भारत में अमेरिकी जैवलिन (Javelin) मिसाइलें तैयार होने जा रही हैं. सुनने में यह 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में बड़ा कदम लगता है. लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है. इस मिसाइल का मुख्य 'दिमाग' यानी गाइडेंस सिस्टम अमेरिका में ही बनेगा, जबकि भारत में सिर्फ असेंबली होगी. दूसरी तरफ, यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया है कि कैसे एक सस्ता ड्रोन करोड़ों की कीमत वाले टैंक को तबाह कर सकता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत कल की जंग के लिए पुराना हथियार खरीद रहा है? देखें कूटनीति.