नौसेना की बढ़ेगी ताकत, 11 जुलाई को शामिल होगा युद्धपोत INS महेंद्रगिरी

भारतीय नौसेना 11 जुलाई 2026 को प्रोजेक्ट 17A के छठे स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरी' को कमीशन करेगी. 75% स्वदेशी सामग्री से लैस यह युद्धपोत समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत का शक्तिशाली प्रतीक है.

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ये है भारतीय नौसेना का नया युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरी. (Photo: Indian Navy) ये है भारतीय नौसेना का नया युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरी. (Photo: Indian Navy)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:31 PM IST

भारतीय नौसेना 11 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में अपने प्रोजेक्ट 17A के तहत छठे स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरी (F38) को बेड़े में शामिल करने जा रही है. पूर्वी घाट की राजसी महेंद्रगिरी पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखे गए इस युद्धपोत का निर्माण रक्षा क्षेत्र में भारत की 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है. यह न केवल भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को एक मजबूत सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में भी स्थापित करेगा.

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'मेक इन इंडिया' की अनूठी मिसाल

'महेंद्रगिरी' पूरी तरह से भारत की अपनी तकनीक और प्रतिभा का परिणाम है.

  • डिजाइन: इसे भारतीय नौसेना के इन-हाउस संगठन वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा तैयार किया गया है.
  • निर्माण: इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा किया गया है.
  • स्वदेशी सामग्री: इस युद्धपोत में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. इसके निर्माण में देश के बड़े उद्योगों के साथ कई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने भी योगदान दिया है, जिससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत हुआ है.

अत्याधुनिक विशेषताएं और युद्ध क्षमता

प्रोजेक्ट 17A श्रेणी का यह छठा जहाज अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है, जो इसे आधुनिक समुद्री युद्ध के मैदान में एक बेहद घातक योद्धा बनाता है.

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  • स्टेल्थ तकनीक: महेंद्रगिरी में उन्नत स्टेल्थ फीचर्स शामिल किए गए हैं, जो इसके रडार की पकड़ में आने की क्षमता को बहुत कम कर देते हैं. इससे यह दुश्मन की नजरों से बचकर अचानक हमला करने में सक्षम है.
  • प्रोपल्शन सिस्टम: यह जहाज एक आधुनिक कंबाइंड डीजल या गैस प्रोपल्शन सिस्टम द्वारा संचालित होता है. यह तकनीक इसे न केवल तेज गति से संचालन करने की शक्ति देती है, बल्कि लंबे समय तक समुद्री अभियानों में टिके रहने की असाधारण क्षमता भी देती है.
  • हथियार और सेंसर: इसमें सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली आधुनिक मिसाइल प्रणालियां, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर सिस्टम्स लगाए गए हैं. यह सब एक इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े हैं.

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बहुआयामी भूमिका और रणनीतिक महत्व

महेंद्रगिरी केवल युद्ध लड़ने के लिए नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के अभियानों को अंजाम देने के लिए बनाया गया है. यह हवा, सतह और पानी के नीचे- तीनों मोर्चों पर एक साथ मुकाबला कर सकता है. यह समुद्री सुरक्षा, पावर प्रोजेक्शन, मानवीय सहायता और आपदा राहत तथा खोज एवं बचाव अभियानों में भी समान रूप से सक्षम है.

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आज के जियो-पॉलिटिकल कंडीशन में जहां भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा भागीदार की भूमिका निभा रहा है, महेंद्रगिरी जैसी स्वदेशी ताकत देश के समुद्री हितों की रक्षा करने और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' साबित होगी. अपने आदर्श वाक्य Mighty–Majestic–Matchless (शक्तिशाली, राजसी, अद्वितीय) के साथ यह युद्धपोत देश की सेवा के लिए पूरी तरह तैयार है.

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