40-40 लाख में सीट की सेटिंग या कुछ और? CID रेड के बाद पूर्व JPSC अध्यक्ष का बड़ा खुलासा

खाली OMR शीट पर पास अभ्यर्थियों से लेकर 40-40 लाख में सीटें बेचे जाने के गंभीर आरोपों के बीच JPSC 14वीं सिविल सेवा परीक्षा का विवाद गहरा गया है. CID की ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद आयोग के अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया है. लेकिन इस्तीफे के बाद aajtak.in से खास बातचीत में पूर्व मुख्य सचिव और निवर्तमान अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने तमाम आरोपों पर क्या सफाई दी? पढ़िए यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट!

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जेपीएससी एस्पीरेंट को हाईकोर्ट से बड़ी राहत (Photo - Google map) जेपीएससी एस्पीरेंट को हाईकोर्ट से बड़ी राहत (Photo - Google map)

सत्यजीत कुमार

  • रांची ,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:44 PM IST

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर राज्य में सियासी और प्रशासनिक पारा गरम है. परीक्षा में कथित बड़े पैमाने पर धांधली, OMR शीट खाली छोड़ने वालों को पास करने और 40-40 लाख रुपये में सीटें बेचे जाने के आरोपों के बाद जांच एजेंसियों ने शिकंजा कस दिया है.

सीआईडी द्वारा आउटसोर्स एजेंसी 'TDPL' के ठिकानों और JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते के आवास पर छापेमारी किए जाने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे के बाद राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के निवर्तमान अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने aajtak.in से एक्सक्लूसिव बातचीत की और अपने ऊपर लगे तमाम गंभीर आरोपों का सिलसिलेवार जवाब दिया.

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14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा पर उठे 5 बड़े सवाल
OMR शीट का खेल:
आरोप है कि जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा में अपनी OMR शीट पूरी तरह खाली छोड़ दी थी, उन्हें भी अंतिम परिणाम में सफलता मिल गई.

कट-ऑफ मार्क्स गायब: प्रीलिम्स परीक्षा का परिणाम तो जारी हुआ, लेकिन अभ्यर्थियों के लिए कट-ऑफ मार्क्स कितना था, इसका कोई ब्योरा नहीं दिया गया.

परिणाम पर हस्ताक्षर नहीं: प्रीलिम्स परीक्षा के आधिकारिक रिजल्ट पर आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर तक मौजूद नहीं थे.

यूपी की ब्लैकलिस्टेड कंपनी को काम: आवेदन मांगने से लेकर परीक्षा संचालन और रिजल्ट प्रकाशन तक का पूरा काम यूपी की 'TDPL' कंपनी को आउटसोर्स किया गया, जो पहले से ब्लैकलिस्टेड बताई जा रही है.

40 लाख में सीट सेटिंग का आरोप: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने खुलकर आरोप लगाया कि 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में एक-एक सीट की सेटिंग 40-40 लाख रुपये में की गई थी.

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CID की छापेमारी और अध्यक्ष का इस्तीफा

मामले की गंभीरता और बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायतों के बाद CID एक्शन मोड में आई. CID की टीमों ने आउटसोर्स एजेंसी TDPL के ठिकानों के साथ-साथ JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते के आवासीय परिसर पर भी छापेमारी की. इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के तुरंत बाद एल. ख्यांगते ने JPSC अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया.

पढ़ें एल. ख्यांगते का एक्सक्लूसिव जवाब

तमाम आरोपों, सीआईडी की रेड और इस्तीफे के बाद एल. ख्यांगते ने अपना पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने कहा कि '40 लाख में सीट बेचने का दावा महज आरोप है. आयोग ने पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी से काम करने की कोशिश की है. 40-40 लाख रुपये में सीटों की बिक्री किए जाने और अन्य तमाम बातें सिर्फ मनगढ़ंत आरोप हैं. मामले की जांच चल रही है और जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी TDPL को काम देने पर सफाई

जब इस एजेंसी (TDPL) को परीक्षा से जुड़ा कार्य आवंटित किया गया था, उस वक्त यह एजेंसी कहीं भी ब्लैकलिस्टेड नहीं थी. नियमों के तहत ही काम दिया गया था. बता दें कि राज्य में पहले से सख्त कानून होने और लोकसभा में पेश किए गए अमेंडमेंट बिल के बावजूद परीक्षाओं में गड़बड़ी रुकने के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोकसभा में पेश किए गए इस नए कानून का निश्चित रूप से एक बड़ा डेट्रेंट एफेक्ट (निवारक/डर का प्रभाव) देखने को मिलेगा.
 

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