बार-बार एयरस्ट्राइक... पाकिस्तान को क्यों खटक रहे ये तीन अफगानी प्रांत?

नंगरहार, पक्तिका और खोस्त प्रांत पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बने हुए हैं. यहां TTP आतंकियों के ठिकाने होने के कारण पाकिस्तान बार-बार एयरस्ट्राइक कर रहा है. अफगानिस्तान हमलों की निंदा करता है.

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अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के समकनी जिले में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद बर्बाद इमारत के पास मौजूद स्थानी निवासी और तालिबान के लोग. (Photo: Reuters) अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के समकनी जिले में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद बर्बाद इमारत के पास मौजूद स्थानी निवासी और तालिबान के लोग. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:11 PM IST

नंगरहार, पक्तिका और खोस्त अफगानिस्तान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाके हैं जो पाकिस्तान की सीमा से सटे हुए हैं. ये तीन प्रांत पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा बन गए हैं. पाकिस्तान की सेना इन इलाकों में बार-बार एयरस्ट्राइक कर रही है. पाकिस्तान का कहना है कि यहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों के ठिकाने हैं, जो पाकिस्तान के अंदर हमले करके भाग जाते हैं. 

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अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन हमलों की कड़ी निंदा करती है और कहती है कि पाकिस्तान निर्दोष नागरिकों को निशाना बना रहा है. ये तीनों प्रांत भौगोलिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं. नंगरहार पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से लगा हुआ है. पक्तिका और खोस्त भी सीमा के पास हैं. 

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इन इलाकों में पहाड़ी इलाका, घने जंगल और दुर्गम रास्ते हैं, जो आतंकियों के छिपने के लिए आदर्श जगह हैं. दुर्गम इलाका होने के कारण यहां सुरक्षा बलों की पहुंच मुश्किल है. यही वजह है कि TTP जैसे समूह इन प्रांतों को सुरक्षित पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.

TTP का खतरा और पाकिस्तान की चिंता

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पाकिस्तान के अंदर सक्रिय एक खतरनाक आतंकी संगठन है. यह अफगान तालिबान से विचारधारा में काफी करीब है. 2021 में जब अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनी, तब TTP को नया बल मिला. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान TTP को समर्थन दे रहा है या कम से कम उन्हें रोक नहीं रहा है. 

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TTP पाकिस्तान में हमले बढ़ा रहा है. इन हमलों में पाकिस्तानी सेना, पुलिस और आम नागरिक मारे जा रहे हैं. पाकिस्तान सरकार के अनुसार, इन तीन प्रांतों से TTP के लड़ाके सीमा पार करके हमले करते हैं. वापस अफगानिस्तान में छिप जाते हैं. इसलिए पाकिस्तान को इन प्रांतों में एयरस्ट्राइक करने पड़ रहे हैं. पाकिस्तान का कहना है कि ये हमले खुफिया जानकारी पर आधारित हैं और केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हैं.

बार-बार एयरस्ट्राइक: पाकिस्तान की रणनीति

पाकिस्तान ने 2025 और 2026 में इन प्रांतों में कई बार एयरस्ट्राइक किए हैं. कभी-कभी ये हमले बड़े पैमाने पर होते हैं. पाकिस्तान इन अभियानों को ऑपरेशन खैबर स्टॉर्म या इसी तरह के नामों से पुकारता है. इन हमलों में पाकिस्तान का लक्ष्य TTP के कमांडरों, प्रशिक्षण शिविरों और हथियारों के गोदामों को नष्ट करना है.

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पाकिस्तान के अनुसार, ये कार्रवाइयां उसके आंतरिक सुरक्षा के लिए जरूरी हैं. जब पाकिस्तान के अंदर बड़े हमले होते हैं, जैसे इस्लामाबाद या अन्य शहरों में, तो जवाब में ये एयरस्ट्राइक किए जाते हैं. लेकिन अफगानिस्तान का कहना है कि इन हमलों में आम नागरिक, महिलाएं और बच्चे मारे जा रहे हैं. दोनों देशों के बीच आंकड़ों को लेकर विवाद भी होता रहता है.

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भौगोलिक और ऐतिहासिक कारण

ये तीन प्रांत सिर्फ भौगोलिक रूप से नहीं, बल्कि जातीय और सांस्कृतिक रूप से भी पाकिस्तान से जुड़े हैं. यहां रहने वाले ज्यादातर लोग पश्तून समुदाय के हैं. ड्यूरंड लाइन (पाक-अफगान सीमा) को लेकर लंबे समय से विवाद है. कई पश्तून इस सीमा को मान्य नहीं मानते. इसलिए लोग आसानी से दोनों तरफ आ-जा सकते हैं.

TTP ने इसी पश्तून पहचान का फायदा उठाया है. वे दोनों देशों के पश्तून इलाकों में समर्थन जुटाते हैं. अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार भी मुख्य रूप से पश्तून नेतृत्व वाली है, इसलिए TTP को यहां छूट मिलने का आरोप लगता है.

अफगानिस्तान की स्थिति और पाकिस्तान का दबाव

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती है. उनका कहना है कि वे पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देते. लेकिन वास्तविकता यह है कि तालिबान की सरकार पूरे देश पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं रख पा रही है. कुछ इलाकों में स्थानीय कमांडर स्वतंत्र रूप से काम करते हैं. 

पाकिस्तान इन तीन प्रांतों को इसलिए निशाना बनाता है क्योंकि यहां से खतरा सबसे ज्यादा है. नंगरहार में ISKP (इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत) भी सक्रिय है, जो दोनों देशों के लिए खतरा है. पाकिस्तान का मानना है कि अगर इन ठिकानों को नष्ट नहीं किया गया तो TTP और मजबूत हो जाएगा और पाकिस्तान के अंदर अस्थिरता बढ़ेगी.

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ये एयरस्ट्राइक सिर्फ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध खराब कर रहे हैं. दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है. कभी-कभी जमीन पर भी झड़पें होती हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर चिंता जता रहा है क्योंकि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हो रही है.

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पाकिस्तान की रणनीति साफ है - वह सीमा पर मजबूत बफर जोन बनाना चाहता है. आतंकियों को पनाह नहीं देने देना चाहता. लेकिन सिर्फ सैन्य कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी. दोनों देशों को खुफिया जानकारी साझा करने, सीमा प्रबंधन सुधारने और राजनीतिक बातचीत करने की जरूरत है.

नंगरहार, पक्तिका और खोस्त पाकिस्तान के लिए इसलिए खटक रहे हैं क्योंकि ये प्रांत उसके सुरक्षा हितों को सीधे चुनौती दे रहे हैं. जब तक TTP जैसे संगठन इन इलाकों में सक्रिय रहेंगे, पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक जारी रहेंगी. यह स्थिति दोनों देशों के लिए घातक साबित हो सकती है. लंबे समय में शांति और स्थिरता के लिए दोनों पक्षों को मिलकर काम करना होगा, वरना ये तीन प्रांत क्षेत्रीय अस्थिरता का केंद्र बने रहेंगे.

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