बैक डेट के पेपर एड‍िट करके बने रियल पेपर? टेलीग्राम के फीचर पर NTA का दावा, क्या बोले साइबर एक्सपर्ट

भारत ने 21 जून को होने वाले नीट री-टेस्ट से ठीक पहले टेलीग्राम को अस्थायी रूप से बैन कर दिया है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बताया कि टेलीग्राम के एडिट फीचर के कारण फर्जी पेपरों का घोटाला संभव हुआ. इस फीचर से मैसेज और अटैच फाइलों को बदला जा सकता है, जिससे नकली प्रश्नपत्र असली दिखाए जा सकते हैं. NTA ने कहा कि एडिट किए गए मैसेज पर 'Edited' लेबल स्पष्ट नहीं दिखता, जिससे धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाती है.

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The edit feature on Telegram has become the centre of controversy before the NEET re-test. The edit feature on Telegram has become the centre of controversy before the NEET re-test.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:36 PM IST

21 जून को होने जा रही नीट (NEET) री-टेस्ट से ठीक पहले भारत ने अस्थायी रूप से टेलीग्राम को बैन कर दिया है. अब, भारत सरकार ने इस बैन के पीछे के कारणों को स्पष्ट किया है. इसमें सबसे बड़ा कारण इस चैट ऐप पर 'एडिट फीचर' (मैसेज बदलने की सुविधा) के काम करने का तरीका है. NTA ने इस फीचर के जरिये पेपर लीक का फेक नैरेट‍िव गढ़े जाने की भी बात की है. 

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नीट री-टेस्ट से पहले टेलीग्राम का एडिट फीचर विवादों के केंद्र में आ गया है. भारत ने मंगलवार को टेलीग्राम को 22 जून तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया. यह फैसला 21 जून को होने वाले नीट री-टेस्ट से पहले लिया गया है. जहां एक तरफ प्लेटफॉर्म को 22 जून तक बैन किया गया है, वहीं टेलीग्राम का एडिट फीचर 30 जून तक डिसेबल (बंद) रहेगा, हालांकि यह अभी तक साफ नहीं है कि भारत किसी ऐप के अंदर मौजूद एक विशिष्ट फीचर पर इस प्रतिबंध को कैसे लागू कराएगा.

टेलीग्राम पर लगे इस बैन को लेकर कई तरह की थ्योरियां सामने आ रही हैं. अलग-अलग लोग, जिनमें टेलीग्राम के निर्माता पावल डुरोव भी शामिल हैं, अलग-अलग बातें कह रहे हैं. अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का दावा है कि यह बैन मुख्य रूप से ऐप पर चल रहे फर्जी नीट पेपर स्कैम (घोटाले) के कारण लगाया गया है.

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NTA ने 'X' पर स्पष्ट किया कि यह घोटाला टेलीग्राम के एडिट फीचर के काम करने के तरीके के कारण संभव हो सका. यह ऐप यूजर्स को 48 घंटे तक मैसेज एडिट करने की अनुमति देता है. और यह केवल एक साधारण टेक्स्ट एडिट नहीं है, बल्कि ऐप यूजर्स को मैसेज के साथ अटैच (जुड़ी हुई) फाइल या पीडीएफ को भी बदलने की अनुमति देता है. इससे भी महत्वपूर्ण बात, और जिसके कारण टेलीग्राम पर बैन लगा है, वह यह है कि इसमें "Edited" का लेबल सभी चैट्स में उतनी प्रमुखता और स्पष्टता से नहीं दिखाई देता, जितना दिखना चाहिए.

फॉरवर्ड मैसेजेस में गायब हो जाता है 'Edited' का लेबल
NTA का आरोप है कि मूल मैसेज में Edited का लेबल जिस तरह से दिखाई देता है (या दूसरे ग्रुप में फॉरवर्ड होने पर बिल्कुल गायब हो जाता है), वह घोटालों की संभावना पैदा करता है. इसके अलावा, डिफ़ॉल्ट रूप से, मैसेज का टाइमस्टैम्प (समय) वही रहता है जब इसे मूल रूप से पोस्ट किया गया था.

एजेंसी का कहना है कि पिछली बार स्कैमर्स ने परीक्षा से एक या दो दिन पहले फर्जी नीट पेपर बेचे थे. और एक बार जब परीक्षा हो गई, तो उन्होंने टेलीग्राम के एडिट फीचर के जरिए उस फर्जी पीडीएफ फाइल को असली प्रश्नपत्र से बदल दिया. जिसने भी वह फर्जी टेस्ट खरीदा, उसके पैसे डूब गए और उसके पास यह साबित करने का भी कोई तरीका नहीं बचा कि उसे नकली पेपर बेचा गया था.

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NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने 'X' पर दावा किया कि मई में नीट परीक्षा के बाद फर्जी पेपरों के साथ ऐसे घोटाले हुए थे. उन्होंने कहा कि तीन मई को जब परीक्षा आयोजित की गई थी, तो हमें एक समान शिकायत मिली थी जिसमें परीक्षा के बाद कई हैंडल्स द्वारा एक वीडियो प्रसारित किया गया था. इसमें एक प्रश्नपत्र दिखाया गया था जिसे उस टेलीग्राम चैनल पर 1 मई को, यानी परीक्षा से दो दिन पहले साझा किया गया था.

