चीन अपनी नौसेना को तेजी से मजबूत कर रहा है. अमेरिका के रक्षा विभाग की 2025 रिपोर्ट में पहली बार कहा गया है कि चीन 2035 तक 6 और एयरक्राफ्ट कैरियर बना लेगा. चीन के कैरियरों की संख्या 9 हो जाएगी. फिलहाल चीन के पास 3 कैरियर हैं. अब डालियन शिपयार्ड में चौथे कैरियर (टाइप 004) का काम तेजी से चल रहा है. यह चीन की नौसेना (PLAN) के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.
उत्तर चीन के डालियन शिपयार्ड में चौथे एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण कार्य जोरों पर है. 2025 की शुरुआत में सूखे डॉक में पहली बार बड़े हल पार्ट्स दिखाई दिए थे. अब एक साल से भी कम समय में इन हिस्सों को जोड़कर कैरियर का पूरा हल (मुख्य शरीर) बन चुका है.
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सैटेलाइट इमेजरी से साफ दिख रहा है कि चीन की शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री कितनी तेज और बड़ी है. हालांकि कैरियर अभी लॉन्च नहीं हुआ है. लॉन्च होने के बाद भी इसमें इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, हथियार, रडार और अन्य उपकरण लगाने में कई साल लगेंगे. इसके बाद समुद्री परीक्षण होंगे, तब जाकर यह चीनी नौसेना में शामिल होगा.
चीन के पास अभी कितने कैरियर हैं?
चीन के पास फिलहाल तीन एयरक्राफ्ट कैरियर हैं...
चौथा कैरियर इनमें सबसे बड़ा और एडवांस हो सकता है. हालांकि इसकी सटीक क्षमता, साइज और इंजन सिस्टम (परमाणु या पारंपरिक) को लेकर अभी भी बहुत सारी अफवाहें हैं.
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अमेरिका की 2025 डिफेंस रिपोर्ट में पहली बार साफ कहा गया है कि चीन 2035 तक कुल 9 एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने का लक्ष्य रखता है. यानी अगले 10 साल में 6 नए कैरियर. विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कैरियर बनाने के लिए चीन को अब एक साथ दो कैरियर बनाने शुरू करने होंगे. डालियन के अलावा जियांगनान शिपयार्ड दूसरा बड़ा केंद्र हो सकता है, जहां फूजियान कैरियर बना था.
इतनी तेजी से निर्माण क्यों?
चीन की शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री दुनिया में सबसे बड़ी और सबसे तेज है. एक साल के अंदर बड़े-बड़े हल पार्ट्स को जोड़कर पूरा स्ट्रक्चर तैयार करना आसान काम नहीं है. यह चीन की औद्योगिक क्षमता को दिखाता है. लेकिन कैरियर बनाना सिर्फ हल तैयार करना नहीं होता. इसमें हवाई जहाजों को उड़ाने वाले सिस्टम (कैटापल्ट), रडार, मिसाइल डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और हजारों अन्य टेक्नोलॉजी लगानी पड़ती है. सालों लगते हैं.
एयरक्राफ्ट कैरियर किसी भी नौसेना का दिल होते हैं, लेकिन वे अकेले नहीं चलते. इनके साथ क्रूजर, डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, सप्लाई शिप और न्यूक्लियर सबमरीन भी होने चाहिए. अगर चीन 9 कैरियर बनाने जा रहा है तो उसे इन सपोर्टिंग जहाजों की भी बड़ी संख्या में जरूरत पड़ेगी. चीन इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है.
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अगर चीन 2035 तक 9 कैरियर बना लेता है तो दुनिया की नौसेना शक्ति का पूरा बैलेंस बदल जाएगा. अमेरिका के पास अभी 11 कैरियर हैं. चीन अगर परमाणु ऊर्जा वाले आधुनिक कैरियर बना लेगा तो मात्रा के साथ गुणवत्ता में भी अमेरिका के करीब पहुंच जाएगा. इससे चीन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी नौसेना और हवाई ताकत बहुत दूर तक प्रोजेक्शन कर सकेगा. ताइवान, दक्षिण चीन सागर और आगे प्रशांत महासागर में चीन की पहुंच बढ़ जाएगी.
भारत के लिए क्या मायने रखता है?
चीन की बढ़ती नौसेना ताकत भारत के लिए भी चिंता का विषय है. हिंद महासागर क्षेत्र में चीन पहले से ही अपने जहाज भेज रहा है. अगर उसके पास ज्यादा कैरियर हो गए तो भारतीय नौसेना को और ज्यादा सतर्क रहना पड़ेगा. भारत भी अपने कैरियर प्रोग्राम (INS विक्रांत, विक्रमादित्य आदि) को तेज करने पर जोर दे रहा है.
चीन का चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर उसकी नौसेना आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है. 2035 तक 9 कैरियर बनाने का लक्ष्य चीन को दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना शक्ति बनाने की ओर ले जा रहा है. डालियन शिपयार्ड में चल रहा निर्माण इस बात का सबूत है कि चीन अपनी मैरीटाइम इंडस्ट्री कैपेसिटी को पूरी ताकत से इस्तेमाल कर रहा है. अभी कई साल लगेंगे जब यह चौथा कैरियर पूरी तरह तैयार होकर नौसेना में शामिल होगा.
ऋचीक मिश्रा