'ओए DM, ओए SP...', मालदा में AIMIM नेता ने भीड़ को उकसाया? SIR अफसरों को बंधक बनाने वाले मामले में रडार पर

पश्चिम बंगाल के मालदा में हिंसक प्रदर्शन को लेकर AIMIM नेता पुलिस की रडार पर आ गए हैं. उन पर कलियाचक में अधिकारियों को घेरने के लिए भीड़ को भड़काने के आरोप लगे हैं. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. अब तक 18 लोग गिरफ्तार हुए हैं.

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AIMIM नेता मोफक्करुल इस्लाम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है (Photo- ITG) AIMIM नेता मोफक्करुल इस्लाम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है (Photo- ITG)

इंद्रजीत कुंडू

  • कोलकाता,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:06 PM IST

पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में मालदा में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए निराशा जताई और सूबे की ममता सरकार को फटकार लगाई. अब इस घटना के तार AIMIM नेता से जुड़ रहे हैं, जिसे लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

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दरअसल, AIMIM नेता मोफक्करुल इस्लाम पर भीड़ को भड़काने के आरोप लगे हैं और पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है. आरोप है कि उन्होंने मालदा में हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया. जब कलियाचक में हिंसक प्रदर्शन हुए और अधिकारियों को बंधक बनाया गया था, इस्लाम ने पास के ही सुजापुर में विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई की. इसका एक वीडियो भी सामने आया है.

पेशे से वकील, इस्लाम 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों में इटाहार (उत्तरी दिनाजपुर जिला) से AIMIM के उम्मीदवार थे. मालदा के सुजापुर में हुए प्रदर्शन के दौरान इस्लाम का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कथित तौर पर 'ओए DM, ओए SP…' कहकर प्रशासन को चुनौती देते नजर आ रहे हैं. वायरल वीडियो में उन्हें कहते सुना जा सकता है, 'ओए DM, ओए SP... CID कहां है? IB कहां है? तुम सब कहां हो? यहां आओ.'

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AIMIM ने पुष्टि की है कि इस्लाम अभी भी पार्टी से जुड़े हैं. पश्चिम बंगाल में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी के साथ भी मोफक्करुल इस्लाम की तस्वीरें सामने आई हैं. पुलिस ने पूरे मामले को लेकर उन्हें रडार पर रखा है और मालदा हिंसक प्रदर्शन को लेकर भूमिका की जांच की जा रही है.

इस मामले में अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. हालात को देखते हुए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है. 

मालदा में क्या हुआ था?

SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप के बाद बुधवार को मालदा समेत राज्य के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने सड़क और हाईवे जाम किए, टायर जलाए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. इस दौरान मालदा के कलियाचक में वोटर लिस्ट रिविजन प्रोसेस में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया था. इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं. कई घंटों बाद सुरक्षा बलों ने उन्हें सुरक्षित निकाला. इतना ही नहीं, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े.

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अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने  मामले पर सुनवाई करते हुए निराशा जताई और सूबे की ममता सरकार को फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'पश्चिम बंगाल सबसे ज़्यादा राजनीतिक रूप से बंटा हुआ स्टेट है.' सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग से इस घटना की जांच सीबीआई या एनआईए से करवाने को कहा है. 

वहीं राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर राज्य में अशांति फैलाने की साजिश रचने का आरोप लगाया. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं. फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. चुनाव से ठीक पहले इस तरह के घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को और गरमा दिया है.

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