यूक्रेन ने अपने नए सिचेन सुसाइड ड्रोन से किया मॉस्को पर हमला, रूसी गेरान जैसा है ये हथियार

यूक्रेन ने मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर अपने नए 'सिचेन' कामिकाजे ड्रोनों के झुंड से बड़ा हमला किया. अप्रैल 2026 में सामने आए इस ड्रोन की रेंज 1400 किमी और स्पीड 200 किमी/घंटा है.

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ये है यूक्रेन का सिचेन कामिकाजे ड्रोन जिससे मॉस्को पर भयानक हमला किया गया. (Photo: X/@clashreport) ये है यूक्रेन का सिचेन कामिकाजे ड्रोन जिससे मॉस्को पर भयानक हमला किया गया. (Photo: X/@clashreport)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 19 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:25 AM IST

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा संघर्ष अब एक बेहद आक्रामक और तकनीकी मोड़ पर पहुंच चुका है. 18 अप्रैल 2026 को यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को को निशाना बनाते हुए अपने अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक को अंजाम दिया है. इस भीषण हमले में सबसे मुख्य निशाना मॉस्को के कपोत्न्या इलाके में स्थित रणनीतिक ऑयल रिफाइनरी थी. 

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इस हमले की सबसे खास और चौंकाने वाली बात यह रही कि इसमें यूक्रेन के बिल्कुल नए और स्वदेशी 'सिचेन' (Sichen) कामिकाजे ड्रोनों के एक बड़े झुंड को देखा गया. कम से कम 6 सिचेन ड्रोन एक के बाद एक बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए सीधे मॉस्को ऑयल रिफाइनरी की तरफ बढ़ते दिखाई दिए, जिसने रूस के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले हवाई क्षेत्र की कमियों को उजागर कर दिया है.

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मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर सटीक निशाना

मॉस्को की यह ऑयल रिफाइनरी रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचा है, जो राजधानी की लगभग 40% पेट्रोल और आधे से अधिक डीजल की जरूरतों को पूरा करती है. सुबह हुए इस हमले में यूक्रेन के ड्रोनों ने रिफाइनरी की सुरक्षा के लिए तैनात कई 'पंतसिर' एयर डिफेंस सिस्टम को छकाते हुए सीधे मुख्य फ्यूल टैंकों पर सटीक प्रहार किया.

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धमाके इतने जोरदार थे कि रिफाइनरी के एक बड़े हिस्से में भीषण आग लग गई और आसमान में काले धुएं का विशाल गुबार छा गया. इस हमले ने न केवल रूस के फ्यूल सिस्टम को चोट पहुंचाई है, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी मॉस्को के नागरिकों को युद्ध की गंभीरता का अहसास कराया है, जो अपने घरों की खिड़कियों से इन घातक आत्मघाती ड्रोनों को उड़ते देख रहे थे.   

'सिचेन' ड्रोन की खासियतें और तकनीकी क्षमताएं

इस हमले में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया गया 'सिचेन' ड्रोन यूक्रेन का एकदम नया लंबी दूरी का वन-वे अटैक मानव रहित विमान है. इसे पहली बार अप्रैल 2026 में यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय द्वारा दुनिया के सामने प्रदर्शित किया गया था। इस ड्रोन खासियत है... 

  • अधिकतम रेंज: 1400 किलोमीटर तक (यानी यूक्रेन से उड़ान भरकर रूस के बहुत अंदरूनी हिस्सों तक मार करने में सक्षम)
  • अधिकतम गति: 200 किमी/घंटा
  • वॉरहेड का वजन: 40 किलोग्राम उच्च क्षमता वाला विस्फोटक
  • अधिकतम टेकऑफ वजन: 140 किलोग्राम
  • अधिकतम उड़ान ऊंचाई: 1,500 मीटर तक
  • तैयारी का समय: उड़ान के लिए केवल 15 मिनट से भी कम का समय
  • सटीकता: 20 मीटर के दायरे में सटीक निशाना लगाने की क्षमता

सिचेन ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत इसकी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) रेजिलिएंस है. यह रूसी सेना के भारी जैमिंग और सिग्नल ब्लॉक करने वाले उपकरणों के बीच भी बिना रास्ता भटके दिन और रात दोनों समय अपने जीपीएस-विहीन (GPS-denied) नेविगेशन की मदद से लक्ष्य को तबाह कर सकता है.

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रूसी 'गेरान' ड्रोन जैसी बनावट

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन के सिचेन ड्रोन का डिजाइन काफी हद तक रूस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ईरान-डिजाइन 'गेरान' (Geran/Shahed-type) ड्रोनों से मिलता-जुलता है. इसमें डेल्टा-विंग (त्रिकोणीय) कॉन्फ़िगरेशन का उपयोग किया गया है, जो वजन को संतुलित रखने और हवा के दबाव को कम करने में मदद करता है.

फाइबरग्लास और हनीकॉम्ब संरचना से बने होने के कारण इसका राडार क्रॉस-सेक्शन बेहद छोटा होता है, जिससे रूसी रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते. कम लागत में तैयार होने वाले इन ड्रोनों को जब 'स्वार्म' यानी झुंड में लॉन्च किया जाता है, तो दुश्मन के महंगे एयर डिफेंस सिस्टम असमंजस में पड़ जाते हैं. उनके मिसाइल भंडार को खाली करने पर मजबूर होना पड़ता है.

एयर डिफेंस को भेदने के लिए यूक्रेन की नई रणनीति

मॉस्को पर हुए इस बड़े हमले को कामयाब बनाने के लिए यूक्रेनी सेना ने एक बेहद सोची-समझी सैन्य रणनीति अपनाई. यूक्रेन ने इस ऑपरेशन में केवल सिचेन ही नहीं, बल्कि अपने लगभग पूरे रेंज के ड्रोनों का इस्तेमाल किया. इसमें पारंपरिक प्रोपेलर वाले धीमी गति के ड्रोनों के साथ-साथ हाल ही में विकसित किए गए जेट-संचालित मिसाइल ड्रोन (जैसे पल्यानित्सिया और बार्स) भी शामिल थे.

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धीमी गति वाले ड्रोनों को पहले भेजकर रूसी वायु रक्षा प्रणालियों (Pantsir और S-400) को व्यस्त कर दिया गया और उनके मिसाइलों को खत्म कराया गया. इसके तुरंत बाद, पीछे से आ रहे तेज गति वाले जेट ड्रोनों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले सिचेन ड्रोनों ने सुरक्षा घेरे को पूरी तरह से भेद दिया. 

वायु सेना के जानकारों के मुताबिक, करीब 180 से अधिक ड्रोनों के इस विशाल हमले ने मॉस्को के सबसे घने हवाई सुरक्षा तंत्र को भी पूरी तरह से सैचुरेट कर दिया, जिससे यूक्रेन इस रणनीतिक तेल रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचाने में पूरी तरह सफल रहा.

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