नॉर्थ कोरिया का नया संविधान, किम जोंग उन को कुछ हुआ तो होगा ऑटोमैटिक न्यूक्लियर अटैक

उत्तर कोरिया ने संविधान में बदलाव किया है. अब अगर किम जोंग उन की हत्या होती है या कमांड सिस्टम नष्ट हो जाता है, तो सेना ऑटोमैटिक परमाणु हमला करेगी. यह फैसला खामेनेई की हत्या के बाद लिया गया.

Advertisement
उत्तर कोरिया ने संविधान बदलकर कई देशों को चिंता में डाल दिया है. (Photo: ITG) उत्तर कोरिया ने संविधान बदलकर कई देशों को चिंता में डाल दिया है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:08 PM IST

उत्तर कोरिया ने अपने संविधान में बड़ा बदलाव किया है. अब अगर किम जोंग उन की हत्या हो जाती है या विदेशी हमले में देश की कमांड व्यवस्था नष्ट हो जाती है, तो सेना को ऑटोमैटिक परमाणु हथियारों से जवाबी हमला करना होगा. इसके लिए किसी अलग आदेश की जरूरत नहीं पड़ेगी.

दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने यह जानकारी दी है. यह बदलाव ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद किया गया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके कई सलाहकार मारे गए थे.

Advertisement

यह भी पढ़ें: एक अग्नि मिसाइल, 12 टारगेट्स स्वाहा... जानिए इसके पीछे की MIRV तकनीक

नया संवैधानिक प्रावधान क्या कहता है?

उत्तर कोरिया की 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली की बैठक 22 मार्च को प्योंगयांग में हुई थी. इसी में यह संशोधन पास किया गया.नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस (NIS) ने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि अब न्यूक्लियर फोर्सेस पर नियंत्रण अगर दुश्मन के हमले से खतरे में पड़ जाए तो ऑटोमैटिक और तुरंत परमाणु हमला किया जाएगा.

नए नियम के मुताबिक, किम जोंग उन के कमांड सिस्टम को खतरा होने पर कोई इंतजार नहीं होगा. परमाणु हथियारों का इस्तेमाल अपने आप हो जाएगा. इससे पहले यह नीति मौखिक रूप से हो सकती थी, लेकिन अब इसे संविधान में लिखित रूप से मजबूत कर दिया गया है.

ईरान की घटना क्यों बनी वजह?

ईरान पर हालिया हमलों ने उत्तर कोरिया को बड़ा सबक दिया. अमेरिका और इजरायल ने जिस तेजी से ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाया, उसे देखकर किम जोंग उन और उनकी सरकार डर गई. प्रोफेसर आंद्रेई लैंकोव ने कहा कि ईरान घटना उत्तर कोरिया के लिए वेक-अप कॉल साबित हुई.

Advertisement

यह भी पढ़ें: हंतावायरस को लेकर WHO चीफ बोले- घबराने की जरुरत नहीं, सिचुएशन कंट्रोल में है

उन्होंने देख लिया कि नेतृत्व को एक साथ खत्म करने वाले हमले कितने प्रभावी हो सकते हैं. उत्तर कोरिया अब ऐसी स्थिति से बचना चाहता है. अगर किम या उनकी कमांड टीम मारी जाती है तो देश का परमाणु जवाब अपने आप एक्टिव हो जाएगा. 

किम की हत्या करना कितना मुश्किल है?

किम जोंग उन अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं. वे हमेशा भारी सुरक्षा घेरे में रहते हैं. वे हवाई यात्रा से बचते हैं. ज्यादातर बख्तरबंद ट्रेन से सफर करते हैं. उत्तर कोरिया की सीमाएं पूरी तरह बंद हैं. विदेशी लोग बहुत कम आते हैं. उनकी निगरानी सख्ती से की जाती है. 

ईरान में इजरायली खुफिया एजेंसियों ने ट्रैफिक कैमरों को हैक करके नेताओं की लोकेशन पता की थी, लेकिन प्योंगयांग में सीसीटीवी और इंटरनेट की व्यवस्था बहुत सीमित है. इसलिए वहां ऐसी जानकारी हासिल करना बेहद कठिन है. फिर भी उत्तर कोरिया सैटेलाइट तकनीक और अन्य खुफिया खतरे से चिंतित है.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान ने नई फतह-3 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल पेश की, कर रहा ब्रह्मोस से टक्कर

दक्षिण कोरिया की सीमा पर नया खतरा

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की सीमा के पास नई आर्टिलरी तैनात करने की घोषणा की है. किम जोंग उन ने हाल ही में एक हथियार फैक्ट्री का दौरा किया जहां नई 155 मिलीमीटर की सेल्फ-प्रोपेल्ड गन का परीक्षण हुआ. 

Advertisement

यह तोप लगभग 60 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है. इससे दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल और आसपास के महत्वपूर्ण इलाके इसके दायरे में आ जाएंगे. उत्तर कोरिया का कहना है कि यह नया हथियार उनकी जमीनी सेना को बड़ी ताकत देगा. 

उत्तर और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से अब भी युद्ध की स्थिति में हैं. 1950-53 का युद्ध केवल संघर्षविराम पर खत्म हुआ था. शांति संधि नहीं हुई. हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने एकीकरण की पुरानी बातों को अपने संविधान से हटा दिया है. दक्षिण कोरिया को मुख्य दुश्मन बताता है. दक्षिण कोरिया की शांति पहल के बावजूद उत्तर कोरिया अपनी आक्रामक नीति जारी रखे हुए है. परमाणु हथियारों को लेकर नया प्रावधान पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकता है.

दुनिया के लिए क्या मतलब?

यह बदलाव दिखाता है कि उत्तर कोरिया अपने नेता की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को कितनी अहमियत देता है. अगर किम पर हमला होता है तो परमाणु युद्ध शुरू होने की आशंका बढ़ जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की सेना नेतृत्व के प्रति वफादार है. किसी भी हमले को अस्तित्व का खतरा मानकर जवाबी कार्रवाई करेगी.
 
यह घटनाक्रम पूर्वी एशिया में सुरक्षा की स्थिति को और जटिल बना रहा है. दक्षिण कोरिया और अमेरिका दोनों इस विकास पर नजर रखे हुए हैं. यह संवैधानिक बदलाव उत्तर कोरिया की 'अगर मैं मरा तो सब कुछ नष्ट' वाली नीति को और मजबूत करता है. दुनिया के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement