पाकिस्तानी नौसेना की रणनीतिक ताकत को बढ़ाने और उसके आधुनिकीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. चीन के साथ हुए समझौते के तहत निर्मित पाकिस्तान की पहली एडवांस 'हंगोर-क्लास' (Hangor-class) पनडुब्बी सफलतापूर्वक कराची पोर्ट पर पहुंच गई है.
पाकिस्तानी नौसेना ने कहा कि गुरुवार को कराची स्थित नौसेना डॉकयार्ड में इस पनडुब्बी के आने पर समारोह किया गया. इस समारोह में पाकिस्तान फ्लीट के कमांडर, वाइस एडमिरल अब्दुल मुनीब मुख्य अतिथि थे.
समारोह में पाकिस्तान नेवल एकेडमी के कैडेटों ने कराची बंदरगाह में प्रवेश कर रही इस अत्याधुनिक पनडुब्बी और इसके जांबाज चालक दल को पारंपरिक 'समारोह सलामी' दी. इसके साथ ही, आसमान में पाकिस्तानी नौसेना के आधुनिक 'PN Z9EC' हेलीकॉप्टरों ने शानदार फ्लाई-पास्ट कर इस पनडुब्बी का स्वागत किया.
यह भी पढ़ें: भारत की 'तीसरी आंख' को 25 जून को मिलेगा फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस, बढ़ेगी वायु सेना ताकत
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती नौसैनिक ताकत को टक्कर देने और अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान लंबे समय से इस चीनी वेपन सिस्टम का इंतजार कर रहा था.
2015 की सीक्रेट मेगा-डील: साझा पनडुब्बी कार्यक्रम
इस नई पनडुब्बी का कराची पहुंचना पाकिस्तान और चीन के बीच साल 2015 में हस्ताक्षरित एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़े रक्षा समझौते का हिस्सा है. इस रक्षा सौदे के तहत, चीन को पाकिस्तानी नौसेना के लिए कुल आठ 'हंगोर-क्लास' डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियों का निर्माण करना है.
इस सौदे की खास बात यह है कि इसकी शुरुआती चार पनडुब्बियों का निर्माण पूरी तरह से चीन में 'चीन शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंटरनेशनल कंपनी' (CSIC) द्वारा किया जा रहा है, जिसमें से पहली पनडुब्बी अब पाकिस्तान को सौंप दी गई है.
वहीं, इस समझौते के दूसरे चरण के तहत, बाकी बची चार पनडुब्बियों का निर्माण और असेंबलिंग खुद पाकिस्तान के अंदर 'कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स' में किया जा रहा है. इसके लिए चीन अपनी तकनीक पाकिस्तान को ट्रांसफर कर रहा है.
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से पाकिस्तान खुद अपने दम पर आधुनिक पनडुब्बियों के निर्माण और रखरखाव में सक्षम होने का दावा कर रहा है, जो दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक और सैन्य गठजोड़ को साफ तौर पर दर्शाता है.
बंगाली शब्द 'हंगोर' और 1971 से पहले की यादें
इस एडवांस पनडुब्बी को दिया गया 'हंगोर' नाम ऐतिहासिक रूप से बेहद दिलचस्प है. मूल रूप से 'हंगोर' एक बंगाली शब्द है जिसका हिंदी में अर्थ 'शार्क' होता है. यह नाम पाकिस्तान की साल 1971 से पहले की उन नौसैनिक परंपराओं और इतिहास को सम्मान देने के लिए चुना गया है, जब आज का बांग्लादेश 'पूर्वी पाकिस्तान' के रूप में पाकिस्तान का ही हिस्सा हुआ करता था.
यह भी पढ़ें: आ रहा मौसम का महादानव अल-नीनो, क्या इसे रोक पाएगा 'इंडियन अल-नीनो'?
पाकिस्तानी नौसेना के इतिहास में 'हंगोर' नाम की मूल पनडुब्बी फ्रांस द्वारा निर्मित एक 'डेफने-क्लास' हमलावर पनडुब्बी थी, जिसने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया था. अब उसी ऐतिहासिक नाम को जीवित रखते हुए, इस नई पीढ़ी की चीनी पनडुब्बियों की पूरी सीरीज का नाम 'हंगोर क्लास' रखा गया है.
आधुनिक युग की ये हंगोर-क्लास पनडुब्बियां पुराने मॉडलों की तुलना में तकनीकी रूप से बेहद उन्नत, अधिक मारक क्षमता वाली और समुद्र की गहराइयों में छिपकर हमला करने की स्टेल्थ क्षमता से पूरी तरह लैस हैं.
हिंद महासागर और अरब सागर के सुरक्षा समीकरणों पर असर
समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हंगोर-क्लास की इन डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के पाकिस्तानी बेड़े में शामिल होने से अरब सागर में सैन्य संतुलन को बदलने की कोशिश की जा रही है. ये पनडुब्बियां अत्यधिक आधुनिक रडार, सोनार प्रणालियों और लंबी दूरी के टॉरपीडो व एंटी-शिप मिसाइलों से लैस हैं.
चीनी तकनीक पर आधारित होने के कारण ये पानी के नीचे बहुत कम आवाज करती हैं, जिससे इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है. आने वाले समय में जब सभी आठ पनडुब्बियां पाकिस्तानी नौसेना का हिस्सा बन जाएंगी, तो यह क्षेत्र में भारतीय नौसेना की पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमताओं के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकती हैं.
aajtak.in