डराने लगी महायुद्ध की भयावह तस्वीर... परमाणु प्लांट तक पहुंच गई बमबारी, रेडिएशन का बढ़ा खतरा

ईरान के देजफुल एयरबेस और इजरायल के डिमोना परमाणु प्लांट पर हमले से महायुद्ध की भयावह तस्वीर उभर कर सामने आई हैं. नतांज पर पांचवां हमला, फोर्डो, इस्फहान, पारचिन समेत कई न्यूक्लियर साइट्स तबाह किए गए हैं. रेडिएशन बड़ा खतरा मंडरा रहा है. अभी पारंपरिक युद्ध है, लेकिन परमाणु जंग का डर बढ़ गया.

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बाएं से- इजरायल के डिमोना में रात में ईरानी मिसाइल गिरी. उधर ईरान डेजफुल में सेना बेस पर फूटता एम्यूनिशन डिपो. (Videograb: X) बाएं से- इजरायल के डिमोना में रात में ईरानी मिसाइल गिरी. उधर ईरान डेजफुल में सेना बेस पर फूटता एम्यूनिशन डिपो. (Videograb: X)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 22 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

21 मार्च 2026 को ईरान के खूजिस्तान प्रांत में देजफुल शहर के पास वाहदाती एयरबेस (4th Tactical Fighter Base) पर भारी बमबारी हुई. अमेरिका और इजरायल के प्रेसीजन मिसाइलों ने बेस के गोला-बारूद के बंकरों को निशाना बनाया. हमले के बाद बंकरों में स्टोर किए गए हथियार खुद फटने लगे – सेकेंडरी एक्सप्लोजन की चेन रिएक्शन शुरू हो गई. यहां नीचे दिए गए वीडियों में आप देख सकते हैं...  

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आसमान में मशरूम क्लाउड उठा, आग की लपटें कई किलोमीटर दूर से दिखाई दीं. लोकल लोगों ने मोबाइल से वीडियो बनाया जिसमें धमाकों की आवाज, पक्षियों की चहचहाहट और लगातार रंबलिंग शॉकवेव सुनाई दे रही थी. ये बेस 1980 से ईरान के पुराने F-5 टाइगर II फाइटर जेट्स का घर था. 

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हमले में कई F-5 जेट्स जल गए और पूरा एम्यूनिशन डिपो तबाह हो गया. ये बेस 1980 के ईरान-इराक युद्ध में भी हमले झेल चुका था, लेकिन इस बार नहीं बच सका.

डिमोना पर हमला – इजरायल का परमाणु प्लांट निशाने पर

इजरायल के डिमोना न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर पर भी हमला हुआ है. ये इजरायल का मुख्य परमाणु रिएक्टर है जहां परमाणु हथियार से जुड़ी रिसर्च होती है. ईरान की तरफ से मिसाइल या ड्रोन हमला बताया जा रहा है. 

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हमले से रेडिएशन लीक होने का खतरा है. डिमोना पहले भी ईरान के टारगेट पर रहा है, लेकिन इस बार यह सीधे हिट हुआ. इजरायल ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन लोकल रिपोर्ट्स में धुएं और आग की खबरें आ रही हैं.

ईरान के परमाणु सुविधाओं पर हर हमला 

ईरान जंग के 22 दिन में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर सेंटर्स पर कई हमले किए...

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  • नतांज – यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट. मार्च 2026 में पांचवीं बार हमला हुआ. सेंट्रीफ्यूज मशीनें तबाह. एंट्रेंस ब्लॉक हो गया है. 
  • फोर्डो – पहाड़ के नीचे अंडरग्राउंड प्लांट. हाई-लेवल यूरेनियम एनरिचमेंट होता था. बंकर बस्टर बम से हमला, लेकिन कुछ हिस्से बच गए हैं.  
  • इस्फहान – यूरेनियम कन्वर्जन और फ्यूल फैब्रिकेशन सेंटर. 40 साल पुराना. हमलों से मेटल प्रोडक्शन यूनिट नष्ट.  
  • पारचिन – मिलिट्री कॉम्प्लेक्स, टेलघान-2 साइट पर न्यूक्लियर हथियार टेस्टिंग. क्लस्टर मुनिशन से हमला, एक्सप्लोसिव टेस्टिंग लैब्स तबाह.  
  • मिन्जादेही – तेहरान के पास अंडरग्राउंड साइट. न्यूक्लियर वेपन कंपोनेंट डेवलपमेंट पूरी तरह नष्ट. ये सभी साइट्स पर बंकर बस्टर और प्रेसीजन मिसाइलों से हमले हुए. कई टॉप न्यूक्लियर वैज्ञानिक भी मारे गए.

कितना है न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा 

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परमाणु प्लांट्स पर बमबारी से रेडिएशन लीक का बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है. डिमोना और ईरान के प्लांट्स में यूरेनियम और प्लूटोनियम स्टॉक है. अगर रेडिएशन फैला तो आसपास के इलाकों में लोग बीमार हो सकते हैं. मिट्टी और पानी प्रदूषित हो सकता है. लेकिन अभी तक कोई न्यूक्लियर बम या न्यूक्लियर वेपन इस्तेमाल नहीं हुआ है.

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ये अभी भी कन्वेंशनल युद्ध है. न्यूक्लियर वॉर तभी कहलाएगा जब कोई देश परमाणु हथियार फेंकेगा. अभी दोनों तरफ रेडिएशन का खतरा है, लेकिन युद्ध न्यूक्लियर स्तर पर नहीं पहुंचा. एक्सपर्ट कह रहे हैं कि अगर और हमले हुए तो रेडिएशन फैल सकता है. पूरा मिडिल ईस्ट प्रभावित हो सकता है.

महायुद्ध की तस्वीर क्यों डरावनी लग रही है?

देजफुल और डिमोना के हमले से युद्ध की भयावह तस्वीर साफ हो गई है. पहले सिर्फ मिलिट्री बेस टारगेट थे, अब तेल हार्टलैंड और परमाणु साइट्स निशाने पर हैं. ईरान का खूजिस्तान तेल प्रांत है जहां से 90% तेल निकलता है. हमले के बाद एम्यूनिशन डिपो खुद फटने लगा. 

इजरायल के डिफेंस मिनिस्टर ने अंडरग्राउंड बंकर से कहा स्ट्राइक्स सिग्निफिकेंटली बढ़ाए जाएंगे. 48 घंटे का अल्टीमेटम चल रहा है. नतांज पर पांचवां हमला हो चुका है. ये सब देखकर दुनिया डर गई है कि कहीं पारंपरिक युद्ध न्यूक्लियर वॉर तक न पहुंच जाए.

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