चीन ने प्रशांत महासागर में किया परमाणु मिसाइल का परीक्षण, कई देश चिंता में

चीनी नौसेना ने प्रशांत महासागर में पनडुब्बी से सफलतापूर्वक मिसाइल का परीक्षण किया. JL-3 जैसी इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल का परीक्षण हुआ. इससे चीन की न्यूक्लियर ट्रायड की क्षमता काफी बढ़ गई है.

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ये तस्वीर उसी मिसाइल परीक्षण की है जिसे चीन ने आज प्रशांत महासागर में किया है. (Photo:X@globaltimesnews) ये तस्वीर उसी मिसाइल परीक्षण की है जिसे चीन ने आज प्रशांत महासागर में किया है. (Photo:X@globaltimesnews)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:55 PM IST

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नौसेना ने सोमवार को एक परमाणु पनडुब्बी से ICBM मिसाइल का सफल परीक्षण किया. पनडुब्बी ने डमी वॉरहेड वाली मिसाइल प्रशांत महासागर के तय क्षेत्र में दागी, जो सटीक जगह पर गिरी. परीक्षण के मात्र 51 मिनट बाद मीडिया ने इसकी जानकारी दी.  

यह परीक्षण चीन की न्यूक्लियर ट्रायड को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है. न्यूक्लियर ट्रायड में तीन हिस्से होते हैं - जमीन पर ICBM, हवा में बमवर्षक विमान और समुद्र में पनडुब्बी से लॉन्च मिसाइल. विशेषज्ञ झांग जुनशे के अनुसार, पनडुब्बी से लॉन्च मिसाइल सबसे सुरक्षित हथियार माना जाता है क्योंकि पनडुब्बी समुद्र की गहराई में छिपकर लंबे समय तक गश्त कर सकती है. दुश्मन के लिए इसे ढूंढना बहुत मुश्किल होता है.

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JL-3 मिसाइल की क्षमता

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह JL-3 (जुलांग-3) पनडुब्बी से लॉन्च इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल थी, जिसकी रेंज 8000 से 10000 किलोमीटर से ज्यादा है. यह 2025 में हुए सैन्य परेड में दिखाई गई थी. JL-3 तीसरी पीढ़ी की मिसाइल है जो समुद्र से दुश्मन के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है. इससे पहले 2024 में चीन ने भूमि से ICBM का परीक्षण किया था. दोनों परीक्षण एक-दूसरे को मजबूत करते हैं.

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चीन के पास Type 094, Type 094A और नई पीढ़ी की सामरिक परमाणु पनडुब्बियां हैं. ये पनडुब्बियां परमाणु ऊर्जा से चलती हैं और लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकती हैं. परीक्षण में पनडुब्बी की गति, पानी के अंदर से मिसाइल लॉन्च और लंबी दूरी की मार्गदर्शन प्रणाली की पूरी जांच हुई. इससे साबित होता है कि चीन की समुद्री न्यूक्लियर ताकत अब किसी भी स्थिति में जवाबी हमला कर सकती है.

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यह परीक्षण चीन की न्यूक्लियर क्षमता को और विश्वसनीय बनाता है. विशेषज्ञ सॉन्ग झोंगपिंग कहते हैं कि जमीन और समुद्र दोनों से ICBM परीक्षण के बाद चीन की डेटरेंस क्षमता बहुत बढ़ गई है. इससे दुश्मन सोच-समझकर कदम उठाएगा. चीन का कहना है कि यह वार्षिक प्रशिक्षण का हिस्सा था, डमी वॉरहेड इस्तेमाल किया गया और संबंधित देशों को पहले सूचना दे दी गई थी.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

जापान ने इस परीक्षण पर चिंता जताई और कहा कि मिसाइल उसके क्षेत्र के ऊपर से गुजरी. चीन ने जवाब दिया कि यह रक्षा नीति का हिस्सा है,किसी खास देश को निशाना नहीं बनाया गया और पूरी पारदर्शिता बरती गई. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि यह सामान्य सैन्य प्रशिक्षण था और संबंधित देशों को पहले सूचित किया गया था.

चीन की न्यूक्लियर नीति रक्षात्मक है. वह कहता है कि वह पहले परमाणु हमला नहीं करेगा लेकिन अगर हमला हुआ तो जवाबी हमला जरूर करेगा. पनडुब्बी से मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता इसे और मजबूत बनाती है. इससे चीन की समुद्री सुरक्षा बढ़ती है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी स्थिति मजबूत होती है.

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यह परीक्षण चीन की स्वदेशी मिसाइल टेक्नोलॉजी की सफलता दिखाता है. JL-3 मिसाइल कई बार हाई और लो ट्रैजेक्टरी परीक्षणों से गुजर चुकी है. अब पूर्ण दूरी का परीक्षण होने से इसकी विश्वसनीयता साबित हो गई है. चीन अब अपनी परमाणु शक्ति को लगातार आधुनिक बना रहा है.

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यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है. चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां पड़ोसी देशों को चिंतित करती हैं. लेकिन चीन का कहना है कि यह उसकी वैध सुरक्षा जरूरत है. यह परीक्षण चीन को किसी भी संभावित खतरे का मुकाबला करने की क्षमता देता है

पनडुब्बी से मिसाइल का सफल परीक्षण चीन की न्यूक्लियर ट्रायड को नई मजबूती देता है. इससे समुद्री, जमीन और हवाई तीनों माध्यमों से जवाबी हमले की क्षमता बढ़ गई है. यह परीक्षण चीन की परिपक्व सामरिक क्षमता को दर्शाता है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी जताई जा रही है, चीन इसे सामान्य प्रशिक्षण बता रहा है. भविष्य में यह क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है.

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