अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में ईरान के ड्रोन हमलों को बेअसर करने के लिए 10,000 मेरोप्स (Merope) इंटरसेप्टर ड्रोन तैनात कर रहा है. ये ड्रोन मूल रूप से यूक्रेन युद्ध के लिए विकसित किए गए थे. अब ईरान के शाहेद ड्रोन को नष्ट करने के लिए इस्तेमाल होंगे.
ये ड्रोन बहुत सस्ते हैं – हर एक की कीमत लगभग 14,000 से 15,000 डॉलर है. पैट्रियट या THAAD जैसी महंगी मिसाइल रक्षा प्रणालियों की तुलना में ये कहीं अधिक किफायती हैं. इनकी तैनाती से अमेरिका को ईरान के ड्रोन हमलों का जवाब देने में बड़ी राहत मिलेगी.
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मेरोप्स इंटरसेप्टर ड्रोन क्या हैं और कैसे काम करते हैं?
मेरोप्स इंटरसेप्टर ड्रोन छोटे, सस्ते और तेज ड्रोन हैं, जो दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही मार गिराते हैं. ये ड्रोन AI और सेंसर से लैस होते हैं, जो आने वाले शाहेद या अन्य दुश्मन ड्रोन को पहचानते हैं. पहचानने के बाद ये खुद उसकी ओर बढ़ते हैं और टकराकर विस्फोट कर देते हैं.
ये ड्रोन पैट्रियट मिसाइल की तरह महंगे नहीं होते, जिनकी एक मिसाइल लाखों डॉलर की होती है. मेरोप्स ड्रोन का इस्तेमाल करके अमेरिका अब एक ड्रोन को मारने के लिए सिर्फ कुछ हजार डॉलर खर्च कर सकता है. ये ड्रोन यूक्रेन युद्ध में रूसी ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के खिलाफ सफल रहे थे.
क्यों जरूरी है ये ड्रोन तैनात करना?
ईरान ने इस युद्ध में शाहेद-136 और अन्य ड्रोन से इजरायल, सऊदी अरब, कतर और अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं. ये ड्रोन सस्ते होते हैं. बड़ी संख्या में भेजे जा सकते हैं. पैट्रियट या THAAD सिस्टम इन हमलों को रोक सकते हैं, लेकिन हर हमले पर लाखों डॉलर खर्च होते हैं.
अगर ईरान 100 ड्रोन भेजे तो पैट्रियट से रोकने में करोड़ों डॉलर लगेंगे. मेरोप्स ड्रोन इसी समस्या का सस्ता और प्रभावी जवाब हैं. 10,000 ड्रोन तैनात करके अमेरिका अब ईरान के ड्रोन स्वार्म (बड़ी संख्या में हमले) को रोक सकता है. ये ड्रोन हवाई क्षेत्र में गश्त करते हैं. आने वाले खतरे को खुद नष्ट कर देते हैं.
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यूक्रेन से मिडिल ईस्ट तक की यात्रा
ये मेरोप्स ड्रोन पहले यूक्रेन के लिए बनाए गए थे, जहां रूस के शाहेद ड्रोन और लैंसेट हमलों से निपटने के लिए इस्तेमाल हुए. यूक्रेन ने इनकी बहुत तारीफ की थी क्योंकि ये सस्ते और कारगर थे. अब अमेरिका ने इन्हें मिडिल ईस्ट में भेज दिया है. ईरान के शाहेद ड्रोन भी रूसी शाहेद-136 का वर्जन हैं.
इसलिए ये ड्रोन ईरान के ड्रोन को रोकने में बहुत प्रभावी साबित हो रहे हैं. अमेरिकी सेना का कहना है कि इनकी तैनाती से हवाई रक्षा बहुत मजबूत हुई है. अब पैट्रियट मिसाइलों को बचाया जा सकता है.
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इसका असर और भविष्य
इस तैनाती से अमेरिका को ईरान के ड्रोन हमलों पर ज्यादा नियंत्रण मिल गया है. ये ड्रोन सस्ते होने से अमेरिका बड़ी संख्या में इस्तेमाल कर सकता है. इससे ईरान को ड्रोन हमले करने में हिचकिचाहट होगी क्योंकि उसके ड्रोन आसानी से नष्ट हो जाएंगे.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह आधुनिक युद्ध में एक नया दौर है – जहां सस्ते ड्रोन महंगे ड्रोन और मिसाइलों को रोक रहे हैं. अमेरिका ने इस तकनीक से अपनी हवाई सुरक्षा को बहुत मजबूत कर लिया है. अब ईरान को नए तरीके सोचने पड़ेंगे. यह घटना बताती है कि भविष्य का युद्ध सस्ती और स्मार्ट तकनीक पर टिका होगा.
ऋचीक मिश्रा