कौन हैं मैग्नस कार्लसन? पहले विश्वनाथन आनंद और अब डी गुकेश को पछाड़ा, स्कूल जाने से पहले से हैं चर्चे

डी गुकेश ने नॉर्वे शतरंज 2025 के छठे राउंड में मैग्नस कार्लसन को मात दी थी, लेकिन 10वें राउंड में अर्जुन एरिगैसी के खिलाफ बाजी ड्रॉ कराकर मैग्नस कार्लसन ने यह टूर्नामेंट जीत लिया है. अमेरिकी ग्रैंडमास्टर फैबियानो कारूआना दूसरे और विश्व चैंपियन डी गुकेश को तीसरे स्थान पर रहे.

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मैग्नस कार्लसन और डी गुकेश (फोटो सोर्स- Getty) मैग्नस कार्लसन और डी गुकेश (फोटो सोर्स- Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जून 2025,
  • अपडेटेड 3:16 PM IST

शतरंज की दुनिया में ‘मोजार्ट ऑफ चेस’ के नाम पहचान बनाने वाले मैग्नस कार्लसन ने नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट 2025 जीत लिया है. फाइनल राउंड में अमेरिकी ग्रैंडमास्टर फैबियानो कारूआना से हारने के बाद डी गुकेश तीसरे स्थान पर रहे. 10वें राउंड में भारत के ही अर्जुन एरिगैसी के खिलाफ मुख्य बाजी ड्रॉ कराकर कार्लसन ने 16 अंकों के साथ यह टूर्नामेंट अपने नाम किया. 

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हालांकि डी गुकेश ने छठे राउंड में मैग्नस कार्लसन को मात दी थी. नॉर्वे शतरंज 2025 के छठे राउंड में, गुकेश ने मैग्नस को पहली बार क्लासिकल शतरंज में हराया, जब मैग्नस ने फाइनल राउंड में एक नाइट गंवा दी. इस हार के बाद मैग्नस ने मेज पर मुक्का मारा और निराशा में “ओह माय गॉड” कहा, लेकिन बाद में गुकेश से माफी मांगी.

कौन हैं मैग्नस कार्लसन?
नॉर्वे के रहने वाले मैग्नस कार्लसन पांच बार के विश्व शतरंज चैंपियन, पांच बार के विश्व रैपिड चैंपियन और आठ बार के विश्व ब्लिट्ज चैंपियन (इयान नेपोम्नियाच्छी के साथ साझा) हैं. 2011 से वह FIDE विश्व रैंकिंग में नंबर 1 पर काबिज हैं और उनका उच्चतम रेटिंग स्कोर 2882 इतिहास में सबसे ज्यादा है. हाल ही में, उन्होंने फ्रीस्टाइल चेस ग्रैंड स्लैम टूर 2025 के फाइनल राउंड में भारत के मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश को हराया था. 

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मैग्नस कार्लसन  का जन्म और प्रारंभिक जीवन
स्वेन मैग्नस ओएन कार्लसन का जन्म 30 नवंबर 1990 को नॉर्वे के टॉन्सबर्ग में हुआ था. उनके पिता हेनरिक अल्बर्ट कार्लसन एक आईटी सलाहकार और मां सिग्रुन ओएन (1963-2024) एक केमिकल इंजीनियर थीं, जिनका 2024 में निधन हो गया. मैग्नस की तीन बहनें हैं, और उन्होंने बताया कि उनकी शुरुआती प्रेरणा अपनी बड़ी बहन को शतरंज में हराने की इच्छा थी. उनके परिवार ने एक साल फिनलैंड के एस्पू और फिर बेल्जियम के ब्रुसेल्स में बिताया, इसके बाद 1998 में नॉर्वे लौट आए, जहां वे बारम के लोम्मेडालेन और बाद में हासलम में बसे.

स्कूल जाने से पहले से प्रतिभा के चर्चे
मैग्नस ने कम उम्र में ही अपनी बौद्धिक क्षमता दिखाई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वे दो साल की उम्र में वे 50 टुकड़ों वाले जिगसॉ पजल्स हल कर लेते थे और चार साल की उम्र में 10-14 साल के बच्चों के लिए बने लेगो सेट्स बनाते थे. उनके पिता, जो एक शौकिया शतरंज खिलाड़ी थे, ने उन्हें पांच साल की उम्र में शतरंज सिखाया, हालांकि शुरुआत में उनकी रुचि कम थी. पांच साल की उम्र में उन्हें कई देशों के स्थान, जनसंख्या, झंडे और राजधानियां याद हो गई थीं.

शिक्षा और शतरंज की शुरुआत
मैग्नस ने प्राथमिक स्कूल पूरा करने के बाद एक साल की छुट्टी ली, जिस दौरान वे यूरोप में शतरंज टूर्नामेंट खेलने गए. 1999 में, आठ साल की उम्र में, उन्होंने नार्वेजियन शतरंज चैंपियनशिप के सबसे युवा डिवीजन में हिस्सा लिया. 2002 में, वे FIDE विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप के अंडर-12 डिवीजन में दूसरे स्थान पर रहे. 13 साल की उम्र में, उन्होंने कोरस शतरंज टूर्नामेंट के C ग्रुप में पहला स्थान हासिल किया और कुछ महीनों बाद ग्रैंडमास्टर की उपाधि प्राप्त की, जो उस समय की सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टरों में से एक थी.

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2005 में, वे कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने. 2009-2010 के दौरान, विश्व चैंपियन गैरी कास्पारोव उनके मेंटर रहे, जिसने उनके खेल को और निखारा.

विश्वनाथन आनंद को हराकर जीता था वर्ल्ड चेस चैंपियन का खिताब 
मैग्नस ने 2013 में विश्वनाथन आनंद को हराकर विश्व शतरंज चैंपियन का खिताब जीता था, जिसे 2014, 2016, 2018 और 2021 में भी बरकरार रखा. 2014 में, वे एकमात्र खिलाड़ी बने जिन्होंने एक साथ क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज तीनों विश्व खिताब अपने नाम किए. 2023 में, उन्होंने FIDE विश्व कप जीती, जो उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि थी.

मैग्नस बनाम डी गुकेश का पिछला मुकाबला
इसी साल फ्रीस्टाइल चेस ग्रैंड स्लैम टूर 2025 के फाइनल राउंड में, मैग्नस ने विश्व चैंपियन डी गुकेश को हराया था. यह मुकाबला जर्मनी के वीसेनहाउस रिजॉर्ट में हुआ, जहां मैग्नस ने काले मोहरों से खेलते हुए गुकेश को दबाव में ला दिया. गुकेश ने ड्रॉ की संभावना के बावजूद जीत की कोशिश की, लेकिन मैग्नस ने फाइनल राउंड में अपनी रणनीति से उन्हें मात दी. यह जीत गुकेश के विश्व चैंपियन बनने के बाद दोनों के बीच पहला क्लासिकल मुकाबला था.

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