'ये एक्ट ऑफ वॉर होगा...', सिंधु के पानी पर फिर पाकिस्तान ने दी गीदड़भभकी

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सिंधु जल संधि पर भारत के कदमों की कड़ी निंदा की. उन्होंने चिनाब नदी में पानी का रुख मोड़ने को युद्ध का कृत्य (Act of War) बताया. भारत द्वारा संधि निलंबित करने और डेटा साझा न करने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना. पाकिस्तान ने जल अधिकारों पर कोई समझौता न करने की चेतावनी दी.

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डासू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के पास से गुजरती सिंधु नदी. (Photo: Reuters) पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डासू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के पास से गुजरती सिंधु नदी. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने एक बार फिर सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है. उन्होंने भारत पर आरोप लगाया कि चिनाब नदी में पानी का रुख बदलना या रोकना युद्ध का कृत्य (Act of War) माना जाएगा. डार ने कहा कि भारत के "आक्रामक कदम" दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा हैं.

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क्या है पूरा मामला?

सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी. इस संधि के तहत तीन पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास, सतलुज) भारत को और तीन पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चिनाब) मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित की गईं. यह संधि अब तक कई युद्धों और तनावों के बावजूद कायम रही थी.

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लेकिन अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 पर्यटक मारे गए) के बाद भारत ने संधि को एकतरफा रूप से निलंबित (held in abeyance) कर दिया. भारत ने इसे पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवाद का जवाब बताया. तब से संधि निलंबित अवस्था में है – भारत ने हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करना बंद कर दिया. संयुक्त निगरानी तंत्र रोक दिया.

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दिसंबर 2025 चिनाब नदी में पानी की मात्रा में अचानक बदलाव देखा गया. पहले 7-8 दिसंबर की रात को अचानक 58,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, फिर 13 दिसंबर से पानी की मात्रा घटकर 870-1,000 क्यूसेक रह गई. पाकिस्तान का आरोप है कि भारत ने बिना पूर्व सूचना के पानी छोड़ा और फिर कम किया, जिससे उनकी फसलें (खासकर गेहूं) प्रभावित हो रही हैं. पाकिस्तान ने इसे 'पानी का हथियार बनाना' और संधि का उल्लंघन बताया.

इशाक डार के मुख्य आरोप

  • यह वियना कन्वेंशन के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन है.
  • भारत व्यवस्थित रूप से संधि को कमजोर कर रहा है.
  • पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना खतरनाक है.
  • पानी रोकना या रुख मोड़ना युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा.
  • पाकिस्तान अपने जल अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगा.
  • भारत विवाद समाधान की प्रक्रिया से बच रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों की अवहेलना है.
  • भारत के कदम पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं और मानवीय संकट पैदा कर सकते हैं.

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डार ने राजनयिकों को ब्रिफिंग देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कई बार यह मामला उठाया है. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के विशेष विशेषज्ञों (Special Rapporteurs) ने भी भारत के कदमों पर चिंता जताई है. उनकी रिपोर्ट में कहा गया कि संधि को एकतरफा निलंबित करना गलत है, पानी के प्रवाह में बाधा डालना लाखों लोगों के मानवाधिकारों (पानी, भोजन, आजीविका) का उल्लंघन है. विशेषज्ञों ने भारत से स्पष्टीकरण, मुआवजा और संधि का पालन करने की मांग की है.

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भारत का पक्ष क्या है?

भारत का कहना है कि संधि को निलंबित करना आतंकवाद के खिलाफ जवाब है. भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है, जिससे संधि की भावना का उल्लंघन हुआ. भारत ने कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद छोड़ नहीं देता, संधि निलंबित रहेगी. भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पानी पूरी तरह रोक नहीं रहा, लेकिन डेटा साझा करना और कुछ प्रतिबंध हटा दिए हैं.

आगे क्या हो सकता है?

यह विवाद दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच तनाव बढ़ा सकता है. पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों (UNSC, PCA) पर मामला ले जा रहा है, जबकि भारत इसे द्विपक्षीय और सुरक्षा का मुद्दा बता रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन से यह समस्या और गंभीर हो सकती है.

दोनों देशों को बातचीत से समाधान निकालना चाहिए, वरना क्षेत्रीय शांति खतरे में पड़ सकती है. यह मामला दक्षिण एशिया में पानी को लेकर पुरानी चिंताओं को फिर से उजागर कर रहा है. पाकिस्तान के लिए सिंधु नदी प्रणाली जीवनरेखा है, जबकि भारत इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रहा है. 

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