ईरान जंग के बीच इंडियन नेवी ने ओमान की खाड़ी और अरब सागर में बढ़ाए युद्धपोत

भारतीय नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बीच गल्फ ऑफ ओमान और अरब सागर में अपनी ताकत बढ़ा दी है. ऑपरेशन संकल्प के तहत अतिरिक्त सात युद्धपोत और लॉजिस्टिक जहाज तैनात किए गए हैं. LPG और ईंधन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ये कदम उठाए गए हैं.

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भारतीय नौसेना ने अरब सागर, अदन की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में युद्धपोत की संख्या बढ़ा दी है. (File Photo: Indian Navy) भारतीय नौसेना ने अरब सागर, अदन की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में युद्धपोत की संख्या बढ़ा दी है. (File Photo: Indian Navy)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:49 PM IST

पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग तेज हो गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह प्रभावित है. यहां से दुनिया का 20% तेल और गैस गुजरता है. भारत के लिए ये बहुत बड़ा संकट है क्योंकि भारत अपने जरूरत का 45% तेल और गैस खाड़ी देशों से आयात करता है. 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  बंद होने से जहाजों का आना-जाना रुक गया है. भारत में LPG की कमी शुरू हो गई है. कई जहाज फंसे हुए हैं. इसलिए भारतीय नौसेना अब सक्रिय हो गई है. जहाजों की सुरक्षा के लिए अपनी ताकत बढ़ा रही है.

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भारतीय नौसेना ने कितने जहाज और कहां तैनात किए?

भारतीय नौसेना ने अरब सागर और गल्फ ऑफ ओमान में अतिरिक्त सात युद्धपोत और लॉजिस्टिक सपोर्ट जहाज तैनात कर दिए हैं. ये तैनाती पिछले 10 दिनों में शुरू हुई दो टास्क फोर्स के अलावा है. इन टास्क फोर्स ने उत्तर अरब सागर से भारतीय बंदरगाहों तक भारतीय जहाजों को सुरक्षित पहुंचाया था. 

अब और जहाज भेजे जा रहे हैं ताकि LPG और ईंधन ले जाने वाले जहाज सुरक्षित रहें. ये तैनाती 2019 से चल रहे ऑपरेशन संकल्प का हिस्सा है. ऑपरेशन संकल्प के तहत भारतीय नौसेना गल्फ ऑफ ओमान और गल्फ ऑफ एडन में जहाजों की सुरक्षा करती है.

अब संख्या बढ़ाकर कई जहाज तैनात हैं ताकि फारस की खाड़ी के पास रहकर जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद की जा सके.

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मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट क्या है और इसमें क्या चल रहा है?

भारतीय नौसेना 2017 से मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट (MSD) चला रही है. इसके तहत दुनिया के छह अलग-अलग इलाकों में जहाज तैनात रहते हैं. ये तैनाती लगातार चलती है. मुख्य मिशन हैं...  

  • गल्फ ऑफ ओमान में ऑपरेशन संकल्प (2019 से) – जहाजों की सुरक्षा.  
  • गल्फ ऑफ एडन में एंटी-पाइरेसी ऑपरेशन – समुद्री डाकुओं से बचाव.  
  • सेशेल्स के पास – केप ऑफ गुड होप रूट की सुरक्षा.  
  • मालदीव के पास – हिंद महासागर में सुरक्षा.  
  • अंडमान-निकोबार के पास – पूर्वी इलाके की निगरानी.  
  • बंगाल की खाड़ी में – म्यांमार-बांग्लादेश बॉर्डर के पास.

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इन सभी जगहों पर नौसेना के जहाज दोस्त देशों के साथ संयुक्त अभ्यास करते हैं. समुद्री हादसों या डकैती में मदद करते हैं. होर्मुज संकट के कारण गल्फ ऑफ ओमान में पहले एक जहाज था, फिर तीन हो गए और अब और बढ़ाए गए हैं.

भारत के पास होर्मुज का विकल्प क्या है?

नौसेना विशेषज्ञ रिटायर्ड कमोडोर रंजीत राय ने बताया कि फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का कोई तुरंत विकल्प नहीं है. खाड़ी से तेल बहुत सस्ता आता है. अगर रूस से ज्यादा तेल लाना पड़े या वेनेजुएला-अमेरिका से, तो परिवहन खर्च बहुत बढ़ जाएगा. 

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सऊदी तेल को जेद्दाह से लैंड रूट से गल्फ ऑफ एडन तक लाने का विकल्प है, लेकिन लॉजिस्टिक्स और लागत बहुत ज्यादा होगी. भारत ईरान से बात कर रहा है कि भारतीय जहाज सुरक्षित रहें. तीन LPG जहाजों को पहले ही सुरक्षित पहुंचाया गया है. MEA के अनुसार 20 से ज्यादा भारतीय जहाज अभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज   के पश्चिम में फंसे हैं.

भारतीय नौसेना की भूमिका और भविष्य की तैयारी

नौसेना के जहाज बंदरगाह पर नहीं रह सकते. वे लगातार हाई अलर्ट पर हैं. अगर ईरान सुरक्षा की गारंटी दे तो नौसेना फारस की खाड़ी में भी प्रवेश कर सकती है. ये तैनाती सिर्फ जहाजों की एस्कॉर्ट के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की किसी भी जरूरत के लिए है. जंग का भविष्य अनिश्चित है.

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इसलिए भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिए हर तैयारी कर रहा है. LPG की कमी से घरेलू संकट बढ़ रहा है, इसलिए नौसेना की ये तैनाती बहुत महत्वपूर्ण है. भारतीय नौसेना ने गल्फ ऑफ ओमान और अरब सागर में अतिरिक्त सात जहाज तैनात करके जहाजों की सुरक्षा बढ़ा दी है.

ऑपरेशन संकल्प और मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट के तहत ये कदम उठाए गए हैं. विकल्प महंगे हैं और फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही मुख्य रास्ता है. ये संकट कितने दिन चलेगा, ये देखना बाकी है, लेकिन भारत हर स्थिति के लिए तैयार है.

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