एडिट फीचर की इस समस्या को टेलीग्राम के सीईओ पावल डुरोव ने भी स्वीकार किया है, हालांकि उन्होंने इस बैन को 'तर्कहीन' (Not Logical) बताया. उन्होंने 'X' पर लिखा, 'हम बैकडेटिंग घोटालों को रोकने के लिए 'Edited' लेबल को अधिक दृश्यमान (Visible) बना रहे हैं.' पावल ने आगे जोड़ा कि टेलीग्राम ने हाल के महीनों में भारत में लीक परीक्षा सामग्री और उससे जुड़े घोटालों को साझा करने वाले सैकड़ों चैनलों को हटा दिया है.

युवा हैकर्स ने NTA के दावों को दी चुनौती
भले ही एडिट फीचर को लेकर NTA का तर्क सही लगता हो, लेकिन कई लोग इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या इसके लिए पूरे ऐप को बैन करना जरूरी था. ऐसा इसलिए क्योंकि टेलीग्राम यह दिखाता है कि मैसेज कब एडिट किया गया था, साथ ही वह मूल समय भी दिखाता है जब इसे पोस्ट किया गया था. हालांकि, किसी मैसेज के एडिट होने का समय देखने के लिए यूजर्स को पहले उस मैसेज पर 'टैप' (क्लिक) करना पड़ता है.

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NTA के अभिषेक सिंह ने अपनी पोस्ट में दावा किया था कि पुराने मैसेज को एडिट करने के बाद भी यूजर्स को केवल मूल टाइमस्टैम्प दिखाई देता है. उन्होंने आगे जोड़ा, 'टाइमस्टैम्प अभी भी पुराना समय ही दिखाएगा और लोग उस वीडियो को देखकर मूर्ख बन जाएंगे और सोचेंगे कि यह प्रश्नपत्र पहले साझा किया गया था.' 

लेकिन 18 वर्षीय साइबर सुरक्षा शोधकर्ता सार्थक सिद्धांत के अनुसार, यदि यूजर्स केवल मैसेज पर टैप करने की सावधानी बरतें, तो एडिट करने का टाइमस्टैम्प दिखाई देता है. उन्होंने आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल की एक टिप्पणी का जवाब दिया, जिन्होंने दावा किया था कि टेलीग्राम व्हाट्सएप की तरह एडिट के लिए टाइमस्टैम्प नहीं दिखाता है.

अपने जवाब में, सार्थक ने एक टेलीग्राम स्क्रीनशॉट साझा किया जिसमें एक मैसेज के एडिट होने का समय और उसके मूल रूप से भेजे जाने का समय दोनों दिखाई दे रहे थे. टाइमस्टैम्प के मुद्दे के अलावा, सार्थक ने दावा किया कि एडिट लेबल की कमी के विषय पर भी एक समाधान मौजूद था.

इसे प्रदर्शित करने के लिए, सार्थक ने टेलीग्राम पर दो ग्रुप (ग्रुप ए और ग्रुप बी) बनाए और ग्रुप ए से ग्रुप बी में एक मैसेज फॉरवर्ड किया. सार्थक ने स्क्रीनशॉट साझा करते हुए दिखाया कि जब पहले ग्रुप में मैसेज एडिट किया गया, तो दूसरे ग्रुप ने अपडेटेड मैसेज तो दिखाया लेकिन बिना 'Edited' लेबल के. हालांकि, इस युवा साइबर सुरक्षा शोधकर्ता ने स्पष्ट किया कि बैकएंड में टेलीग्राम को पता होता है कि मैसेज को एडिट किया गया है और वह समय भी दर्ज होता है जब इसे एडिट किया गया था. यह सिर्फ सामान्य यूजर्स को दिखाई नहीं देता है.

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सार्थक के अनुसार, ऐप को बैन करने के बजाय, भारतीय अधिकारी टेलीग्राम से यह कह सकते थे कि वे 'Edited' लेबल को संदेश पर प्रदर्शित करें, चाहे वह मूल चैट में हो या किसी अलग ग्रुप में. उन्होंने लिखा कि टेलीग्राम को बैन करने के बजाय, NTA उनसे ऐसा करने (एडिटेड लेबल दिखाने) के लिए कह सकता था, लेकिन सबसे आसान समाधान उनसे नीट परीक्षाओं और उसके बाद के एक सप्ताह के लिए संचालन बंद करने के लिए कहना था.

एक और वायरल युवा साइबर सुरक्षा शोधकर्ता निसर्ग अधिकारी ने भी 'X' पर इसी तरह के विचार साझा किए. उन्होंने NTA की पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि मैसेज कब एडिट किया गया, इसका डेटा स्टोर रहता है. निसर्ग ने लिखा कि पूरे सम्मान के साथ सर, edit_date को स्पष्ट रूप से स्थानीय डेटाबेस (Local DB) और मेमोरी में history_item_edition.cpp के भीतर स्टोर किया जाता है, भले ही edit_hide सेट हो. बैज (Edited Label) गायब हो जाता है लेकिन डेटा इसके बावजूद सुरक्षित रहता है.
 

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रिपोर्ट: अरमान अग्रवाल

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