21 साल की नौकरी में 25 तबादले... जानें कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे? अब मिलावट के ख‍िलाफ मुहिम चलाकर चर्चा में

किसान परिवार से आने वाले मुंढे ने UPSC परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने के बाद 21 वर्षों में 25 बार तबादला झेला है. उनके समर्थक उन्हें 'सिंघम IAS' कहते हैं, जो भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हैं. उनकी कार्रवाई से राज्य में खाद्य सुरक्षा पर नई बहस छिड़ गई है.

Advertisement
FDA Commissioner Tukaram Mundhe FDA Commissioner Tukaram Mundhe

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST

महाराष्ट्र में इन दिनों अगर किसी अफसर की सबसे ज्यादा चर्चा है, तो वह हैं भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी तुकाराम मुंढे. नकली दूध, मिलावटी पनीर, गुटखा और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ उनकी कार्रवाई ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है. मई 2026 में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त का पद संभालने के बाद से मुंढे लगातार छापेमारी और सख्त फैसलों के कारण सुर्खियों में हैं.

Advertisement

किसान परिवार से आते हैं तुकाराम मुंढे

तुकाराम हरिभाऊ मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और बाद में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बने. सोशल मीडिया और कई सार्वजनिक चर्चाओं में उन्हें उनकी सादगी और सख्त प्रशासनिक शैली के लिए जाना जाता है.

कहां से की पढ़ाई?

तुकाराम मुंढे 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के IAS अधिकारी हैं. उन्होंने औरंगाबाद स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से बीए और एमए की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने UPSC परीक्षा पास की और प्रशासनिक सेवा में आए.

21 साल की नौकरी में 25 बार तबादला

मुंढे की पहचान सिर्फ एक सख्त अफसर के तौर पर नहीं है, बल्कि बार-बार हुए तबादलों के लिए भी है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 21 साल के प्रशासनिक करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है. हाल ही में उन्हें महाराष्ट्र FDA का आयुक्त बनाया गया, जो दो महीने के भीतर उनका दूसरा तबादला था.

Advertisement

'सिंघम IAS' क्यों कहलाते हैं?

तुकाराम मुंढे को उनके समर्थक अक्सर स‍िंघम IAS कहते हैं. इसकी वजह उनका सख्त रवैया और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति है. अपने दो दशक से ज्यादा लंबे करियर में वे कई बार राजनीतिक नेताओं और प्रभावशाली समूहों से टकराव के कारण चर्चा में रहे हैं.

बता दें कि फिलहाल मई 2026 में FDA की कमान संभालने के बाद मुंढे ने पूरे महाराष्ट्र में दूध और डेयरी उत्पादों की जांच के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया. उन्होंने दूध, पनीर, खाद्य तेल और दवाओं में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी. हाल ही में उनके नेतृत्व में राज्य में नकली दूध और असुरक्षित पनीर बनाने वाली कई इकाइयों पर छापे मारे गए.  मुंढे ने साफ कहा है कि दूध सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के पोषण का आधार है और इसमें मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

इससे पहले उन्होंने दूध और पनीर के अलावा मुंढे ने गुटखा और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों के खिलाफ भी अभियान चलाया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र में सैकड़ों जगहों पर छापेमारी की गई. इसके अलावा, दवाओं के नाम में भ्रम की वजह से करोड़ों रुपये की दवाओं को बाजार से वापस लेने के निर्देश भी दिए गए.

Advertisement

क्यों हो रही है इतनी चर्चा?

मुंढे के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने कुछ ही हफ्तों में मिलावट और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को राज्य की बड़ी बहस बना दिया है. वहीं, कुछ राजनीतिक दलों का मानना है कि सख्ती के साथ कारोबारियों को नियमों का पालन करने के लिए समय भी दिया जाना चाहिए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »