क्यों सबके बाल एक जैसे कटवाते हैं स्कूल? 11वीं छात्र ने डाली प‍िट‍िशन, श‍िक्षामंत्री से की हेयर रूल खत्म करने की मांग

अपनी प‍िट‍िशन में छात्र कार्तिक शर्मा ने बहुत सीधी और व्यावहारिक दलील दी है. aajtak.in से बातचीत में कार्त‍िक ने कहा कि स्कूल यून‍िफॉर्म तक तो ठीक लेकिन ये भी कंट्रोल क्यों करते हैं कि बच्चे बाल कैसे कटवाएं. मुझे आज तक समझ नहीं आया कि बालों की लंबाई को अनुशासन का मुद्दा क्यों बनाया जाता है? अगर कोई छात्र अच्छे से पढ़ाई कर रहा है, तमीज से रह रहा है, तो उसके बालों की लंबाई से क्या फर्क पड़ता है?

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हम बाल कैसे कटवाएं, ये स्कूल क्यों तय करें? 11वीं के छात्र ने डाली प‍िट‍िशन (AI Image) हम बाल कैसे कटवाएं, ये स्कूल क्यों तय करें? 11वीं के छात्र ने डाली प‍िट‍िशन (AI Image)

मानसी मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:06 AM IST

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रहने वाले 11वीं कक्षा के एक छात्र ने एक अनोखी ऑनलाइन पिटीशन शुरू की. उन्होंने बस हल्के-फुल्के अंदाज में अपने और अपने जैसे लाखों स्कूली बच्चों के उस रोजमर्रा के मानसिक तनाव को शब्दों में पिरोया जिसे अमूमन 'अनुशासन' का नाम देकर दबा दिया जाता है. मजेदार बात यह रही कि उनकी इस पिट‍िशन को देखते ही देखते उनके जैसे छात्रों का सपोर्ट मिलने लगा और वो दो द‍िनों में ही अपने लक्ष्य तक पहुंचने वाली है. 

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अपनी प‍िट‍िशन में छात्र कार्तिक शर्मा ने बहुत सीधी और व्यावहारिक दलील दी है. aajtak.in से बातचीत में कार्त‍िक ने कहा कि स्कूल यून‍िफॉर्म तक तो ठीक लेकिन ये भी कंट्रोल क्यों करते हैं कि बच्चे बाल कैसे कटवाएं. मुझे आज तक समझ नहीं आया कि बालों की लंबाई को अनुशासन का मुद्दा क्यों बनाया जाता है? अगर कोई छात्र अच्छे से पढ़ाई कर रहा है, तमीज से रह रहा है, तो उसके बालों की लंबाई से क्या फर्क पड़ता है?

50 बच्चों के सामने बालों में बांध दी पोनीटेल
इस पिटीशन को शुरू करने के पीछे कार्तिक का एक कड़वा स्कूली अनुभव है. कार्तिक बताते हैं कि तब मैं छोटा था और मेरे बाल थोड़े बड़े थे, तो एक बार क्लास में मैम ने सभी बच्चों के सामने सबके बीच में मेरे बालों में चोटी (पोनीटेल) बांध दी. सबको पता है कि जब इतने बच्चों के सामने ऐसा किया जाता है, तो सब बच्चे कैसी बातें और मजाक बनाते हैं. ये मानसिक रूप से काफी परेशान करने वाला होता है. कार्तिक का कहना है कि मैंने कई वीड‍ियोज देखे जिसमें कई स्कूलों में बच्चों के बाल छोटे न होने पर उन्हें एग्जाम तक में बैठने नहीं दिया जाता या पूरे ग्राउंड के चक्कर लगवाए जाते हैं. 

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पड़ोसी देश नेपाल का दिया हवाला
कार्तिक ने अपनी याचिका में भारत के पड़ोसी देश नेपाल का उदाहरण दिया है, जिसने हाल ही में अपने देश के स्कूलों में छात्रों को जबरन बाल कटाने के लिए मजबूर करने पर रोक लगा दी है. कार्तिक का सवाल बेहद व्यावहारिक है कि अगर पड़ोसी देश यह समझ सकता है कि छात्रों को अपने लुक पर थोड़ा व्यक्तिगत अधिकारमिलना चाहिए, तो हमारे देश में इस पर बात क्यों नहीं हो सकती?

यूनिफॉर्मिटी जरूरी, लेकिन बालों पर आफत क्यों?
बहस के दूसरे पहलू यानी स्कूल में समानता के नियम पर कार्तिक का नजरिया बेहद परिपक्व है. उनका कहना है कि स्कूल में यूनिफॉर्म तो बिल्कुल अनिवार्य होनी चाहिए, क्योंकि इससे आर्थिक रूप से कमजोर या समाज के हर वर्ग के बच्चे एक जैसे दिखते हैं. लेकिन बालों से किसी को क्या दिक्कत हो सकती है? बाल तो प्राकृतिक रूप से सबके उगते हैं. यही नहीं कार्तिक ने लड़कियों के नियमों का भी जिक्र किया कि इतनी भीषण गर्मी में भी उन्हें कड़े हेयर-रूल्स का पालन करना पड़ता है. 

इन 'डिसीजन मेकर्स' से लगाई गुहार
कार्तिक ने अपनी इस याचिका को देश की शिक्षा व्यवस्था और बाल अधिकारों को संभालने वाले सबसे बड़े चेहरों और बोर्ड्स को भेजा है. उनकी मांग सीधे तौर पर इन 4 बड़े नामों से है. 
धर्मेंद्र प्रधान: केंद्रीय शिक्षा मंत्री
प्रियंक कानूनगो: अध्यक्ष, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)
CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
ICSE: मुख्य प्राइवेट स्कूल बोर्ड

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कार्तिक की मांग है कि शिक्षा मंत्रालय और बोर्ड्स मिलकर एक स्पष्ट नेशनल गाइडलाइन जारी करें, ताकि किसी भी स्कूल में बच्चों को उनके बालों की वजह से अपमानित या शिक्षा से वंचित न किया जा सके. 

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