विवेक तिवारी हत्याकांड में प्रशांत चौधरी दोषी करार, संदीप सिंह बरी, 21 सितंबर को होगा सजा का ऐलान

विवेक तिवारी हत्याकांड में लखनऊ कोर्ट ने प्रशांत चौधरी को IPC की धारा 304(2) के तहत दोषी करार दिया. जबकि दूसरे आरोपी संदीप कुमार को बरी कर दिया गया. अब सजा का ऐलान 21 सितंबर को होगा. पढ़ें पूरी खबर.

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इस मामले में प्रशांत चौधरी का साथी संदीप बरी हो गया (फोटो-ITG) इस मामले में प्रशांत चौधरी का साथी संदीप बरी हो गया (फोटो-ITG)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 17 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

लखनऊ में एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में कोर्ट का फैसला आ गया है. डीजे कोर्ट ने आरोपी पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है. कोर्ट ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304(2) के तहत दोषी माना है. वहीं, इस मामले में दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को बरी कर दिया गया है. प्रशांत चौधरी की सजा का ऐलान 21 सितंबर को होगा.

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प्रशांत चौधरी दोषी, संदीप कुमार बरी

विवेक तिवारी हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस के दो सिपाहियों प्रशांत चौधरी और संदीप सिंह को आरोपी बनाया गया था. दोनों के खिलाफ लखनऊ की अदालत में मुकदमा चल रहा था. अब कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है. वहीं, दूसरे आरोपी संदीप कुमार को आरोपों से बरी कर दिया गया है.

कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रशांत चौधरी की सजा पर सुनवाई होगी. अदालत 21 सितंबर को सजा का ऐलान करेगी. धारा 304(2) के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी सजा की अवधि को लेकर फैसला अदालत सुनाएगी. इस मामले में संदीप कुमार को बरी किए जाने के साथ उनके खिलाफ चल रहा मुकदमा समाप्त हो गया है

साल 2018 में हुई थी विवेक तिवारी की हत्या

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यह मामला 28 सितंबर 2018 को लखनऊ के गोमती नगर विस्तार इलाके में हुई घटना से जुड़ा है. एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी. घटना के वक्त वह अपनी महिला सहकर्मी सना खान के साथ वापस जा रहे थे. एफआईआर के मुताबिक, इसी दौरान नाइट पेट्रोलिंग कर रहे गोमती नगर विस्तार थाने के सिपाहियों ने उन्हें गोली मार दी थी.

इस मामले में प्रशांत चौधरी और संदीप सिंह को आरोपी बनाया गया था. घटना के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी. करीब आठ साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब कोर्ट ने फैसला सुनाया है.

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