'आजादी' की चाह में शुरू कर रहे हैं बिजनेस? इस उद्यमी की सलाह बदल सकती है सोच!

अक्सर सोशल मीडि‍या में ऐसी पोस्ट द‍िखती हैं जिसमें लोग बताते हैं कि उन्हें कॉर्पोरेट जॉब नहीं भाया क्योंकि उसमें आजादी नहीं थी. वहां से नि‍कलकर अपना खुद का बिजनेस खड़ा करते है और उसे आजादी बताते हैं. एक मह‍िला उद्यजि मी अवंति नागराल ने इसी टॉप‍िक पर ल‍िंक्ड‍िन पर पोस्ट डाली जिसमें बताया कि क्या वाकई अपना बिजनेस आजाद कर देता है?

Advertisement
'बॉस नहीं बनना, सिर्फ आजादी चाहिए...' एंट्रप्रेन्योर अवंति नागराल की पोस्ट क्यों हो रही है वायरल? (Image courtesy: Avanti Nagral/LinkedIn) 'बॉस नहीं बनना, सिर्फ आजादी चाहिए...' एंट्रप्रेन्योर अवंति नागराल की पोस्ट क्यों हो रही है वायरल? (Image courtesy: Avanti Nagral/LinkedIn)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST

कई लोग एंट्रप्रेन्योर (उद्यमी) बनने का सपना देखते हैं, लेकिन एंट्रप्रेन्योर अवंति नागराल का मानना है कि असल में लोग जो चाहते हैं, वह बहुत ही आसान सी चीज है, वो है खुद का बॉस बनने की आजादी. अपनी एक लिंक्डइन पोस्ट में नागराल ने आजादी (स्वायत्तता) पाने की चाह और एक बिजनेस खड़ा करने की चाह के बीच के अंतर को साफ किया. उन्होंने तर्क दिया कि ये दोनों पूरी तरह से अलग काम हैं.

Advertisement

आजादी की चाहत होना एंट्रप्रेन्योरशिप नहीं है

नागराल ने लिखा कि लोग अक्सर किसी और के कैलेंडर, अप्रूवल (मंजूरी) की प्रक्रिया और अपने दैनिक शेड्यूल पर दूसरों के नियंत्रण से छुटकारा पाना चाहते हैं. हालांकि उन्होंने आजादी की इस इच्छा को पूरी तरह से सही ठहराया, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि एंट्रप्रेन्योरशिप का मतलब जिम्मेदारियों का न होना नहीं है.

इसके विपरीत, इसका मतलब उन जिम्मेदारियों को खुद संभालना है, जिन्हें पहले कोई बॉस, पेरोल विभाग, जोखिम प्रबंधक (रिस्क मैनेजर) या सपोर्ट सिस्टम संभालता था.

 

जब आप हर चीज के लिए अकेले जिम्मेदार बन जाते हैं
नागराल के मुताबिक, एक एंट्रप्रेन्योर के रूप में आपकी छुट्टी मंजूर करने वाला कोई नहीं होता. जब आप बीमार पड़ते हैं तो काम संभालने वाला कोई नहीं होता और जब कोई क्लाइंट भुगतान करने में विफल रहता है, तो उस वित्तीय नुकसान को झेलने वाला भी कोई नहीं होता.

Advertisement

उन्होंने बिजनेस चलाने की कड़वी सच्चाई को उजागर करते हुए लिखा, 'आप ही खुद का बैकअप (कवरेज) होते हैं.'

नागराल के अनुसार, यही वजह है कि कुछ लोग आजादी की तलाश में कंपनियां शुरू तो कर लेते हैं, लेकिन आखिरकार वे खुद को एक आम नौकरी की तुलना में ज्यादा फंसा हुआ महसूस करने लगते हैं.

आजादी पाने के दूसरे रास्ते भी हो सकते हैं

नागराल ने सुझाव दिया कि जो लोग मुख्य रूप से अपने समय और फैसलों पर नियंत्रण चाहते हैं, उन्हें जरूरी नहीं कि वे एंट्रप्रेन्योर ही बनें.

वे इसके बजाय फ्रीलांसर, कंसलटेंट या सोलो ऑपरेटर (अकेले काम करने वाले) के रूप में करियर के विकल्प चुन सकते हैं. इससे उन्हें किसी कंपनी को खड़ा करने और चलाने की भारी जिम्मेदारियां उठाए बिना अपने शेड्यूल के मालिक बनने का मौका मिल जाता है.

नागराल के दृष्टिकोण से, एंट्रप्रेन्योरशिप का मतलब एक ऐसे बड़े विजन को लेकर चलना है जो व्यक्तिगत सुविधा से कहीं बढ़कर हो, और उस सपने को तब भी बनाते रहना है जब यह उसी आजादी को दांव पर लगा दे जिसे पाने के लिए आपने शुरुआत की थी.

उनकी सलाह बिल्कुल सीधी और सटीक है: किसी चीज को बनाने में सालों लगाने से पहले खुद से ईमानदारी से यह सवाल पूछें कि क्या आप सच में एक एंट्रप्रेन्योर बनना चाहते हैं, या फिर आप सिर्फ खुद का बॉस बनने की आजादी चाहते हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »