सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता पंकज शर्मा पर हुए कथित जानलेवा हमले का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है. दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने जांच की प्रगति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. साथ ही स्पष्ट किया है कि पीड़ित की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए. अदालत ने यह भी कहा है कि जांच की निगरानी वरिष्ठ स्तर के अधिकारी करेंगे और अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर एक आपराधिक रिट याचिका (क्रिमिनल रिट पिटीशन) से जुड़ा है. याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता पंकज शर्मा हैं, जबकि प्रतिवादी के रूप में दिल्ली सरकार और अन्य पक्षों को शामिल किया गया है. 14 जुलाई 2026 को इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया. यह अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दिया गया प्रारंभिक न्यायिक निर्देश है.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत के समक्ष मामले का तत्काल उल्लेख (Oral Mentioning) किया. उन्होंने कोर्ट को बताया कि मामला बेहद गंभीर है और तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलील स्वीकार करते हुए मामले को तुरंत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया. इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी की मौजूदगी में आगे की कार्यवाही शुरू की.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह मामले में अब तक की जांच और कार्रवाई की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे. अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि जांच किस चरण में है, अब तक क्या कार्रवाई हुई है और पीड़ित द्वारा दर्ज कराई गई दूसरी शिकायत पर क्या कदम उठाए गए हैं. दूसरी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पहली एफआईआर वापस लेने के लिए पंकज शर्मा को धमकियां दी गईं.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि स्टेटस रिपोर्ट किसी सामान्य जांच अधिकारी की ओर से नहीं, बल्कि कम से कम दिल्ली पुलिस के डीसीपी (Deputy Commissioner of Police) रैंक के अधिकारी द्वारा दाखिल की जाएगी. इससे साफ संकेत मिलता है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की जांच को बेहद गंभीरता से देख रहा है और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करना चाहता है. अदालत ने अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को तय की है.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक पंकज शर्मा के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. इसका सीधा अर्थ यह है कि दिल्ली पुलिस और प्रशासन यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें और उनके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा किसी प्रकार की धमकी या हमले की पुनरावृत्ति न हो.
याचिका के अनुसार, पंकज शर्मा पिछले 20 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के सदस्य हैं. उन्होंने अधिवक्ता तरुण गुप्ता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में पुलिस सुरक्षा, निष्पक्ष जांच, जांच किसी अन्य एजेंसी को सौंपने तथा एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग की गई है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 11 जुलाई को दोपहर करीब 12 बजे कई लोगों ने उनके दिल्ली स्थित घर में घुसकर हमला किया. आरोप है कि हमलावरों ने उनका सिर लोहे के गेट से कई बार टकराया, जिससे उनके सिर में गहरा घाव हो गया और काफी खून बहा. गंभीर चोट लगने के बाद वह बेहोश हो गए और उन्हें तुरंत पेंटामेड अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके सिर पर आठ टांके लगाए गए.
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि आरोपियों में से एक ने खुद को इलाके का अध्यक्ष बताते हुए राजनीतिक प्रभाव का हवाला दिया और कहा कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी. पंकज शर्मा का आरोप है कि इसी प्रभाव के कारण पुलिस ने शुरुआत में एफआईआर दर्ज करने में भी आनाकानी की. बाद में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने मामले को केवल साधारण मारपीट का मामला मानते हुए गंभीर धाराएं नहीं लगाईं.
याचिका के मुताबिक, जिला क्राइम टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित का बयान भी दर्ज किया. इसके बावजूद जांच अधिकारी ने हत्या के प्रयास और गंभीर चोट से जुड़ी धाराएं नहीं लगाईं. मॉडल टाउन थाने में 11 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 332(c), 115(2) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई. जबकि याचिकाकर्ता का कहना है कि पुलिस को धारा 109 (हत्या का प्रयास), 117 और 118(2) जैसी गंभीर धाराएं भी जोड़नी चाहिए थीं.
याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि हमले के अगले दिन कुछ आरोपी फिर उनके घर पहुंचे और जबरन अंदर घुसने की कोशिश की. इस दौरान उन्होंने परिवार को एफआईआर वापस लेने की धमकी दी. पंकज शर्मा का कहना है कि इन धमकियों के बावजूद पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की. उनका आरोप है कि आरोपी लगातार उन्हें और उनके परिवार को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी कड़ा रुख अपनाया. एसोसिएशन ने 13 जुलाई को एक प्रस्ताव पारित कर कथित हमले की निंदा की और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि बार एसोसिएशन के हस्तक्षेप के बावजूद पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं रही. इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की गई है.
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में अंतिम टिप्पणी नहीं की है. अदालत ने केवल दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है, जांच की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. अब 16 जुलाई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट यह तय करेगा कि जांच में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और क्या एफआईआर में गंभीर धाराएं जोड़ने या जांच स्थानांतरित करने जैसे मुद्दों पर कोई अतिरिक्त आदेश दिया जाएगा.
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की कार्यकारिणी समिति ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें अधिवक्ता पंकज शर्मा पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की गई और कहा गया कि यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और कानून के शासन पर सीधा हमला है. एसोसिएशन ने चिंता जताई कि गंभीर चोटें आने और जानलेवा हमले के बावजूद एफआईआर में घटना की वास्तविक गंभीरता को प्रतिबिंबित नहीं किया गया. एससीबीए की कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से दिल्ली पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष और कानून के अनुरूप जांच कराने की मांग की.
परवेज़ सागर