बहरीन में प्रवासी वर्कर्स के लिए नया नियम लागू, 90 दिन के लिए बदल सकेंगे जॉब, ये है शर्त

बहरीन ने विदेशी कर्मचारियों के लिए वर्क परमिट नियमों में अहम बदलाव किया है. अब LMRA और नियोक्ताओं की मंजूरी से कर्मचारी 3 महीने के लिए किसी दूसरी कंपनी में अस्थायी तौर पर काम कर सकेंगे. बहरीन में रह रहे लाखों भारतीय पेशेवरों को इससे काम में लचीलापन और नए अवसर मिलेंगे. हालांकि, यह नियम घरेलू कामगारों पर लागू नहीं होगा. 

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बहरीन में भारतीय कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत! बहरीन में भारतीय कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत!

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई द‍िल्ली ,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:46 PM IST

बहरीन में रहकर नौकरी करने वाले लाखों प्रवासी कर्मचारियों, खासकर भारतीय पेशेवरों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है. बहरीन सरकार ने विदेशी कर्मचारियों के वर्क परमिट से जुड़े नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए नए दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं.

28 सितंबर 2026 को घोषित 'रेजोल्यूशन नंबर 2' के तहत अब कोई भी विदेशी कर्मचारी श्रम बाजार नियामक प्राधिकरण (LMRA) की मंजूरी मिलने के बाद अधिकतम तीन महीने (90 दिन) के लिए किसी दूसरे नियोक्ता (Employer) के पास अस्थायी तौर पर काम कर सकेगा. बहरीन के वर्कफोर्स में भारतीयों की बहुत बड़ी हिस्सेदारी है, ऐसे में यह कदम भारतीय कामगारों को नौकरी में ज्यादा लचीलापन और अतिरिक्त कमाई का मौका देने वाला माना जा रहा है.

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क्या है तीन महीने का नया नियम और सहमति की शर्त?

संशोधित नियमों के मुताबिक, किसी दूसरे नियोक्ता के पास काम करने या कम समय की प्रोजेक्ट-आधारित नौकरी करने की इजाजत तभी मिलेगी जब कई शर्तें पूरी होंगी: इस बदलाव के लिए कर्मचारी की लिखित सहमति के साथ-साथ उसके मौजूदा (पुराने) नियोक्ता और नए नियोक्ता दोनों की मंजूरी अनिवार्य होगी.

LMRA में पंजीकरण: इस पूरी व्यवस्था का एलएमआरए (LMRA) के पास आधिकारिक पंजीकरण (Registration) होना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह के बिना मंजूरी वाले रोजगार या ब्लैक मार्केटिंग को रोका जा सके. नियोक्ताओं को यह भी छूट दी गई है कि वे तय शर्तों का पालन करते हुए कर्मचारियों को अपनी ही दूसरी शाखाओं या ग्रुप से जुड़ी संस्थाओं में अस्थायी तौर पर भेज सकते हैं.

डोमेस्ट‍िक वर्कर्स पर नहीं लागे होगा नया नियम

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बता दें कि बहरीन ने अपने निजी क्षेत्र में स्थानीय नागरिकों को रोजगार देने के लिए 'बहरीनाइजेशन' का नियम बनाया हुआ है. नए संशोधनों में इस नियम को बरकरार रखा गया है. जिस नए संस्थान में कर्मचारी को अस्थायी रूप से भेजा जा रहा है, वहां बहरीनाइजेशन की दर पूरी होनी चाहिए.

यदि नए संस्थान में स्थानीय नागरिकों की नियुक्ति दर मूल नियोक्ता से कम पाई जाती है, तो उस संस्थान को अतिरिक्त रेगुलेटरी शुल्क (Regulatory Fee) देना पड़ सकता है.

कर्मचारियों के अधिकारों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

अस्थायी तैनाती के दौरान किसी भी कर्मचारी के वेतन, सुरक्षा और अन्य कानूनी अधिकारों को पूरा करने की जिम्मेदारी पुराने और नए दोनों नियोक्ताओं की साझा होगी. इससे कर्मचारियों के शोषण का खतरा खत्म होगा और उन्हें आधिकारिक सुरक्षा मिलेगी.

भारतीय पेशेवरों और कारोबार को क्या होगा फायदा?

बहरीन में काम कर रहे भारतीय अब अपनी मूल नौकरी को बिना छोड़े या बिना वीजा बदले, किसी दूसरी कंपनी में कम अवधि के प्रोजेक्ट्स ले सकेंगे. इसके अलावा जिन भारतीय कंपनियों या संस्थानों की कई ब्रांच हैं, वे काम का दबाव बढ़ने या कर्मचारियों की कमी होने पर अपनी ही दूसरी इकाइयों में कर्मचारियों का ट्रांसफर आसानी से कर सकेंगी.

क्या नहीं बदला है?
यह नीति बहरीन में पहले से कानूनी रूप से रह रहे कर्मचारियों के लिए है. इससे विदेश से सीधे कर्मचारियों की नई भर्ती का कोई नया रास्ता नहीं खुलता है और न ही बहरीनाइजेशन के मुख्य सिद्धांतों में कोई ढील दी गई है.

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