कॉर्पोरेट जगत में जब भी 'लेऑफ' यानी छंटनी का नाम आता है, तो दिमाग में तनाव, अनिश्चितता और गुस्सा ही उभरकर सामने आता है. लेकिन हाल ही में ग्राफिक डिजाइन प्लेटफॉर्म कैनवा की सीईओ और को-फाउंडर मेलानी पर्किन्स ने छंटनी के इस पूरे ट्रेंड को एक बिल्कुल नया और मानवीय चेहरा दिया है. जब टेक सेक्टर में कंपनियां धड़ाधड़ नौकरियां काट रही हैं, तब कैनवा का एग्जिट पैकेज और उसे संभालने का तरीका सोशल मीडिया से लेकर कॉर्पोरेट गलियारों तक में मिसाल बन गया है.
क्या है कैनवा का यह खास 'लेऑफ पैकेज'?
कैनवा ने हाल ही में अपने कुल वर्कफोर्स के 22 फीसदी यानी 1,271 कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले एक रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) की घोषणा की. कंपनी के 13 साल के इतिहास में इसे सबसे कठिन दौर बताते हुए मेलानी पर्किन्स ने इसके मानवीय पक्ष को पूरी जिम्मेदारी के साथ संभाला. जाने वाले कर्मचारियों को जो पैकेज दिया गया, उसने हर किसी का ध्यान खींचा.
कर्मचारियों को दिया ये पैकेज
6 महीने की सैलरी: कर्मचारियों को कम से कम छह महीने का वेतन दिया जा रहा है.
हेल्थकेयर कवरेज: पात्र देशों में 12 महीने तक स्वास्थ्य बीमा का लाभ.
गैजेट्स की छूट: कर्मचारी अपने ऑफिस वाले मैकबुक अपने साथ रख सकते हैं.
करियर सपोर्ट: लिंक्डइन प्रीमियम का एक साल का सब्सक्रिप्शन, करियर कोचिंग और इंटरव्यू की तैयारी में मदद.
'कैनवा कलेक्टिव फंड': जो कर्मचारी खुद का बिजनेस या कम्युनिटी प्रोजेक्ट शुरू करना चाहते हैं, उन्हें बिना इक्विटी लिए 10,000 डॉलर (लगभग 10,000 के ग्रांट) की मदद दी जा रही है.
कर्मचारियों और सोशल मीडिया पर क्या रही प्रतिक्रिया?
एक तरफ जहां नौकरी जाने का गम अपनी जगह है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों ने जिस तरह कंपनी के रवैये की तारीफ की, वह वाकई अनोखा है. इंस्टाग्राम पर एक कर्मचारी ने लिखा कि भले ही यह खबर पचाना मुश्किल था, लेकिन मैटरनिटी लीव के दौरान कंपनी द्वारा दिए गए सपोर्ट से लेकर इस मुश्किल वक्त में साथ निभाने तक, कैनवा ने साबित कर दिया कि वह एक बेहतरीन ऑर्गेनाइजेशन है.
यह घटना एक बहुत बड़ा फर्क सिखाती है कि कर्मचारी नौकरी जाने से निराश हो सकते हैं, लेकिन यदि कोई कंपनी मुश्किल वक्त में उनके साथ शालीनता और सम्मान से पेश आती है, तो वह सम्मान दिलों में हमेशा रहता है.
बाकी टेक कंपनियों से कितना अलग है कैनवा?
कैनवा अकेला ऐसा नाम नहीं है जिसने सपोर्ट दिया हो, लेकिन उसका पैकेज अपने आप में अनूठा है. जानिए दूसरी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को सेवरेंस पैकेज में क्या दिया था.
मेटा (Meta): सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए 2 सप्ताह के साथ 16 सप्ताह का वेतन.
ड्रॉपबॉक्स (Dropbox): 16 सप्ताह का वेतन, प्रति वर्ष एक सप्ताह का अतिरिक्त वेतन और लैपटॉप रिटेंशन.
माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन: वॉलेंटरी एग्जिट और आंतरिक अवसरों को तलाशने के लिए समय.
इन सबके मुकाबले कैनवा का पैकेज वित्तीय सुरक्षा के साथ-साथ सीधे तौर पर करियर री-स्टार्ट करने (जैसे स्टार्टअप ग्रांट और मैकबुक रिटेंशन) पर फोकस करता है.
क्या यह महिला नेतृत्व का असर है?
इस पूरी घटना के बाद एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि क्या महिला CEO मुश्किल फैसलों को अलग नजरिए से संभालती हैं? हालांकि सहानुभूति को केवल जेंडर से जोड़ना सही नहीं होगा, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि महिला नेतृत्व वाली कंपनियों के बेहतर बिजनेस परिणाम देने की संभावना 6.4% अधिक होती है.
आजतक एजुकेशन डेस्क