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित 'पंचायत आजतक उत्तर प्रदेश' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश की इमेज बदला है. मैं मानता हूं कि उत्तर प्रदेश को पहचान के संकट से उबारा है.
सीएम योगी ने कहा कि यूपी में डबल इंजन सरकार आने के बाद ऐसा कौन-सा काम था, जो उत्तर प्रदेश में नहीं हो सकता था, लेकिन अब जमीनी धरातल पर दिखाई दे रहा है. माफियागीरी खत्म कर यूपी में कानून का राज स्थापित किया है. यूपी में कानून का राज कायम करने का काम किया गया है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 9 वर्ष पहले मुझे उत्तर प्रदेश में शासन-सत्ता का संचालन करने का अवसर हमारी पार्टी ने दिया तो मैं दिल्ली और गोरखपुर से कई नई टीम नहीं लाया. यूपी में उस समय जो भी टीम थी. उनके जरिए ही हमने काम किया और सूबे की तस्वीर बदलने की कोशिश की.
2014 से पहले भी यूपी में डबल इंजन की सरकार थी
योगी ने कहा कि मुझे कहने में कोई संकोच नहीं है. 2014 से पहले भी एक प्रकार की डबल इंजन सरकार थी. केंद्र में कांग्रेस और यूपीए की सरकार थी. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. दोनों मिलकर काम कर रहे थे. लेकिन आमजन का उन पर विश्वास नहीं था. आमजन मानता था कि एक तरफ कुआं है, दूसरी तरफ खाई. दोनों की स्थिति कमोबेश एक जैसी थी.
सीएम योगी ने बिना किसी का नाम लिए बगैर कहा कि आज जो लोग उपदेश देते हैं, अगर उन्होंने 2014 से पहले स्वयं उन बातों को अपनाया होता, तो आज उन्हें इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता. उस समय उत्तर प्रदेश का नौजवान अपनी पहचान छिपाता था. नौकरी निकलती थी तो उसकी योग्यता के बावजूद चयन नहीं होता था. कुछ चुनिंदा जनपदों और कुछ चुनिंदा लोगों का कब्जा था.
यूपी में न बेटी सुरक्षित थी और न ही व्यापारी
योगी ने कहा कि हमारी सरकार से पहले उत्तर प्रदेश की सुरक्षा की स्थिति बदहाल थी. उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में न बेटी सुरक्षित थी, न व्यापारी सुरक्षित था. 35 से अधिक जनपद ऐसे थे, जहां कोई भी सभ्य और सक्षम परिवार अपनी बेटी को स्कूल नहीं भेजता था. अगर पढ़ाना होता था, तो उत्तर प्रदेश के बाहर हॉस्टल या रिश्तेदारों के यहां भेजना पड़ता था.
उन्होंने कहा कि व्यापारियों की स्थिति यह थी कि सत्ता के समानांतर माफिया की सरकारें चलती थीं. कोई सुरक्षित नहीं था. न मीडिया, न आम नागरिक, न व्यापारी, न बेटी, न नया उद्यमी. व्यापारी घर से निकलते समय भगवान से प्रार्थना करता था कि शाम को परिवार का चेहरा देख सके. परिवार का कोई सदस्य बाहर जाता था, तो यही प्रार्थना करता था कि सुरक्षित लौट आए.
उद्यमी निवेश नहीं करना चाहता था, क्योंकि जब वह स्वयं सुरक्षित नहीं था, तो उसकी पूंजी कैसे सुरक्षित रहती. सरकार की न नीति थी, न नियत. अराजकता चरम पर थी. माफिया के सामने सरकार नाक रगड़ती दिखाई देती थी.
माफियाओं से विपक्ष नेताओं को सहानुभूति-योगी
योगी ने कहा कि आज भी आप उनके संस्कार सुनते होंगे. कहते हैं कि अगर सत्ता में आए तो जांच कराएंगे कि माफिया मारे क्यों जा रहे हैं. माफिया पर इतनी सख्ती क्यों हो रही है. यानी उनकी सहानुभूति आज भी उत्तर प्रदेश के नागरिक, व्यापारी और बेटी के प्रति नहीं है. उनकी सहानुभूति आज भी माफिया और उसके गुर्गों के प्रति है. जो या तो जेल में हैं या जहन्नुम की यात्रा पर जा चुके हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर आप 2003 से 2026 तक के 23 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखेंगे. पहले मुलायम सिंह जी का कार्यकाल. फिर मायावती जी का कार्यकाल. और फिर पिछले लगभग 9 वर्षों का हमारा कार्यकाल. तब जनता खुद संतुष्टि का स्तर बताएगी.
सीएम बना तो कोई नई टीम लेकर नहीं आया-योगी
सीएम योगी ने 2017 में जब यूपी के मुख्यमंत्री बनने के समय का जिक्र करते हुए कहा कि यूपी में जो सूरत बदली है, उसके लिए मैं कोई नई टीम लेकर नहीं आया हूं. मेरे साथ दिल्ली या गोरखपुर से कोई अलग टीम आई हो. मैं दिल्ली में सांसद था, जब मुझे यहां भेजा गया. मेरे साथ दिल्ली से एक भी व्यक्ति नहीं आया.
उन्होंने कहा कि मैं गोरखपुर से सांसद था. लगातार पांच बार सांसद रहने के बावजूद वहां से भी एक भी व्यक्ति मेरे साथ नहीं आया. जो लोग लखनऊ में मौजूद थे, जो टीम मुझे मिली, मैंने उसी टीम की मानसिकता को बदलने का प्रयास किया. आज जो परिणाम सामने आए हैं, वे आप सभी के सामने हैं. मैं केवल एक बात पूछना चाहता हूं. अगर यही बातें मैं आज से 9 वर्ष पहले कहता, या उस समय के मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के बारे में ऐसी घोषणाएं करते, तो लोग उन पर हंस देते. आज लोग ताली बजाते हैं.
हमने इन 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश को कहां पहुंचाया है. मैं मानता हूं कि उत्तर प्रदेश को पहचान के संकट से उबारा है. उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है. प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई है. उत्तर प्रदेश में वूमेन वर्कफोर्स की भागीदारी तीन गुना बढ़ी है. उत्तर प्रदेश, जो कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में था, आज देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है.
कैसे यूपी में भ्रष्टाचार पर लगाया नियंत्रण-योगी
योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि स्वर्गीय राजीव गांधी जी की वह बात याद आ जाएगी कि हम 100 रुपये भेजते हैं, लेकिन 15 रुपये ही नीचे पहुंचते हैं. मित्रों. उस समय 85 प्रतिशत पैसे पर डकैती पड़ती थी. वह पैसा किसी छात्र की छात्रवृत्ति का होता था. किसी युवा की नौकरी का होता था. किसी बुजुर्ग की पेंशन का होता था. किसी गरीब के राशन का होता था. किसी बहन-बेटी के शौचालय का होता था.
उन्होंने कहा कि डीबीटी के माध्यम से दिल्ली या लखनऊ से भेजा गया पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचता है. चाहे वह छात्र हो, युवा हो, महिला हो, किसान हो या श्रमिक. हर व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंच रहा है. आज सरकार के पास नीति भी है और उसे जमीन पर उतारने की दृढ़ इच्छा शक्ति भी है.
सीएम योगी ने कहा कि हमने संकल्प लिया था कि उत्तर प्रदेश को अपराधमुक्त, माफियामुक्त, कर्फ्यूमुक्त और दंगामुक्त बनाएंगे. सरकार की इच्छा शक्ति थी, इसलिए हमने इसे करके दिखाया. देश का सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य दंगामुक्त हो सकता है. कर्फ्यूमुक्त हो सकता है. उपद्रवमुक्त हो सकता है. अपनी परंपरागत पहचान उत्सवों के साथ जोड़ सकता है. उत्तर प्रदेश ने पिछले 9 वर्षों में यह करके दिखाया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों पर नियंत्रण किया. एक समय हर वर्ष 1200 से 1500 मौतें होती थीं. आज इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतें लगभग शून्य पर पहुंच चुकी हैं. भूख से मौतें समाप्त हुई हैं. जिन लोगों के पास जमीन नहीं थी, उन्हें पट्टे मिले हैं. उनका अपना आवास बन चुका है. आयुष्मान कार्ड पहुंच चुका है. रसोई गैस का कनेक्शन पहुंच चुका है. रोजगार की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है.
सीएम ने कहा कि परंपरागत उद्योगों को पुनर्जीवित किया गया है, जिन्होंने कभी उत्तर प्रदेश को पहचान दिलाई थी. आजादी के बाद 1950 में भारत की अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान लगभग 14 प्रतिशत था. 2017 तक यह घटकर लगभग 7 प्रतिशत रह गया था. यानी देश आगे बढ़ रहा था, लेकिन उत्तर प्रदेश पीछे जा रहा था.
उन्होंने कहा कि कारण स्पष्ट थे. किसानों को समय पर पानी नहीं मिलता था. बीज नहीं मिलता था. बिजली नहीं मिलती थी. किसान खेत में जाने से डरता था. फसल अच्छी हो जाए तो भी समस्या थी, क्योंकि उचित मूल्य किसान को नहीं, बिचौलियों को मिलता था.
aajtak.in